हरिद्वार अर्द्धकुंभ को कुंभ तर्ज पर आयोजित करने का साधु संतो ने किया स्वागत,
देहरादून/हरिद्वार– श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर एवं अखंड दयाधाम के परमाध्यक्ष स्वामी भास्करानंद महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 2027 में होने वाले अर्द्धकुंभ को कुंभ मेले की तर्ज पर आयोजित करने की घोषणा का स्वागत किया। स्वामी भास्करानंद ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक के चार प्रमुख तीर्थस्थलों पर कुंभ मेलों का आयोजन प्राचीन काल से होता आया है। उन्होंने बताया कि मध्यकालीन विदेशी आक्रमणों और विपरीत परिस्थितियों के कारण हरिद्वार के अर्द्धकुंभ का वैभव धीरे-धीरे क्षीण हुआ और पारंपरिक अमृत (शाही) स्नान केवल प्रतीकात्मक रूप में रह गया।
स्वामी भास्करानंद ने कहा कि हरिद्वार अर्द्धकुंभ को कुंभ की तर्ज पर आयोजित करने से सनातन परंपरा का पुनर्जागरण होगा। उन्होंने सरकार के इस निर्णय को संत समाज और धर्मनिष्ठ जनों के लिए हर्ष का विषय बताया। स्वामी भास्करानंद ने कहा कि सरकार का यह निर्णय पावन परंपराओं के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त करेगा और हरिद्वार की आध्यात्मिक गरिमा को वैश्विक स्तर पर और प्रतिष्ठित करेगा। उन्होंने आशा जताई कि अखाड़ों के अमृत स्नान सहित अर्द्धकुंभ का पूर्ण एवं मौलिक स्वरूप फिर से स्थापित होगा।
पूर्ण कुंभ मेला प्रयाग राज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में आयोजित होता है, और अर्ध कुंभ मेला प्रयागराज और हरिद्वार में आयोजित होता है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उत्तराखंड में सभी 13 अखाड़ों से चर्चा हुई है, सभी के सुझाव सुने गए, सभी विचारों को धरातल पर उतरा जाएगा, उन्होंने कहा कि 13 जनवरी 2027 से मेला मकरसंक्रांति से शुरू हो जाएगा और 20 अप्रैल तक चलेगा। इस बीच सभी 9 स्नानों की तिथियों की घोषणा कर दी गई है। अगर आगे भी अखाड़ों की तरफ से कोई सार्थक सुझाव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा।
अर्धकुंभ 2027: स्नान की तिथियां हुई घोषित, 14 जनवरी 2027 को होगा पहला शाही स्नान।
साल 2027 में होने वाले अर्ध कुंभ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, साल 2027 में होने वाले अर्धकुंभ को लेकर सभी तिथियां जारी कर दी गई हैं, 14 जनवरी 2027 से अर्धकुंभ शुरू होगा, पहला स्नान 14 जनवरी 2027 को होगा, इसके बाद अन्य तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं, साल 2021 में हरिद्वार में पूर्ण कुंभ हुआ था. इसके बाद अर्ध कुंभ 2027 में होना है, लेकिन राज्य सरकार 2027 में होने वाले अर्ध कुंभ को पूर्ण कुंभ की तरह मनाना चाहती है।
इस बार प्रदेश सरकार ओर संतो की सहमति से इस आयोजन को महा कुंभ का नाम दिया जा रहा है, इसको लेकर कुछ संतो ने अपना विरोध भी जताया था। कुल 97 दिनों के भव्य कुंभ में चार प्रमुख शाही स्नान होंगे, 14 जनवरी को पहला शाही स्नान होगा और अप्रैल में कुंभ का समापन होगा, चर्चा के दौरान सभी बातों पर संतों ने सहमति जताकर अखाड़ों से उठी पूर्व की आपत्तियों पर विराम लग गया, मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में लगभग सहमति बनती नजर आ रही है।
कुंभ मेला सनातनी परंपरा में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जिसमें सभी सनातनी परंपरा को मानने वाले साधु संत स्नान कर खुद को पुण्य का भागी मानते हैं. ये परंपरा आदि काल से चली आ रही है. कुंभ मेला हर 12 वर्ष में आयोजित होता है, वहीं, अर्ध कुंभ हर 6 वर्ष में आयोजित होता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि असहमति तो कहीं थी ही नहीं, सभी की सहमति थी। सभी पूज्य संत गणों ने आज कुंभ मेले को लेकर पूरी तरीके से अपना आशीर्वाद और हर प्रकार का सहयोग देने के लिए कहा है. कुंभ मेले के आयोजन में सबसे बड़ी भूमिका संत समाज की होती है. हमारे सभी अखाड़ो के संत गण यहां पर आज उपस्थित हैं. सभी के प्रतिनिधि यहां पर उपस्थिति थे और 2027 में होने वाला मेला बहुत दिव्य हो, भव्य हो, सभी प्रकार की व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो, उन सभी पर आज यहां चर्चा हुई है।
सीएम धामी ने कहा कि कुंभ मेला दिव्य और भव्य होगा, अच्छा होगा शानदार होगा, जो भी यहां पर भक्तगण देश भर से आएंगे, सभी एक अच्छा अनुभव लेकर जाएंगे, उसके लिए प्रशासनिक दृष्टि से हमारी सारी तैयारियां आगे बढ़ रही हैं, हम सभी के सुझाव लेकर इसे भव्य आयोजन बनाएंगे। अभी प्रारंभिक रूप से तिथियाों के बारे में घोषणा की गई है, जैसे-जैसे सभी के सुझाव आते रहेंगे उसके अनुसार इसको आगे बढ़ाते रहेंगे, विधिवत रूप से हमने इसकी तैयारी पहले ही प्रारंभ कर दी थी और यहां आज औपचारिक रूप से पूज्य सभी संतगणो का आशीर्वाद मिला है।
14 जनवरी
6 फरवरी मौनी अमावस्या
11 फरवरी बसंत पंचमी
20 फरवरी माघ पूर्णिमा
6 मार्च महाशिवरात्रि अमृत स्नान
8 मार्च फागुन अमावस्या अमृत स्नान
7 अप्रैल नव संवत्सर
14 अप्रैल मेष सक्रांति अमृत स्नान
15 अप्रैल रामनवमी
20 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा अमृत स्नान होंगे।
इस अवसर पर श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी, स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी अनंतानंद, स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी प्रेमानंद, स्वामी कमलेशानंद, महंत सूरजदास, स्वामी पारसमुनि, स्वामी नागेंद्र महाराज सहित कई संत महंत उपस्थित थे। साध्वी कृष्णानंद ने फूलमाला पहनाकर सभी संत-महापुरुषों का स्वागत किया।

