हरिपुर-कालसी जमीन विवाद- स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष ने SIT गठन की मांग।
देहरादून– हरिपुर-कालसी से एक चौँका देने वाला जमीन विवाद का मामला सामने आया है। स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकारी कार्याप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये हैं और तत्काल विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर जांच कराने की मांग की है।
बॉबी पवार ने कहा है कि हरिपुर-कालसी में ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं जिनसे क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने का खतरा है। उनके अनुसार हाल में पाकिस्तान से दो वीडियो प्राप्त हुए हैं जिनमें एक शख्स दावा कर रहा है कि वह उस क्षेत्र की पैतृक संपत्ति का अधिकार रखता है।
बॉबी पवार का कहना है कि हरिपुर-कालसी में जहाँ देहरादून का भी व्यक्ति जमीन नहीं ले सकता, उस क्षेत्र में पाकिस्तानी नागरिक ने पैतृक ज़मीन होने का दावा किया है। पंवार ने इसे गंभीर मामला बताते हुए स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियों से जल्द पहल की मांग की है।
कुछ वक्त पहले 13 फरवरी 2024 को भी बॉबी पंवार ने इसी तरह के एक केस का जिक्र किया था। उनके अनुसार कालसी क्षेत्र में 2022 में जमीन लेकर निवास का मामला आया था जिसमें जमीन लेने वाले का नाम गुलाम हैदर बताया गया जो कि मूल रूप से कश्मीर का नागरिक था। गुलाम हैदर ने 10 बीघे से अधिक जमीन खरीदी और साथ ही उत्तराखंड का मूल निवासी होने का दावा भी किया था । यह मामला बाद में कोर्ट तक गया और संबंधित स्थानीय प्रशासन कार्रवाई के निर्देश देने के लिए सक्रिय हुआ।
पंवार के मुताबिक जिला प्रशासन ने कालसी और विकासनगर के एसडीएम को दोनों पक्षों से बात कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। उसकी आगे की जांच के दौरान DGC ने यह राय दी कि मामला सरकार को निहित किया जाना आवश्यक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी दावा किया गया कि RTI सूचनाओं के अनुसार गुलाम हैदर जम्मू कश्मीर का मूल निवासी हैं और वे पहले वहां पुलिस सब-इंस्पेक्टर रहे हैं। पंवार ने ज़ोर देकर कहा कि इन रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो की पड़ताल होने चाहिए, क्योंकि अगर ऐसे व्यक्ति उत्तराखंड में जमीन ले रहे हैं तो यह सुरक्षा और स्थानीय हितों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि गुलाम हैदर पर आतंकवादी गतिविधियों के आरोप लगने के चलते उन्हें सब-इंस्पेक्टर पद से हटाया गया था।
बॉबी पंवार ने मामले की तफ्तीश के लिए तत्काल SIT गठित करने, वीडियो की सत्यता की जांच और जिन लोगों के ज़रिए जमीन ली गई उनके रिकॉर्ड की समीक्षा करने की मांग की है।


