काठ बंगला बस्तीवासियों की समस्या पर प्रभावितों ने मेयर से भेंट कर दिया ज्ञापन, प्रभावितों की समस्या पर शीघ्र वार्ता कराने का दिया आश्वासन।

काठ बंगला बस्तीवासियों की समस्या पर प्रभावितों ने मेयर से भेंट कर दिया ज्ञापन, प्रभावितों की समस्या पर शीघ्र वार्ता कराने का दिया आश्वासन।
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देहरादून– राजधानी देहरादून के काठबंगला रिस्पना नदी के किनारे बसे लोगों के लिए 2011 में जेएनयूआरएम योजना के तहत करीब 148 फ्लैट्स बनाए जाने थे, लेकिन 14 साल के बाद भी गरीबों को घर नहीं मिल सका है।

रिस्पना नदी के किनारे बसे लोगों के लिए फ्लैट्स बनाने का काम साल 2011 में शुरू किया था,  इस प्रोजेक्ट के लिए उस समय 6 करोड़ 22 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे और काम यूपी निर्माण निगम को दिया गया था, प्रोजेक्ट का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने किया था, इस प्रोजेक्ट के तहत 148 फ्लैटस बनाने की योजना थी, लेकिन यूपी निर्माण निगम द्वारा 80 प्रतिशत पैसा खर्च करने के बाद फ्लैट्स को अधर में छोड़ दिया था, लेकिन बड़ा झटका तब लगा जब साल 2020 में हाईकोर्ट ने एक आदेश जारी किया कि नदियों के किनारे 100 मीटर तक खाली करवाया जाएगा,  जिसके खिलाफ सरकार अध्यादेश भी लेकर आई थी।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा काठ बंगला बस्ती के करीब 100 परिवारों को घर खाली करने का नोटिस भेजे जाने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। नोटिस में कहा गया है कि परिवारों को 15 दिन के भीतर मकान खाली करने होंगे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पात्र परिवारों को पुनर्वास नीति के तहत काठ बंगला स्थित ईडब्ल्यूएस आवासीय फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा नोटिस मिलने के बाद बस्ती के लोग बुधवार को देहरादून नगर निगम पहुंचे और मेयर सौरभ थपलियाल से मुलाकात की। मेयर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस मामले में एमडीडीए अधिकारियों और शहरी विकास मंत्री से वार्ता करेंगे।

रिस्पना नदी के अधिसूचित बाढ़ परिक्षेत्र में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद कार्रवाई तेज की गई है। इसी क्रम में एमडीडीए ने तरला नागल और ढाकपट्टी क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की पहचान, सत्यापन और पुनर्वास प्रक्रिया को लेकर औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बने किसी भी अवैध निर्माण को तत्काल हटाना अनिवार्य है।

कार्रवाई को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी देहरादून ने नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इसमें पुलिस अधीक्षक शहर, सचिव एमडीडीए, एसडीएम सदर और सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शामिल हैं। नगर निगम, राजस्व, पुलिस और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीमों ने पात्रता सत्यापन के लिए घर-घर सर्वे किया। सर्वे में विद्युत बिल, गैस कनेक्शन और स्थलीय निरीक्षण को आधार बनाया गया।

सर्वेक्षण में सामने आया कि कई परिवारों के निर्माण 11 मार्च 2016 से पहले के हैं, जो शासनादेश के अनुसार पुनर्वास के पात्र हैं। ऐसे परिवारों को काठ बंगला स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में बसाया जाएगा। वहीं, कोर्ट के आदेश अनुसार अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाएगा।

महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोग नगर निगम पहुंचे। उनका कहना था कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने पहले अध्यादेश लाकर इन बस्तियों को बचाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब अचानक 15 दिन में मकान खाली करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

मेयर सौरभ थपलियाल ने कहा कि “बस्तीवासियों का प्रतिनिधिमंडल मुझसे मिला है। मैं इस मामले में एमडीडीए अधिकारियों और शहरी विकास मंत्री से वार्ता करूंगा।

काठ बंगला बस्तीवासियों की समस्या को लेकर आज प्रभावितों की समस्या पर मेयर नगरनिगम सौरभ थपलियाल से मुलाक़ात कर उन्हें ज्ञापन दिया तथा काठ बंगला के निवासियों की समस्या के समाधान का अनुरोध किया तथा इस विषय में एक बैठक आयोजित कर समस्या का स्थायी समाधान का अनुरोध किया । प्रतिनिधि मण्डल ने उन्हें बताया कि लोग यथावत रहना चाहते हैं तथा एमडीडीए द्वारा निर्मित फ्लेट परिवारों की संख्या को देखते हुये फ्लेटो का आकार काफी छोटा जिसमें गुजारा नहीं हो सकता। प्रतिनिधिमण्डल ने मेयर को अवगत कराया कि काठबंगला में अधिकांश परिवार संयुक्त हैं, यहाँ की आबादी 500 से भी अधिक जिनका समायोजन इन फ्लेटो में होना सम्भव नहीं है।

मेयर ने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया तथा इस सन्दर्भ में शीघ्र बैठक करने का आश्वासन दिया ।

(1) प्रभावितों के हिसाब से एमडीडीए के फ्लेटो में जगह व सुविधाऐं उपलब्ध करवाई जायें ।

(2)काठ बंगला में 200 से अधिक परिवार हैं वर्तमान में फ्लेटो की संख्या काफी कम है , अन्य छूटे हुऐ लोग आशंकित हैं उनके आवस का क्या होगा ,  इस बिन्दु का समाधान निकाला जाये, जबकि इनमें से कई परिवार यथास्थान रहना चाहते हैं ।

(3) यह कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 में स्पष्ट प्रावधान है कि जिसे हटाओगे उसका बाजार भाव से मुआवजा ,समुचित पुर्नवास तथा रोजगार का प्रावधान है ।

प्रतिनिधिमण्डल में आन्दोलन के संयोजक अनन्त आकाश सीआई टियू महामंत्री लेखराज ,सोनू कुमार ,हरिश कुमार,स्वेता जितेन्द्र,मोनू ,आयुश,हेमलता ,सले ,हेमेन्द्र ,ब्रह्मपाल,रामसिंह ,ज्ञरबिर,वकील ,शकिल ,सत्यबिर ,सुरेश,प्रभा आदि बड़ी संख्या में प्रभावित शामिल थे ।

Rupesh Negi

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