संघ प्रमुख शांतिकुंज के कार्यक्रम में शामिल, देव संस्कृति विश्विद्यालय मे व्याख्यान माला कार्यक्रम भारत पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है।
देहरादून/हरिद्वार– हरिद्वार पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शांतिकुंज के देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। विश्वविद्यालय द्वारा वसुधैव कुटुंबकम् थीम पर आयोजित दो दिवसीय व्याख्यान माला में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए मोहन भागवत ने शांतिकुंज के साधकों और यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित किया। अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने वसुधैव कुटुंबकम के विचार पर विस्तार से अपनी बात रखी। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत देश पूरी दुनिया को अपना परिवार मानता है भारत के ऋषि मुनियों ने इस विचार को वसुधैव कुटुंबकम् की भावना का नाम दिया है। आपको बता दे की रविवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी हरिद्वार दौरे पर थे। जेपी नड्डा ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में शिरकत की थी।
मोहन भागवत आज हरिद्वार के दौरे पर थे जहां उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान माला कार्यक्रम में प्रतिभाग किया इससे पूर्व उन्होंने शिवालय में रुद्राभिषेक करते हुए देश की मंगल कामना के लिए पूजा अर्चना की, G-20 की थीम वासुदेव कुटुंबकम पर आयोजित व्याख्यान माला में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आत्मा और परमात्मा सर्वत्र है। दुनिया में जो भी विविधता है उससे हमारा आत्मीय संबंध है। हमें स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि कुटुंब के लिए जीना है। पर्यावरण और प्रकृति हमारी माता है। इसका दोहन ठीक नहीं है। वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को विविध पहलुओं से उन्होंने समझाया। उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान विश्व कल्याण के लिए हुआ है। हमें इस अर्थ को समझने की जरूरत है। भारत के अमरत्व की यही धारणा है। विविधता में एकता भारत की पहचान है। वसुधैव कुटुंबकम की परिकल्पना तभी साकार होगी जब धर्म और जाति से ऊपर उठकर मनुष्य अपने को मनुष्य समझें। यही नहीं जीव जंतु और पेड़ पौधों को भी जीव समझें। भारत का ज्ञान विश्व कल्याण के लिए है ।धर्म वही है जिसे धारण किया जाए्। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान माला में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आत्मा और परमात्मा सर्वत्र है। दुनिया में जो भी विविधता है उसे हमारा आत्मीय संबंध है। हमें स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि कुटुंब के लिए जीना है। पर्यावरण और प्रकृति हमारी माता है इसका दोहन ठीक नही है।

