धौलास भूमि प्रकरण में बड़ा एक्शन: अनियमित बिक्री पर जिला प्रशासन की जांच शुरू, शैक्षणिक उद्देश्य से मिली थी भूमि, अब शर्तों की जांच।
देहरादून– राजधानी देहरादून के धौलास हरियावाला क्षेत्र में शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा कृषि भूमि की कथित अनियमित बिक्री के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा के नेतृत्व में संयुक्त टीम गठित कर स्थलीय निरीक्षण और विस्तृत पैमाइश कराई गई।
शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. महमूद असद मदनी को यह जमीन 2004 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार द्वारा शैक्षिक संस्थान बनाने के लिए प्रस्तावित हुई थी। लेकिन कई कारणो के चलते इस जमीन को कृषि भूमि निर्धारित करते हुए इस जमीन पर कोई भी निर्माण करने पर रोक लगा दी गई थी। शैक्षिक संस्थान का उद्देश्य खत्म होने के बाद डॉ महमूद असद मदनी के ट्रस्ट ने यह जमीन को किसी विशेष समुदाय के लोगों के नाम की गई। लेकिन उन विशेष समुदाय के लोगों ने विवादित जमीन भारी मात्रा में आम जनता को बेच डाली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रशासन की टीम ने पहुंचकर जमीन की जांच पड़ताल की है। इसके साथ जमीन की नपाई करते हुए और इसका ऐतिहास भी जानने का प्रयास किया । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि डेमोग्राफिक चेंज के मकसद से कुछ लोगों द्वारा यहां यह कार्य किया जा रहा था जिस पर अब सरकार कार्रवाई करेगी।
वही अपनी मेहनत से खरीदी जमीन के भू स्वामियों में अपनी जमीन जाने का डर अभी से सता रहा है। उनका कहना है कि उनकी जमीन जायज है और उनके पास सभी दस्तावेज है।
प्रशासन के अनुसार ट्रस्ट को पूर्व में शैक्षणिक प्रयोजन के लिए भूमि आवंटित की गई थी। अब यह जांच की जा रही है कि आवंटन की शर्तों और निर्धारित उद्देश्यों का पालन हुआ या नहीं। तहसील प्रशासन, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जमीन की मौजूदा स्थिति और लेन-देन की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।
20 एकड़ का सौदा, फिर सैकड़ों में बंटी जमीन
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 20 एकड़ कृषि भूमि पहले कई लोगों को बड़े भूखंडों में बेची गई। इसके बाद इन्हीं खरीदारों ने जमीन को फिर अन्य लोगों को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेच दिया।
ट्रस्ट को पूर्व में भूमि विक्रय की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि जमीन कृषि स्वरूप में ही रहेगी और उसे अकृषि घोषित कर बिक्री नहीं की जाएगी।
पैमाइश रिपोर्ट के बाद जमींदारी एक्ट में कार्रवाई
अपर जिलाधिकारी के अनुसार विस्तृत पैमाइश रिपोर्ट मिलने के बाद जमींदारी एक्ट के प्रावधानों के तहत सख्त और विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रहा है ताकि किसी भी स्तर पर हुई अनियमितता पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
एमडीडीए पहले ही कर चुका है ध्वस्तीकरण
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इससे पहले धौलास में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चलाकर बिना मानचित्र स्वीकृति बनाई गई बाउंड्री, आंतरिक सड़कें और अन्य संरचनाएं ध्वस्त की थीं। एमडीडीए ने क्षेत्र में नोटिस बोर्ड लगाकर आम लोगों को आगाह किया है कि अवैध प्लाटिंग में निवेश न करें और भूमि खरीदने से पहले प्राधिकरण से जानकारी अवश्य लें, अन्यथा जोखिम स्वयं का होगा। प्रशासन का कहना है कि भूमि से जुड़े किसी भी मामले में नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

