उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की सुगबुगाहट तेज, दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल।
देहरादून– उत्तराखंड की धामी सरकार में लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हालिया दिल्ली दौरे के बाद राज्य की सियासत में कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं जोरो पर हैं। जानकारों की माने तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार को संतुलित करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने संभावित नए मंत्रियों के चयन को लेकर विधायकों का परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड भी मंगवाया है। रिपोर्ट कार्ड के आधार पर हरी झंडी मिलने के बाद मंत्रिमंडल में लंबे समय से खाली चल रहे पदों को भरा जा सकता है। उत्तराखंड सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 6 मंत्री ही कार्यरत हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य में 11 मंत्रियों की कैबिनेट होनी चाहिए। यानी अभी भी पांच मंत्री पद रिक्त हैं। सरकार के कार्यकाल को अब करीब एक साल का ही समय बचा है, ऐसे में चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार को संगठनात्मक मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि कई विधायक मंत्री पद की दौड़ में सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा आम है कि जब-जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली दौरे पर जाते हैं, तब-तब कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो जाती हैं। हालांकि बीते एक-डेढ़ साल में कई बार चर्चाएं हुईं, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार मुख्यमंत्री की दिल्ली में विधायकों से मुलाकात को सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि संगठनात्मक फीडबैक से जोड़कर देखा जा रहा है।
दिल्ली में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड के तीन भाजपा विधायकों ने मुलाकात की, इनमें रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ, सल्ट से विधायक महेश जीना, पुरोला से विधायक दुर्गेश्वर लाल ने सीएम धामी से मुलाकात की। जानकारों की माने तो यह मुलाकात औपचारिक होने के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। वर्ष 2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर अब नए मंत्री बनाए जाते हैं, तो उनके पास महज डेढ़ से दो साल का समय ही बचेगा। इतने कम समय में नए मंत्री अपने विभाग में पकड़ बना पाएंगे या नहीं, जमीनी स्तर पर काम दिखा पाएंगे या नहीं,और चुनावी लाभ दिला पाएंगे या नही…ये सभी सवाल बेहद अहम हैं। यही वजह है कि नेतृत्व बेहद सोच-समझकर फैसला लेना चाहता है, ताकि संतुलन भी बना रहे और चुनावी गणित भी न बिगड़े।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के पदभार ग्रहण के बाद बुधवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में एक हाई लेवल बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में उत्तराखंड के सभी भाजपा विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में आने वाले चुनावों की रणनीति के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार में रिक्त मंत्री पदों पर भी चर्चा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पार्टी संगठन की ओर से इसे एक सामान्य परिचयात्मक बैठक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसके निहितार्थ कहीं ज्यादा बड़े हो सकते हैं।


