नंदादेवी राजजात यात्रा टली, अब 2027 में होगी नन्दा देवी राज जात यात्रा।
कर्णप्रयाग– एशिया की सबसे लंबी पैदल राजजात यात्रा को आखिरकार रद्द कर दिया गया। दैवीय आपदा के बाद उपजे हालात को देखते हुए 29 अगस्त से शुरू होने वाली राजजात यात्रा को बैठक के बाद स्थगित कर दी गई। कुछ ही दिनों के बाद राजजात यात्रा का नया कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। फिलहाल अभी यह तय हुआ है कि 26 अगस्त को उन सभी स्थानों पर विशेष पूजा अर्चना की जाएगी, जहां से राजजात में छंतोलियां (देवी के छत्र) शामिल होने के लिए आते हैं। उत्तराखंड में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा, सरकार के अनुरोध और अपने परंपरागत अधिकारों व उत्तरदायित्वों का प्रयोग करते हुए नंदा देवी राजजात समिति ने यात्रा स्थगित की है।
देवभूमि उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध एवं हिमालयी सचल कुंभ के नाम से विख्यात श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को लेकर बड़ा निर्णय सामने आया है। राजजात यात्रा समिति ने वर्ष 2026 में प्रस्तावित यात्रा को स्थगित करते हुए 2027 में आयोजित करने का फैसला किया है।
चमोली जिले के नौटी गांव से शुरू हुई थी, लेकिन आपदा के कारण यात्रा मार्ग अधिक क्षतिग्रस्त होने व अन्य समस्याओं की वजह से यात्रा को लेकर निर्णय लिया गया हैं। हालांकि, शुरुआत बैठक में आयोजन समिति के ज्यादातर पदाधिकारी यात्रा शुरू करने के पक्ष में दिखे, लेकिन आपदा व अन्य समस्या को देखते हुए राज्य सरकार के यात्रा को स्थगित रखने के सुझाव पर आयोजन समितियों ने पदाधिकारियों से इस पर फिर से रायशुमारी कराई। इसमें अधिसंख्य लोगों ने यात्रा स्थगित करने को लेकर सहमति जताई। नंदा देवी राजजात यात्रा 17,500 फुट की ऊंचाई पर संपन्न होती है। यह दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई पर आयोजित होने वाली पैदल यात्रा है। करीब 280 किलोमीटर चलने वाली लंबी इस यात्रा में देश के ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं। ये यात्रा प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार आयोजित होती है। पिछली यात्रा वर्ष 2000 में हुई थी। कायदे से इसे पिछले साल ही होना था लेकिन ज्योतिषीय कारणों से इसे टालकर इस साल के लिए तय किया गया था।
कर्णप्रयाग में आयोजित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा समिति की महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। समिति के अध्यक्ष प्रो. राकेश कुंवर ने बताया कि आगामी 23 जनवरी को मनौती का कार्यक्रम विधिवत सम्पन्न किया जाएगा, लेकिन पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में यात्रा 19 और 20 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रवेश करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि में भारी बर्फबारी, प्रतिकूल मौसम और दुर्गम परिस्थितियों की आशंका बनी रहती है। साथ ही, यात्रा मार्ग के निर्जन पड़ावों पर आवश्यक बुनियादी कार्य अभी पूर्ण नहीं हो पाए हैं, जिससे सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चुनौतियाँ सामने आ सकती थीं। वहीं, समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने बताया कि यात्रा से संबंधित कई अहम प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब राजजात यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त के अनुरूप विधिवत संकल्प लिया गया है।
महासचिव ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2026 में यात्रा आयोजित करना व्यवस्थागत दृष्टि से जोखिमपूर्ण था। ऐतिहासिक रूप से राजजात यात्रा कभी भी ठीक 12 वर्षों के अंतराल में नहीं हो पाई है और विषम परिस्थितियों में यात्रा कराना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होता।
समिति के इस निर्णय के बाद अब श्री नंदादेवी राजजात यात्रा 2027 में आयोजित की जाएगी, जिससे यात्रा की सुरक्षा, व्यवस्थाओं और परंपरागत गरिमा को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

