केंद्र की वित्तीय सहायता पर सियासत शुरू, मोदी का 1200 करोड़ पैकेज, कांग्रेस बोली—लॉलीपॉप।
देहरादून– उत्तराखंड में आपदा से जूझ रहे लोगों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1200 करोड़ रुपये का तत्काल राहत पैकेज दिया है। लेकिन इस राहत पैकेज को लेकर सियासत भी तेज़ हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे लॉलीपॉप बताया, तो कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा, यह तो ऊंट के मुँह में जीरा है। वहीं, बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस आपदा की घड़ी में भी सिर्फ अफसर तलाशने में जुटी है, जनता की मदद से ज़्यादा उन्हें राजनीति सूझ रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बीते गुरुवार उत्तराखंड दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने आपदा प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लिया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी विस्तृत चर्चा की। इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने राज्य के लिए 1,200 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की। इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि और गंभीर रूप से घायलों को पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। हालांकि, कांग्रेस ने इस फौरी राहत पर सवाल उठाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे “लॉलीपॉप” करार दिया, जबकि कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने इसे “ऊंट के मुँह में जीरा” बताया। दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार की इस राहत राशि को अपर्याप्त बताते हुए बड़ा पैकेज देने की मांग की।
मनवीर सिंह चौहान,भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी ने कहा कि हरीश रावत और प्रीतम सिंह के सवालों पर भाजपा की भी प्रतिक्रिया सामने आई भाजपा का कहना है किस कांग्रेस सिर्फ आपदा में अफसर तलाशने का बहाना खोजती है।
तत्काल राहत पर सियासत गर्म है। सरकार अपने पैकेज को राहत मान रही है, तो विपक्ष इसे ऊंट के मुँह में जीरा बता रहा है। लेकिन आपदा से जूझ रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है। कि राहत पैकेज के वादे ज़मीन पर कितनी जल्दी और कितने असरदार तरीके से उतरते हैं।
कांग्रेस ने केंद्र सरकर द्वारा आपदा के तहत मिलने वाली 1200 करोड़ की वित्तीय सहायता को नाकाफी बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता करते हुए आपदा प्रभावितों व मलिन बस्तियों का मुद्दा उठाया। हरीश रावत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से प्रदेश को काफी उम्मीदें थी। उत्तराखंड भीषण आपदा की चपेट में है और प्रदेश सरकार द्वारा मांगी गई राशि के सापेक्ष काफी कम वित्तीय सहायता उत्तराखंड को मिली है। रावत का कहना है कि मध्य हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण जिस तरह से बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं उससे निपटने के लिए केंद्र के पास क्या राष्ट्रीय रणनीति है। आपदा में लोगों की संस्कृति, घर ,जंगल, खेत व आजीविका के साधन नष्ट हो गए हैं सरकार किस तरह से उन लोगों की आजीविका पुनर्स्थापित करेगी। 2014 की आपदा के बाद से मकान बनाने की लागत बढ़ गई हैं, और सरकार द्वारा आपदा राहत के तहत दी जाने वाली वितीय सहायताओं को भी बढ़ना चाहिए। उत्तराखंड में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीण पीठ पर सामान लाद कर ले जाने को मजबूर हैं। राज्य के 433 से ज्यादा ऐसे गांव हैं जो किसी भी समय भीषण आपदा की जद में आ सकते हैं परंतु सरकार के पास 50 गांव बसाने की भी जमीन नहीं है। सरकार को जमीन का इंतजाम करके उन गांवों को पुनर्स्थापित करना चाहिए। इस आपदा में लोगों के खेत व आजीविका के साधन नष्ट हो गए हैं कांग्रेस ने मांग की है कि आपदा की घड़ी में सरकार को लोगों के ऋण माफ करने चाहिए औऱ जलवायु परिवर्तन के हिसाब से मध्य हिमालय राज्यों के लिए केंद्र को एक अलग नीति बननी चाहिए।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और चकराता के विधायक प्रीतम सिंह ने मलिन बस्तियों का मुद्दा उठाया प्रीतम सिंह का कहना है कि एलिवेटेड रोड बनाने से पहले सरकार को मलिन बस्तियों को विस्थापित करना चाहिए। कांग्रेस के समय में मलिन बस्तियों के पुनर्वास के लिए विधानसभा से कानून बनाया गया था। सरकार उस कानून को ना मानते हुए ऑर्डिनेंस लाकर जनता को गुमराह कर रही है। मलिन बस्तियों में घरों में लगाए गए लाल निशान लोगों में भय का माहौल पैदा कर रहे हैं, सरकार को यह लाल आतंक बंद करना चाहिए। कांग्रेस जल्दी मलिन बस्तियों के पुनर्वास की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन करेगी।


