योगनगरी एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की गई जान, झुंड ट्रैक पर आया, मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी, घंटों ठप रहा रेल यातायात,ट्रेन का लोको पायलट फरार, मुकदमा किया गया दर्ज।

योगनगरी एक्सप्रेस की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की गई जान, झुंड ट्रैक पर आया, मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी, घंटों ठप रहा रेल यातायात,ट्रेन का लोको पायलट फरार, मुकदमा किया गया दर्ज।
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देहरादून–  राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर मोतीचूर और रायवाला रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन की चपेट में आने से सुबह पांच साल के एक नर हाथी की मौत हो गई। सूचना के बाद वन विभाग के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान कई घंटे तक ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित रही।

हादसे के बाद ट्रेन का लोको और सह लोको पायलट फरार हो गए। दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हाथियों के लिए जानलेवा माने जाने वाले हरिद्वार देहरादून रेल मार्ग पर एक बार फिर एक हाथी ने अपनी जान गंवा दी है। सोमवार को सुबह करीब साढ़े छह बजे हरिद्वार से रायवाला की ओर जाने वाली हावड़ा दून एक्सप्रेस योगनगरी ट्रेन मोतीचूर रेलवे स्टेशन से रवाना ही हुई थी।

इस बीच हाथियों का एक झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। झुंड में शामिल एक पांच वर्षीय शिशु हाथी ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक के पास ही खड़ा रहा, जिससे यात्रियों में दहशत बनी रही।

सूचना मिलने के बाद वन्यजीव प्रतिपालक अजय लिंगवाल और रेंज अधिकारी महेश सेमवाल टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अजय लिंगवाल ने बताया, ट्रेन का लोको पायलट खुशी राम मौर्य और सहायक लोको पायलट दीपक फरार हो गए थे। दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस घटना के बाद से हरिद्वार-देहरादून रेल मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा।  जिसका खामियाजा रेल यात्रियों को भुगतना पड़ा। कुछ यात्री ट्रेन में बैठे रहे तो कुछ उतरकर अन्य माध्यमों से अपने गंतव्यों को रवाना हो गए। ट्रेन को मोतीचूर में रोकना पड़ा, जबकि देहरादून से हावड़ा जा रही हावड़ा एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को रायवाला स्टेशन पर ही रोक दिया गया। इसके अलावा हरिद्वार, देहरादून और ऋषिकेश रूट की कई ट्रेनें प्रभावित हुई।    सोमवार की सुबह साढ़े छह बजे ट्रेन की चपेट में आने से हुई एक शिशु हाथी की मौत ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने को रेलवे और पार्क प्रशासन द्वारा अभी तक जितने भी प्रयास किए गए हैं, वह सब नाकाम साबित होते नजर आ रहे हैं। पिछले 38 वर्षों में 33 हाथियों ने अपनी जान गंवा दी है। इस घटना से यह प्रतीत होता है कि रेलवे और पार्क प्रशासन के बीच जो सामंजस्य बनाकर कार्य करने की बात कही जा रही थी, वह धरातल पर शून्य है। रेलवे और पार्क प्रशासन के बड़े अफसरों के बीच कई अहम बैठकें भी हुईं, जिनमें रेलवे ट्रैक पर होने वाली वन्यजीव दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने को लेकर चर्चा भी हुई, मगर धरातल पर सभी प्रयास विफल दिखाई दे रहे हैं। हालांकि 2025 की यह पहली घटना है। जब-जब इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं तब-तब वन महकमा हरकत में आया है और पार्क क्षेत्र से गुजरने वाली ट्रेनों की स्पीड को लेकर सवाल भी उठाए गए, लेकिन जैसे ही मामला पुराना होता चला गया ट्रेनों की स्पीड बढ़ती चली गई। हरिद्वार-देहरादून रेल मार्ग पर वंदे भारत के अलावा कई एक्सप्रेस ट्रेनें हैं, जिनकी स्पीड मानक से अधिक है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठना स्वभाविक है। वर्ष 1983 में पार्क बनने से लेकर अब तक इस ट्रैक पर 33 हाथियों ने जान गंवाई है। आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे कि दोनों विभागों के बीच तालमेल ठीक नहीं है। वन विभाग और रेलवे में सामंजस्य न होने से हाथी अपनी जान गवां रहे हैं।

19 सितम्बर 2023 को हरिद्वार क्षेत्र में सीतापुर फाटक के पास एक नर हाथी की ट्रेन से टकराकर मौत हुई।

वर्ष 2021 में दो हाथियों ने ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाई।

08 मार्च 2021 को लच्छीवाला के पास शिशु हाथी की मौत।

27 नवम्बर 2021 को एक हाथी की मौत।

27 जुलाई 2020 को नकरौंदा में हाथी की मौत।

21 नवम्बर 2020 को हर्रावाला के पास रेलवे ट्रैक पर एक हाथी की मौत।

15 अक्तूबर 2016 को नंदा देवी एक्सप्रेस से रायवाला के वैदिक नगर के पास एक हाथी की मौत।

19 अप्रैल 2017 में ज्वालापुर के पास दो टस्कर हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत।

फरवरी 2018 में रायवाला के पास ट्रेन की चपेट में आने से शिशु हाथी की मौत।

20 मार्च 2018 को मादा हाथी की ट्रेन की टक्कर से मौत हो गई थी।

2001 में ट्रेन ने चपेट में आने से चार हाथियों को की मौत हो गई थी।

Rupesh Negi

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