70 और 80 के दशक से संजोए हुए हैं अपने वाद्य यंत्रों को पिता की विरासत को पुत्र ने बढ़ावा दिया तो पोता भी नहीं रहा पीछे।

70 और 80 के दशक से संजोए हुए हैं अपने वाद्य यंत्रों को पिता की विरासत को पुत्र ने बढ़ावा दिया तो पोता भी नहीं रहा पीछे।
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देहरादून– उत्तराखंड में प्रतिभागियों की कमी नहीं है कमी है तो उनके हुनर को पहचानने की आज आपको ऐसे शख्सियत से रूबरू कराते हैं जोकि 80 और 90 के दशक में अपने हुनर से लोगों के मन को मोह लेते थे। पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा सिन्दूडी गांव खेतू के रहने वाले जयानंद धौलाखन्डी शुरू से ही संगीत के इतने बेहतरीन कलाकार है कि उन्होंने अपनी संस्कृति और संस्कृति से जुड़े बाद्य यंत्रों को इस तरह से संजोया की वह खुद ही उसमें इस तरह रम गए कि वह जहां भी शादियां होती वो वहां जाकर अपने उत्तराखंड के प्रसिद्ध मस्कबीन की धुन ढोल दमोऊ और रणसिंहगा के साथ लोगों को अपनी और खींच लेते थे इस हुनर को जयनंद धौलाखंडी आज भी जीवित रखे हुए हैं खुद भी जयनंद धौलाखंडी आज भी अपनी कला से लोगों के मन को लुभाते हैं तो वही उनका पुत्र संजय धौलाखंडी भी अपनी इस विरासत को भूल ना पाए और उन्होंने भी अपने पिता के मार्गदर्शन पर चलने के ठानी संजय धोलाखंडी एमएबीएड हैं लेकिन उनके ऊपर भी विरासत का इस कदर से जुनून चला कि उन्होंने शुरुआती दौर में धौलाखंडी बैंड खेतू की शुरुआत की, साथ ही उन्होंने भी लोगों को अपनी कला से मंत्र मुक्त किया और आज भी लोगों के बीच में वह अपनी कला का अक्सर प्रदर्शन करते हैं साथ ही संजय धौलाखंडी आज उत्तराखंड के लोक गायक कलाकार के रूप में भी उबर रहे हैं। संजय धौलाखंडी अब तक कई गाने भी लिख चुके हैं, ओर कई गाने गा भी चुके हैं। जिनमे से कूछ गाने हैं जो लोगो के मन को भाये जैसे की -..
नैणीडाण्डा बजार
थलीसैंण बजार
न पे दारू
खैनि गुटका ख़ाके
भौत ह्वैग्या घटेला -घटेल
मेरी गाड़ी आली
गीत मैंने गाते है

संजय मिलन बैण्ड खेतू उत्तराखंड की लोक संस्कृति में आज से नहीं है बल्कि नवंबर 1978 से है उत्तराखंड की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है कहते हैं बाप की विरासत बेटा संभालता है कुछ इसी तरह से जयनंद धौलाखन्डी के परिवार में भी देखने को मिल रहा है जयनंद धौलाखन्डी के बेटे के बाद उनका पोता भी अपने पिता संजय धौलाखन्डी के मार्गदर्शन पर चल रहा है जो कि अभी देहरादून में एनिमेशन का कोर्स कर रहा है जबकि वह प्यानो भी बजाता है, जिसकी लोगो के द्वारा तारीफ भी की गई, इसीलिए कहते हैं खून का रिश्ता कहीं दूर तक अपनी छाप छोड़कर जाता है वही आज जयनंद धौलाखन्डी के परिवार में दिख रहा है संजय बैंड खेतू की खास बात यह है कि वह कई लोगों को रोजगार भी दे रहा है, जहां एक तरफ पहाड़ लगातार खाली हो रहे हैं लोग पलायन करके शहरों की ओर बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ संजय धौलाखन्डी लोक गायक कलाकार अपने गीतों के माध्यम से युवाओं को अपनी टीम में शामिल कर उन्हें रोजगार देने का भी काम कर रहे हैं ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि उत्तराखंड के जितने भी लोक गायक कलाकार, संगीतकार है,  उनकी तरफ सरकार को अब ध्यान देने की जरूरत है, जिससे गांव मे रह रहे लोगो को रोजगार मिल सके, अपना जीवन यापन कर सके।

Rupesh Negi

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