देहरादून जिले में छात्र-छात्राओं के लिए खतरा बने 79 स्कूलों को अब ढहाया जाएगा।
देहरादून– राजधानी देहरादून में बच्चों की जान के लिए खतरा बने 79 स्कूल भवन तत्काल ध्वस्त करने के आदेश दे दिए गए हैं। ध्वस्तीकरण और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए डीएम सविन बंसल ने फौरी तौर पर एक करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। जर्जर स्कूल भवनों के मामले में बरती जा रही ढिलाई पर हाल ही में डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए 10 दिन के भीतर विस्तृत सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। डीएम के आदेश पर पीडब्ल्यूडी व शिक्षा विभाग ने ऐसे 100 स्कूल चिह्नित किए हैं, जिन्हें जर्जर हाल की श्रेणी में रखा गया है। इनमें सर्वाधिक प्राथमिक विद्यालय चकराता ब्लॉक में हैं। राजधानी के राजपुर रोड स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के आंशिक निष्प्रयोज्य कक्षा कक्ष भी ध्वस्त करके फिर से बनाए जाएंगे।
जिले में कई स्कूल भवन ऐसे हैं, जो वर्षों से जर्जरहाल में हैं और छात्र-छात्राओं के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसे भवनों के मामले में अब तक लापरवाही बरती जा रही थी। अब डीएम बंसल की सख्ती के बाद इस मामले में तेजी आई है। पिछले दिनों डीएम ने शिक्षा विभाग को पीडब्ल्यूडी के माध्यम से ऐसे विद्यालय चिह्नित कराते हुए एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिए थे, जो बेहद खतरनाक हो चुके हैं। जल्द सर्वे रिपोर्ट और एस्टीमेट न मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी। इसका असर यह हुआ कि महज 10 दिन के भीतर 100 के आसपास विद्यालय भवनों की रिपोर्ट डीएम तक पहुंच गई। शिक्षा विभाग ने पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट तैयार कराते हुए इन स्कूलों की सूची विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के साथ डीएम को सौंप दी है। इनमें पूर्णत निष्प्रोज्य व आंशिक निष्प्रोज्य भवन शामिल हैं।
देहरादून मुख्य शिक्षाधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल का कहना है कि जिन विद्यालय भवनों का ध्वस्तीकरण होना है, उनके बच्चों को आसपास के अन्य विद्यालयों में शिफ्ट किया जाएगा। कुछ विद्यालयों के बच्चों को बरसात के दौरान ही शिफ्ट कर दिया गया था। सर्वाधिक जर्जर हाल प्राथमिक विद्यालय चकराता ब्लॉक में हैं। राजधानी में जीजीआईसी राजपुर रोड के कुछ कक्षा कक्ष भी डिमॉलिश करके पुन: निर्मित किए जाएंगे, क्योंकि इनकी दशा ठीक नहीं है और ये लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं हैं।
डीएम ने एक करोड़ रुपये किए मंजूर
ध्वस्तीकरण और आवश्यक सुरक्षा उपायों में कोई विलंब न हो, इसके लिए डीएम ने तत्काल प्रभाव से एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। जिले में कुल 79 स्कूल ऐसे मिले हैं, जिनके समूचे भवन को निष्प्रोज्य मानते हुए ध्वस्त किया जा रहा है। इनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। 63 विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के लिए पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था की जा चुकी है। 16 विद्यालय ऐसे हैं, जहां अभी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। इनके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। 17 विद्यालय आंशिक रूप से निष्प्रोज्य घोषित किए गए हैं। आठ विद्यालय ऐसे हैं, जहां ध्वस्तीकरण की जरूरत नहीं पाई गई है।
जिलाधिकारी सविन बंसल का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी विद्यालय में जोखिमपूर्ण भवनों में शिक्षण कार्य संचालित नहीं होगा। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। पूर्णतः निष्प्रोज्य विद्यालयों में तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। जिन विद्यालयों के लिए वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था नहीं हुई है, वहां पहले व्यवस्था करने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया जाएगा। आंशिक निष्प्रोज्य भवनों में सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक मरम्मत व प्रतिबंध लागू किए जाएंगे।


