Uttrakhand Government से ठेकेदारों की मांग, 25 सितंबर से करेंगे सभी तरह के काम बंद, जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन कर सीएम को भेजा ज्ञापन।
देहरादून– दून ठेकेदार कल्याण समिति ने आज देहरादून में जिलाधिकारी तक प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौपा। ठेकेदार कल्याण समिति लगातार सरकार से राहत की मांग कर रहे contractors अब आर पार की लड़ाई का मूड बना चुके है। जिसको लेकर आज प्रदेशभर में ठेकदारों ने डीएम के माध्यम से सरकार को अपना ज्ञापन भेजा है। दून ठेकेदार कल्याण समिति ने जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को अपनी समस्याओं, मांगों का ज्ञापन भेजा है। जिसमें मांग की है कि प्रदेश में सभी तरह के ठेकों में domicile को अनिवार्य किया जाए। साथ ही काम पूरा होने के बाद भी जो राशि लंबे समय से विभागो ने जारी नही की है, उनको जल्द रिलीज किया जाए। वहीं अगर सरकार अभी भी ठेकेदारों की मांग पर कोई फैसला नहीं लेती है तो फिर 25 सितंबर के बाद सभी तरह के कार्यों को बंद कर दिया जाएगा। फिर चाहे वो राष्ट्रीय राजमार्ग हो या फिर स्टेट हाईवे और अन्य कोई निर्माण कार्य।
प्रदेश के विकास कार्य अपने साधन संसाधन से पूरा करके सरकार को मजबूत बनाने वाले पंजीकृत ठेकेदार आज बहुत सी कठिनाईयों का सामना कर रहे है। उन्होंने सरकार से विभिन्न मांगे रखी है प्रदेश में निविदायें छोटी लगनी चाहिये एवं फेज प्रथम व द्वितीय के कार्य छोटे हिस्सो में वियक्त होकर एक साथ लगने चाहिये जिससे डी और सी श्रेणी के ठेकेदार ज्यादा से ज्यादा काम कर सके। 5 करोड तक के कार्य सिंगल बिड में लगने चाहिये एवं 10 करोड तक के कार्य उत्तराखण्ड मूल के निवासियों को मिलना चाहिये। इसके मूल निवास / स्थाई निवास लागू होना चाहिये।
निविदाओं में अतिरिक्त शर्तें लगाकर व्यक्ति विशेष को लाभ नहीं दिया जाना चाहिये। पी०सी० कार्यों में हॉट मिक्स प्लान्ट मेटेरियल व पेवर मशीन को हटाया जाये। पी०सी० का इस्टीमेट 2 सेमी० है पेवर का 3 सेमी। अतः पी०सी० का कार्य पूर्व की भांति होना चाहिये।
लम्बे समय से आपदा कार्यों का व वार्षिक अनुरक्षण भुगतान 2021-22 से अब तक लम्बित है। ऑफलाईन सिक्योरिटी डिपोजित का भुगतान तुरन्त करने का कष्ट करें।
पंजीकरण पूर्व की भांति सरल होना चाहिये / टेक्नीकल स्टॉफ की व सोल्वेन्सी की अनिवार्यता समाप्त होनी चाहिये प्रत्येक ठेकेदार का स्थाई तौर पर टेक्नीकल स्टॉफ नियुक्त करना व्यवहारिक नहीं है। पंजीकरण कम से कम 5 वर्ष तक वैध हो एवं एक प्रदेश एक्ड नियम के तहत हो। समयावृद्धि वेरियेशन व एकस्ट्रा आईटम की प्रक्रिया पूर्व की भांति हो। ठेकेदारों के द्वारा समय से काम पूर्ण न होने पर पेनेल्टी लगायी जाती है। अतः भुगतान कार्य पूर्ण होने के एक निश्चित समय पर न होने पर ब्याज सहित भुगतान होना चाहिये। ठेकेदारों के द्वारा खनन सामग्री सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त नदी स्टॉक व क्रेशर से खरीदी जाती है, ठेकेदारों से दोबारा रॉयल्टी ली जाती जय जोकि गलत है। पर्वतीय क्षेत्र में कार्य स्थल से 5 से 10 किमी0 के दायरे में क्वेरी की अनुमति मिलनी चाहिये। एस०बी०डी० की भांति जी०पी०डब्लू०-9 के निर्णय के अधिकारी अधीक्षण अभियन्ता का होना चाहिये तथा जी०पी०डब्लू0-9 में संसोधन कर ठेकेदार के हित के क्लोस भी होने चाहिये। निविदा में अनुभव की सीमा नहीं होनी चाहिये सदैव ठेकेदार को काम मिले यह सम्भव नहीं है। आपदा कार्यों में लगी मशीन व लेबर को बीमा कवरेज मिलना चाहिये एवं ठेकेदार की आकस्मिक मृत्यु होने पर उनके देयक बिना अर्थदंड के भुगतान होने चाहिये। किसी भी शासनादेश लागू होने के बाद जो निविदा आमंत्रित होती है उनके बिलों में वह लागू होना चाहिये।
केन्द्र पोषित योजनाओं के कार्यों में अधिक से अधिक कार्य प्रदेश के स्थानीय ठेकेदारों को मिलने चाहिये।
अगर ठेकेदारों की समस्याओं का अति शीघ्र समाधान नहीं किया तो ठेकेदार निविदा बहिष्कार के साथ कार्य बहिष्कार एवं अनशन करने के लिये बाध्य हो जायेगे।

