मुख्यमंत्री पहुँचे जोशीमठ आपदा पीड़ितों से को मुलाकात,जल्द से जल्द मिले मुवावजा राशि।

मुख्यमंत्री पहुँचे जोशीमठ आपदा पीड़ितों से को मुलाकात,जल्द से जल्द मिले मुवावजा राशि।
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जोशीमठ– उत्तराखंड के चमोली जिले में मौजूद जोशीमठ, जिसे संस्कृत में ज्योतिर्मठ कहा जाता है । ये आदि शंकराचार्य द्वारा बनाई गई चार पीठों में से एक है । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब जोशीमठ पहुंचे तो वहां रहने वाले लोग मुख्यमंत्री से अपना दर्द बांटते हुए फफक फफक कर रोने लगे ।                 कुदरत की मार के सामने मुख्यमंत्री भी कुछ कर नही सकते, मुख्यमंत्री धामी के पास सिर्फ सांत्वना के लिए शब्द थे और ये भरोसा कि सरकार ने स्थाई पुनर्वास के लिए इलाकों का चयन कर लिया है लेकिन ये दरारों वाले उजड़े घर तो अब छोड़ने ही पडेंगे ।

क्या है जोशीमठ का महत्व–

जोशीमठ (संस्कृत नाम ज्योतिर्मठ) सिर्फ एक शहर नहीं है बल्कि ये भारत की धार्मिक ऐतिहासिक पहचान भी है । आज से 2 हजार 810 साल पहले ये शहर आदि शंकराचार्य ने बसाया था । आदि शंकराचार्य इस शहर में रहे थे । हिंदुओं के चारों धामों में से एक श्री बद्रीनाथ धाम में जब बर्फ पड़ जाती है तो नारायण के श्रीविग्रह (प्रतिमा) को ज्योतिर्मठ में ही रखा जाता है । तब बद्रीनाथ जी के कपाट 6 महीने के लिए बंद हो जाते हैं और यहीं जोशीमठ में बद्री नारायण की पूजा होती है । बद्रीनाथ के रावल भी कपाट बंद होने के बाद यहीं जोशीमठ में ही रहते हैं । यहीं पर आदिशंकराचार्य का बसाया हुआ गुरुकुल माधवाश्रम भी है जहां आज भी करीब 60 विद्यार्थी पढ़ते हैं ।

जोशीमठ को गेट वे ऑफ हिमालय भी कहते हैं । लेकिन जोशीमठ हिमालय से भी तेज खिसक रहा है ।  हिमालय के खिसकने की दर 40 मिलीमीटर प्रति साल है लेकिन जोशीमठ 85 मिलीमीटर प्रति साल की रफ्तार से खिसक रहा है । जोशीमठ में कुल 4,500 इमारतें हैं लेकिन 700 से ज़्यादा मकानों में अभी ज्यादा बड़ी दरारें देखी गई हैं । सभी मकानों के निवासियों को शेल्टर होम में ले जाया जा रहा है । करीब 100 परिवारों को विस्थापित किया गया है । ये पूरा इलाका डेढ किलोमीटर में फैला हुआ है । आधा शहर दरक चुका है । कुल 4 वार्ड पूरी तरह से असुरक्षित घोषित हुए हैं… इनमें गांधीनगर, सिंहद्वार, सुनिल वार्ड और मनोहर बाग प्रमुख है । समुद्र तल से 6 हजार एक सौ पचास फीट की ऊंचाई पर बसे चमोली जिले का ये इलाका जोशीमट चीन सीमा से बहुत नजदीक है । लेकिन अब आर्मी की कुछ पोस्ट भी यहां से शिफ्ट की गई हैं ।

लोग रोते हुए घर खाली कर रहे हैं और घर खाली करवाने के लिए भी SDRF के जवान लगातार काम में जुटे हुए हैं।723 घरों में दरारें हैं और सभी घरों में लाल निशान लगा दिए गए हैं ।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नगरपालिका क्षेत्र जोशीमठ के भू-स्खलन एवं भू- धसाव प्रभावित क्षेत्रों में प्रभावितों को बाजार रेट पर मुआवजा दिया जायेगा। बाजार की दर हितधारकों के सुझाव लेकर और जनहित में जारी की जाएगी। 03 हजार प्रभावित परिवारों को कुल 45 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गई है। तात्कालिक तौर पर प्रति परिवार 1.50 लाख रूपये की अंतरिम सहायता दी जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में भूधसाव के कारण प्रभावित भू-भवन स्वामियों/परिवारों को स्थाई अध्यासन विस्थापन नीति तैयार होने से पूर्व 01 लाख रूपये की अग्रिम धनराशि दी गई है। प्रभावित भू-भवन स्वामियों / परिवारों को अपने भवन के सामान की ढुलाई एवं तात्कालिक आवश्यकताओं हेतु गैर समायोजय एकमुश्त विशेष ग्रान्ट के रूप में 50 हजार रूपये की धनराशि दी गई है। यह धनराशि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्राधिकरण द्वारा जारी की गई। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में कुल खर्चे का पूरा आकलन कर सहायता राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने जोशीमठ में आपदा प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु अपने एक माह का वेतन दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में जिन मकानों में दरारें आयी हैं, उन मकानों को ध्वस्त करने की अफवाह फैलाई जा रही है। उन्होंने सभी से अपील की है कि इन अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रभावित क्षेत्र में दरार वाले मकानों को ध्वस्त करने की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्र में दरार वाले मकानों को तब तक ध्वस्त न कराया जाय, जब तक अपरिहार्य न हो। मुख्यमंत्री जोशीमठ प्रभावित क्षेत्र की सभी व्यवस्थाओं की अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट ले रहे हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि जोशीमठ क्षेत्र में प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी हर समस्याओं का शीघ्रता से निदान किया जाय। सुरक्षा की दृष्टि से जिन परिवारों को अन्यत्र स्थानों पर शिफ्ट कराया जा रहा है उनको वहां सभी बेहतर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाय। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रभावितों के विस्थापन के लिए उनके सुझावों के आधार पर इतनी बेहतर व्यवस्था की जाय कि यह पूरे देश के लिए नजीर बने। उन्होंने कहा कि प्रभावितों के इस दुःख-दर्द में सरकार द्वारा उनको हर सम्भव सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।

जोशीमठ के प्रभावित क्षेत्र में शासन के उच्चाधिकारी क्षेत्र में प्रभावितों से मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। सचिव मुख्यमंत्री श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम मौके पर प्रशासन के अधिकारियों के साथ सभी व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। जोशीमठ के भू-स्खलन एवं भू- धसाव प्रभावित क्षेत्र में भूगर्भीय तथा अन्य आवश्यक जांचें संबंधित संस्थाओं द्वारा की जा रही है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की टीम भी मौके पर मौजूद है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब हिमालय की उत्पत्ति हुई थी तब ही जोशीमठ की जमीन दरअसल भूस्खलन से ही बनी थी। और यहां जमीन की सतह बहुत पुराने मलबे पर ही है । कई एक्सपर्ट्स इस मलबे के नीचे भी पानी होने का दावा कर रहे हैं ।

इस खतरे को लेकर पहली बार अंग्रेजों के जमाने में यानी कि 1886 के हिमालयन गजेटियर में जोशीमठ में भूस्खलन के मलबे पर होने का उल्लेख किया गया था । 1976 में भी यहां मकानों में दरारों के समाचार आए थे तब । गढवाल के कमिश्नर महेश चंद्र मिश्रा की देखरेख में एक कमेटी की रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि जमीन कभी भी दरक सकती है । 47 साल पहले आई इस रिपोर्ट में ही बता दिया गया था कि ड्रेनेज, ईंट बजरी सीमेंट का इस्तेमाल यहां नहीं होनी चाहिए और ऊंची इमारतें भी यहां नहीं बननी चाहिए इसके अलावा यहां पहाड़ों के अंदर सुरंग और पहाडों पर विस्फोट करने की मनाही जैसा गाइडलाइंस भी जारी की गई थीं लेकिन दुर्भाग्य है कि लगभग 50 साल पुरानी इन गाइडलाइंस को फॉलो ही नहीं किया गया । जिन क्षेत्रों में दरारें नहीं हैं वहां गाइडलाइन तैयार कर दी गई हैं । लेकिन पता नहीं लोग इन गाइडलाइन्स को कितना मानेंगे ?

प्रधानमंत्री स्वयं इस मामले को देख रहे हैं । धामी से पीएम ने बात भी की है । इस पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक भी हुई है । केंद्र ने कमेटी भी बनाई है और एक्सपर्ट्स की टीमें दौरें भी कर रही हैं ।

उत्तराखंड के करीब 484 गांव ऐसे हैं जहां पर ऐसी ही आपदा मुहाने पर है । अब  बदरीनाथ और केदारनाथ में भी पूरी तरह से निर्माण रोकने की बात कही जा रही है । कर्णप्रयाग, मसूरी, नैनीताल, उत्तरकाशी और चंपावत के कई गांवों में डर का माहौल है । खतरा नैनीताल में भी बताया जा रहा है । नैनीताल की पहाड़ियां तीन तरफ से दरक रही हैं एक्सपर्ट्स का मानना है कि नैनीताल पर भार क्षमता से ज्यादा वजन है ।

Rupesh Negi

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