प्रेमनगर में नदी में बना अस्थाई रास्ता भी बारिश के चलते टूटा, पुल पर यातायात चालू।
देहरादून– राजधानी देहरादून के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई तेज़ बारिश ने प्रेमनगर के नंदा की चौकी में बना अस्थाई पुल देर रात डह गया और आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया, करीब 300 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल एक बार फिर लोगों के लिए खुल गया है। 15 सितंबर 2025 की मध्य रात्रि टौंस नदी में आई भीषण बाढ़ और अतिवृष्टि में क्षतिग्रस्त हुआ यह पुल अब आधुनिक तकनीक और मजबूत सुरक्षा इंतजामों के साथ दोबारा तैयार हो चुका है। पुल के शुरू होते ही देहरादून और विकासनगर के बीच रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों को सहायता मिलेगी।
पुल टूटने के बाद देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीधा संपर्क टूट गया था। रोजाना नौकरी, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा था। इससे न केवल यात्रा का समय बढ़ा, बल्कि ईंधन और परिवहन खर्च भी कई गुना बढ़ गया। स्थानीय व्यापारियों को भी इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
15 सितंबर 2025 की रात टौंस नदी में आए तेज बहाव और कटाव ने नंदा की चौकी पुल को गंभीर नुकसान पहुंचाया था। पुल का एक हिस्सा ढह गया, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल यातायात बंद कर दिया। विशेषज्ञों की जांच के बाद तय किया गया कि केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पुल का पुनर्निर्माण कर उसे भविष्य की आपदाओं के लिहाज से अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
पुल का निर्माण करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की देख रेख में हुआ और उसे भविष्य में बाढ़ और तेज कटाव का सामना करने के लिए अधिक मजबूत बनाना गया।
इस पुनर्निर्माण की सबसे बड़ी खासियत आधुनिक ‘वेल फाउंडेशन’ तकनीक रही। पारंपरिक ओपन फाउंडेशन की जगह इस तकनीक से पुल की नींव को नदी की गहराई तक मजबूत किया गया है। इसके अलावा पुल के दोनों किनारों पर आरसीसी सुरक्षा दीवारें बनाई गई हैं और अन्य पिलरों को भी अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से सुदृढ़ किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में बाढ़ और तेज बहाव का असर काफी हद तक कम होगा।
लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने पुल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा की थी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए और पुल को आपदा प्रबंधन के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान विभाग के वरिष्ठ अभियंता और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
नंदा की चौकी पुल के दोबारा शुरू होने से देहरादून, प्रेमनगर, विकासनगर और पांवटा साहिब के बीच आवाजाही पहले की तरह सुगम हो जाएगी। रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले कर्मचारी, छात्र, व्यापारी और स्थानीय निवासी अब बिना लंबा चक्कर लगाए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

