निलम्बित आईएफएस ऑफिसर पर कसा शिकंजा, विजिलेंस टीम ने की घर की कुर्की की तैयारी।
देहरादून/हरिद्वार– निलंबित आईएफएस और हरिद्वार के पूर्व डीएफओ किशन चंद पर विजिलेंस ने कसा शिकंजा।
हल्द्वानी विजिलेंस कोर्ट जारी किया था गैर जमानती वारंट।
गिरफ्तारी से बचने के लिए इधर से उधर दौड़ रहा है निलंबित अधिकारी। विजिलेंस की टीम ने दिल्ली, मेरठ के साथ हरिद्वार में भी डाला हुआ है डेरा। किशन चंद का पूरा परिवार है घर से फरार। विजिलेंस टीम कभी भी कर सकती है घर की कुर्की।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में आईएफएस किशनचंद ने एक-दो गुना नहीं बल्कि वह अपनी आय से 375 गुना अधिक संपत्ति के मालिक हैं। यह खुलासा उनके खिलाफ चल रही जांच में विजिलेंस सामने आया। उनके खिलाफ चार्जशीट तैयार कर ली गई है। न्यायालय में दाखिल करने से पहले फाइल को अनुमति के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया गया है जबकि राज्य सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी।
आईएफएस किशनचंद के खिलाफ विजिलेंस ने वर्ष 2019 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच शुरू की थी। उन्हें कई बार बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया था। विजिलेंस अब जांच पूरी कर चुकी है। विजिलेंस ने करीब 33 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा किया है। इनमें से केवल सात करोड़ रुपये की संपत्ति किशनचंद के नाम पर है जबकि बाकी परिजनों के नाम पर खरीदी गई है। विजिलेंस के डायरेक्टर अमित सिन्हा ने बताया कि उनके खिलाफ जांच पूरी कर ली गई है।
बेटे के नाम पर स्टोन क्रशर, पत्नी के नाम स्कूल
किशनचंद ने अपने बेटे के नाम पर अभिषेक स्टोन क्रशर लगाया है जबकि पिरान कलियर में पत्नी के नाम से बृज इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल है। पत्नी के नाम से एक ट्रस्ट भी बनाया गया है। अपने नाम संपत्ति खरीदने के लिए किशनचंद ने लोन लिया लेकिन अभी तक लौटाया नहीं।
हरिद्वार डीएफओ रहते जमा कराई लोगों से धनराशि
किशनचंद ने पत्नी के नाम रजिस्टर ट्रस्ट में लोगों से बड़ी मात्रा में धनराशि जमा कराई है। यह धन उन्होंने हरिद्वार का डीएफओ रहते हुए जमा कराया है। विजिलेंस ने चार्जशीट में जिक्र किया है कि हरिद्वार डीएफओ रहते हुए लैंसडौन वन प्रभाग में लोगों को नौकरी देने के एवज में उनकी जमीनें आईएफएस किशनचंद ने अपने नाम कराई हैं। देहरादून के वसंत विहार में 2.40 करोड़ का मकान भी उन्होंने खरीदा है। मकान के लिए 60 लाख का ऋण स्कूल के ट्रस्ट से लिया गया है। पत्नी के खाते से 1.80 करोड़ लिए गए हैं। इस पैसे को एक दिन पहले अलग-अलग लोगों से जमा करवाया गया।

