देहरादून बन रहा क्राइम कैपिटल? दिन दहाड़े हत्याओं से हिली सरकार।
देहरादून– उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ‘क्राइम कैपिटल’ के रूप में बदलती जा रही है। 29 जनवरी से लेकर 11 फरवरी के बीच जिले में चार हत्याएं हो चुकी हैं। चार घटनाओ में से तीन ऐसी घटनाएं हैं, जिनमें मरने वालो ने पहले ही अपनी जान का खतरा बताया था, जान गंवाने वालों ने पुलिस को पहले से शिकायत की थी कि उनकी जान को खतरा है। हत्यारों का निशाना बनने वाली तीन युवतियां हैं। आखिर राजधानी में पुलिस को क्या हो गया है? वह पूर्व सूचना होने के बाद भी हत्या जैसे अपराध क्यों नहीं रोक पा रही है?
ताजा हत्याकांड 11 फरवरी का है। सुबह के करीब 10:30 बजे अति व्यस्त रहने वाले परेड ग्राउंड से लगे तिब्बती मार्केट के बीचों बीच सुबह लगभग साढ़े 10 बजे अर्जुन शर्मा नाम के व्यवसायी को स्कूटी सवार दो लोगों ने सीने में गोली मार दी। अर्जुन की जीएमएस रोड पर अमरदीप नाम से गैस एजेंसी है। 40 साल का अर्जुन टेनिस खिलाड़ी था। प्रतिदिन परेड ग्राउंड में टेनिस खेलने आता था। उसका अपनी मां से गैस एजेंसी और प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा था। अर्जुन शर्मा और उसकी मां दोनों ने एसएसपी से मिल कर जान के खतरे की शिकायत की थी। उनकी मां को सुरक्षा के लिए एक महिला सिपाही भी दी गई थी। सवाल यह है कि पुलिस की जानकारी में रहने के बाद भी अर्जुन शर्मा की हत्या हो गई।
राजधानी के लोगों में जो भय और असुरक्षा का भाव पैदा हो रहा है, उसे कैसे दूर करेंगे?
इसके पहले दो फरवरी को भीड़भाड़ वाले मच्छी बाजार में भी सुबह करीब 10:30 बजे काम पर जाते समय ही चापड़ से काट कर एकतरफा प्रेम करने वाले आकाश ने 20 साल की गुंजन को मार डाला था। गुंजन ने भी जान के खतरे की शिकायत पहले ही पुलिस से कर रखी थी। पुलिस ने यह जांच करने की जहमत भी नहीं उठाई कि आकाश के खिलाफ कोई अपराध पहले से दर्ज तो नहीं है।
तीसरा मामला ऋषिकेश का है। 31 जनवरी को एम्स में काम करने वाली प्रीति रावत की हत्या उसके प्रेमी सुरेश गुप्ता ने गोली मारकर कर दी। प्रीति एम्स चौकी में पहले ही तहरीर दे चुकी थी कि उसकी जान को सुरेश गुप्ता से खतरा है। यहां भी पुलिस सोई रही और समय रहते कोई कार्यवाही नहीं की।
चौथा मामला विकास नगर का है, जिसमें ढालीपुर क्षेत्र में 29 जनवरी को चचेरे भाई सुरेंद्र ने 18 साल की मनीषा को मार कर उसका चेहरा पत्थर से कुचल दिया था।
यहां पुलिस तर्क दे सकती है कि अचानक होने वाले अपराध को नहीं रोका जा सकता है। पर यह सवाल तो यह है कि आखिर अपराधियों के मन में देहरादून पुलिस का इकबाल कैसे कायम होगा? यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस को अपराधियों से निपटने के लिए खुली छूट दे रखी है। तो अब उत्तराखंड पुलिस को उत्तर प्रदेश की पुलिस से सीखना चाहिए कि कैसे अपराधियों का सफाया कर जनमानस में उपजे भय को समाप्त किया जा सकता है।


