15 सूत्रीय मांग को लेकर दिव्यांगजनों व मूकबधिरों का सरकार के प्रति आक्रोश, सचिवालय कुच।
देहरादून– मूक बधिर और दिव्यांगजन सोमवार को सचिवालय कूच कर रहे थे, देहरादून पुलिस ने दिव्यांगजनों को रोक और पुलिस हिरासत में लेकर देहरादून के अलग-अलग थानो व चोकियो में लाया गया। इसके बाद सभी दिव्यांगजनों को में देर सायं तक चौकी में बैठाकर रखा।
जबकि देवभूमि बधिर एसोसिएशन के सदस्यों ने पुलिस को धरने का परमिशन भी दिखाया, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनीं। उत्तराखंड दिव्यांग क्रांति महाआदोलन के पदाधिकारी विपिन चौहान ने बताया कि हम लोगों को पुलिस ने चौथी बार धरना नहीं देने दिया और हमें हर बार की तरह हमें रोक लिया गया और हम लोगों के साथ जोर-जबरदस्ती कर हिरासत में ले लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम मूक बधिर और दिव्यांगजनों को क्या जायज मांगों के लिए धरना करना नाजायज है। क्या हम लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेश में शांतिपूर्ण रूप से अपनी जायज मांगों को उठा नहीं सकते है। वहीं, इस दौरान दिव्यागों का आक्रोश देखने को मिला । करनपुर चौकी पर हिरासत में लिए गए दिव्यागों ने आपबीती बताई । उन्होंने कहा कि लंबे समय से सरकार उन्हें अनदेखा कर रही है । 03 दिसम्बर को सरकार दिव्यांग दिवस मना रही है, जिसका प्रचार-प्रसार मीडिया और अन्य जगहों पर जोरशोर किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकार दिव्यांगों से वार्ता भी नहीं कर रही है। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में जो अधिकारी दिव्यांगों के लिए नीतियां बना रहे हैं, उन्हें दिव्यांगों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। हम लोग सरकार से वार्ता करना चाहते है और हमें सरकार उचित आश्वासन दे। इस महंगाई के दौर में 1500 रुपये की मासिक पेंशन में पेट भरा नहीं जा सकता। जब सरकार को वोट चाहिए तो दिव्यांगजनों को घर से उठाकर ले आती है और वोट डलवाकर इतिश्री कर देती है। अब हमारी मांगें पूरी करने बात आई, तो सरकार हमारी मांगों को अनदेखा कर रही है। बैकलॉग पदों की भर्ती से लेकर दिव्यांग पेंशन बढ़ाने की उनकी 15 सूत्रीय मांग लाजिमी है। दिव्यांगजनों ने मिडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट करने की गुजारिश की है।
दिव्यांग बबीता ने बताया कि 08 सितम्बर को सभी दिव्यांगों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था, तब हमें शासन-प्रशासन की तरफ से आश्वासन मिला था कि आप लोगों की मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा। अब सरकार इस वर्ग की बात नहीं सुन रही है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा है। दिव्यांगजन कई बार शासन-प्रशासन से पत्राचार के माध्यम से अपनी मांगें रखीं। वहीं, उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन आयुक्त और समाज कल्याण सचिव के साथ बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी तक सरकार ने हमारी मांगें नहीं सुनीं। सरकार के रवैया से दिव्यांगजन आक्रोशित हैं।
दिव्यांग विनीता चौहान ने बताया कि हम लोगों को रोजगार चाहिए। हम लोग रोजगार के लिए 2016 से आंदोलन कर रहे हैं। हमारी पेंशन भी समय पर नहीं मिल रही है और न ही पेंशन में बढ़ोत्तरी हो रही है। साथ ही इन्होंने अपनी 15 सूत्रीय मांग की। इस मौके पर अपूर्व नौटियाल, बबीता तंवर, विनीता, बीना, ललिता, अंकित भटनागर, संजय नेगी, भारत भूषण। छत्रपाल, सोनिया अरोड़ा, विपिन चौहान, उमेश ग्रोवर, सचिन रौथान, विपिन थपलियाल, विजय भट्ट, शैलेन्द्र समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।
मूकबधिर और दिव्यांगजनों ने की 15 सूत्रीय मांगें
1. पैरा नेशनल चैंपियन में पदक विजेता खिलाड़ियों को आउट आफ टर्न जॉब दिया जाए और सामान्य समक्ष सुविधाएं दी जाएं।
2. राज्य के अधीन सेवाओं में दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित 04 फीसदी के अन्तर्गत रिक्त चले आ रहे बैकलॉग पदों को जल्द भरा जाए और 04 फीसदी आरक्षण के आधार पर प्राइवेट सेक्टर में योग्यतानुसार रोजगार निर्धारित किया जाए।
3.उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए दिव्यांग पेंशन को 5000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
4. स्वरोजगार के लिए मिलने वाले ऋण को ब्याज मुक्त किया जाए एवं समाज कल्याण विभाग से हर माह मिलने वाली पेंशन को गारंटी किस्त मना जाए।
5. अन्य राज्यों की तरह दिव्यांग निदेशालय का गठन किया जाए और आईएसबीटी देहरादून के समीप दिव्यांगजनों के विश्राम के लिए भवन का निर्माण किया जाए।
6. प्रत्येक विभाग में दुभाषिये की नियुक्ति की जाए।
7.2016 उत्तराखंड सरकार द्वारा शासनादेश के आधार पर सरकारी आवासीय मूक बधिर विद्यालय का गठन गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल में किया जाए।
8. मूक बधिर के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का कानून केंद्र सरकार परिवहन विभाग व मंत्रालय ने पास किया हुआ उत्तराखंड के कुछ जिलों में लाइसेंस बन रहा है और कुछ क्षेत्रों में क्षेत्रीय परिवहन विभाग कानून को नहीं मान रहा है। लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ को सख्त आदेश जारी किया जाए।
9 दिव्यांगजनों को राजनीति में 04 फीसदी के आधार पर आरक्षण निर्धारित किया जाए, जिसमें तीन सीट विधानसभा की आरक्षित हो। इसके लिए अतिरिक्त पंचायत चुनाव और नगर निकाय चुनाव में भी आरक्षण निर्धारित हो।
10. सशक्त दिव्यांग आयोग का गठन हो, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों दिव्यांग को बनाया जाए और 90 प्रतिशत सदस्य दिव्यांग हो।
11. उत्तराखंड ग्राम सभा की भूमि पट्टे या उसके पूर्वजों के कब्जे के आधार पर आवंटित किया जाए। जिन बंजर पड़ी सरकारी जमीनों पर दिव्यांगजनों के कब्जे चले आ रहे हैं को अस्थायी पट्टे या एकल अधिकार दिया जाए।
12. ऐसे दिव्यांगजन दैनिक वेतन भत्ता, मानदेय वाले कर्मचारी, आउटसोर्स एजेंसी, ठेकेदारी के द्वारा शासकीय और अर्द्ध शासकीय में कार्यरत हैं, उनको उनकी योग्यता के अनुसार स्थायी किया जाए और समान वेतन दिया जाए।
13. सेरेब्रल पाल्सी और मास्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर बीमारियों के कारण विकलॉग जन को विशेष सहायता मिले। उचित शिक्षा और जॉब मिले और उसके अनुकूल आवास मिले, तथा इन दिव्यांगजनों की इलाज की सारी व्यवस्था सरकार अच्छे अस्पताल में कराए।
14.ऑटिज्म और मानसिक रूप से चुनौती वाले दिव्यांगजनों के लिए सरकार विशेष शिक्षा व्यवस्था करे, उनकी नौकरी और उचित देखभाल की व्यवस्था करे।
15. दिव्यांगजनों के लिए रोजगार फड़-खोखा देने का शासनादेश 02 नवम्बर 2016 को जारी हुआ था, अभी तक दिव्यांगजनों को फड़-खोखा नहीं दिया गया, जिसकी व्यवस्था सरकार जल्द करे।

