उत्तराखंड में 2025 तक सवा लाख दीदी बनेंगी लखपति, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लांच की योजना।
देहरादून– राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना शुरू की है। जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने किया है। इस योजना का मकसद 2025 तक 1,25,000 महिलाओं को रोजगार देकर हर हाल में लखपति बनाने का है। मुख्यमंत्री ने इस योजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रदेश में पहले से ही राज्य सरकार महिलाओं के उत्थान और विकास के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है और एक बार फिर इस नई योजना की शुरुआत कर प्रदेश सरकार महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने का काम करेगी। वहीं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि ग्राम्य विकास विभाग से जुड़ी महिलाएं लगातार स्वालंबी होकर काम कर रही है। ऐसे में हमारी कोशिश है की 2025 तक महिलाओं को योजना के माध्यम लखपति बनाया जाए।
उत्तराखंड में आज से लखपति दीदी योजना की हुई शुरुआत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया लखपति दीदी योजना का शुभारम्भ
सर्वे ऑफ इंडिया ग्राउंड हाथीबङकला देहरादून में किया गया था कार्यक्रम का आयोजन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत
कार्यक्रम में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी किया प्रतिभाग
प्रदेश की समूहों से जुड़ी तीन लाख 67 हजार महिलाओं को लखपती बनाया जाना है लक्ष्य
कार्यक्रम में समूहों से जुड़ी उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को भी किया गया सम्मानित।।
उत्तराखंड प्रदेश 9 नवंबर को स्थापना की 23वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। राज्य निर्माण का आधार यहां के युवाओं को रोजगार एवं पहाड़ को पलायन के दंश से बचाना था। इसी क्रम में राज्य की सरकार राज्य में बेरोजगारों को स्व उद्यम से जोड़ने एवं महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कई योजनाएं चला रही है। अब सरकार की ओर से उत्तराखंड लखपति दीदी योजना की घोषणा की गई है।
उत्तराखंड सरकार ने लखपति दीदी योजना का शुभारंभ 4 नवंबर, 2022 को किया गया। इसी दिन राज्य में इगास पर्व मनाया गया। इसे ग्यास अथवा देवोत्थान एकादशी भी पुकारा जाता है। राज्य के 9 नवंबर को होने वाले स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की भी शुरुआत इसके साथ हो जाएगी। योजना का शुभारंभ राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा की जाएगी। सन् 2025 तक कुल सवा लाख महिलाओं को लखपति बनाने की योजना है। ये महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (self help group) से जुड़ी होंगी। राज्य में महिलाओं की आर्थिकी सुधारने के लिए सरकार स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। जैसे चारों धाम बदरीनाथ, केदारनाथ गंगोत्री एवं यमुनोत्री में है कि वहां के लिए प्रसाद तैयार करने, फूल मालाएं आदि तैयार करने की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों के पास है। इस रोजगार से उत्तराखंड राज्य में पहाड़ों पर एक महिला के रोजगार से पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को बल मिल रहा है। लेकिन यह करोबार मात्र 6 माह के लिए होता है, इसके साथ ही राज्य की जीडीपी (GDP) यानी सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के उद्देश्य से भी महिला आधारित आर्थिकी को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
उत्तराखंड सरकार ग्रामीण महिलाओं की आजीविका ओर आर्थिक सुधार करने के लिए कृत संकल्प है। महिलाएं ही पहाड़ के जीवन की आधार हैं। घर के लिए ढोर-डंगर संभालना, खेती-बाड़ी जैसे समस्त काम महिलाओं के ही जिम्मेदारी होती हैं। उनके घरों के अधिकांश पुरुष या तो भारतीय फौज में कार्यरत हैं या रोजी रोटी की तलाश में बड़े शहरों में गए हैं।
इस दौरान प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMGAY) के लाभार्थियों को भी आवासों के आवंटन पत्र वितरित किए जाएंगे। इसी प्रकार स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत चुने गए लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उत्तराखंड के ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी के अनुसार इस योजना से राज्य की ग्रामीण महिलाओं की आजीविका में सुधार आएगा।
समूह में वे लोग जुड़ते है जो अपनापन रखने वाले एक समान अतिसूक्ष्म व्यवसाय/उद्यम चलाने वाले लोगों का एक समूह है, जो अपनी आमदनी से कुछ बचत कर इन छोटी छोटी बचत को समूह के कंबाइंड फंड में शामिल करता रहता हैं बाद में इसे समूह के सदस्यों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समूह की शर्तों, तय ब्याज एवं अवधि के आधार पर बतौर लोन दिया जाता है।
महिला स्वयं सहायता समूह विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे-पापड़, अचार, बड़ी, आटा, दलिया, मुरब्बा आदि का निर्माण करते हैं। इसके जरिए वे बच्चों एवं महिलाओं के पोषण व विकास में योगदान भी कर सकते हैं। इसके साथ ही इनसे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में भी मदद मिलती है। स्वैच्छिक बचत एवं वित्तीय समावेशन को तो प्रोत्साहन मिलता ही है।
- एक महिला स्वयं सहायता समूह में 10 से लेकर 20 सदस्य हों।
- समूह में शामिल होने वाली महिलाओं की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष से लेकर अधिकतम 65 वर्ष के बीच हो।
- इन समूहों में अधिकांशतः बीपीएल वर्ग (BPL class) की महिलाओं को शामिल किया जाता है।
- सभी सदस्य एक ही हित व पृष्ठभूमि (background) से संबंधित हों। मसलन यदि व्यवसाय दूध बेचने का हो तो सभी सदस्य उसी से संबंधित हों।
- समूह का उद्देश्य एक दूसरे की सहायता एवं रोजगार हो।
- समूह न्यूनतम छह माह से सक्रिय रूप से (actively) संचालित हो रहा हो।
- खातों का पूरा लेखा जोखा रखा गया हो।
इस योजना का संचालन राष्ट्रीय आजीविका मिशन कार्यक्रम (National livelihood Mission program) के तहत ग्राम्य विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। सन् 2014 में इसकी शुरुआत हुई थी, इस दौरान करीब 26 हजार से अधिक महिलाओं की आय को एक लाख से ऊपर तक पहुंचाया जा चुका है।

