प्रेमनगर के झाझरा मे गैस रिसाव, कमान्डेंट SDRF के नेतृत्व में विशेषज्ञ CBRN टीम द्वारा मौके पर, राहत व बचाव कार्य जारी, रेस्क्यू करने वाले चक्कर खाकर गिरे।

प्रेमनगर के झाझरा मे गैस रिसाव, कमान्डेंट SDRF के नेतृत्व में विशेषज्ञ CBRN टीम द्वारा मौके पर, राहत व बचाव कार्य जारी, रेस्क्यू करने वाले चक्कर खाकर गिरे।
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देहरादून– राजधानी देहरादून के प्रेमनगर झाझरा से बड़ी खबर सामने आए जंहा कल दोपहर से क्लोरीन गैस का रिसाव हो रहा था, जिससे आसपास रहने वाली लोगों को सांस लेने मे दिक्कत होने लगी, और वंहा रह रहे लोगों व मवेशीयों को परेशानी होने लगी जिसके बाद स्थानीय लोगों द्वारा पुलिस को सुचना दी गई जिसके बाद पुलिस प्रशासन,फायर सर्विस देहरादून की टीम पहुंची मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य किया गया, ब्रीदिंग ऑपरेशन सेट पहनकर क्लोरीन गैस रिसाव स्लेंडरो को बंद करने का प्रयास जारी है,

दून एसपी अजय सिंह भी देर रात मौके पर पहुंचे, देहरादून से समय 03:55 बजे सूचना मिली कि झाझरा के पास खुले मैदान में क्लोरीन के 6 बड़े सिलेंडर रखे गए हैं। जो करीब 10से 12 सालो से यंही रखे हुए है, जिसमें से एक सिलेंडर से गैस लीक हो रही है। उस स्थान से कुछ दूरी पर आवासीय परिसर है। उक्त सूचना पर कमान्डेंट SDRF और विशेषज्ञ CBRN (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear) टीम मय CBRN किट,आवश्यक डिटेक्टर्स व रेस्क्यू उपकरणों के तत्काल वाहिनी मुख्यालय जॉलीग्रांट से घटनास्थल पर पहुंचे।

घटनास्थल पर देखा गया कि एक खाली प्लॉट में रखें गैस सिलेंडरों से क्लोरीन गैस का रिसाव हो रहा है। क्लोरीन गैस के रिसाव से संपर्क में आने से चक्कर आना, चेहरे और आँखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और उल्टी,सिरदर्द भी होता है। इसलिए आस-पास के क्षेत्र में स्थित घरों से लोगों को रेस्क्यू करते हुए सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। मौके पर जिला पुलिस ,फायर सर्विस व एन0डी0आर0एफ CBRN टीम भी मौजूद है। सभी के द्वारा संयुक्त आपरेशन चलाते हुए गैस लीकेज को रोकने व सिलिंडर को घटनास्थल से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

सोमवार दोपहर से यहां गैस रिसाव होना शुरू हो गया था। हालांकि मंगलवार सुबह से यहां रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ और सबसे पहले आसपास के लोगों को हटाने का काम एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस टीमों द्वारा किया गया। इसके साथ ही रिसाव हो रहे सिलेंडरों को भी हटाया गया।  सिलेंडरों को गड्ढा खोदकर नीचे दबाया गया। मौके पर अग्निशमन, पुलिस, एनडीआरएफ की टीम पहुंची और राहत और बचाव के कार्य किया गया।

कैसे हुई अचानक ये घटना, कौन है जिम्मेदार ?

जानकारी के मुताबिक देहरादून के झाझरा क्षेत्र के एक खाली प्लॉट में पड़े क्लोरीन के गैस सिलेंडर से अचानक गैस रिसाव होने लगी जो धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैलती गई। जिससे आसपास के लोगों को सांस लेने में दिक्कत आने लगी जिसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई, पुलिस ने मौके पर जाकर देखा तो पता लगा कि एक प्लॉट में काफी लंबे समय से कुछ सिलेंडर पड़े हुए थे इन सिलेंडरों की संख्या 5 से 6 बताई जा रही है इन सिलेंडर में क्लोरीन गैस थी जिसमें अचानक गैस रिसाव होने लगा। अब यहां बड़ा सवाल है कि इसके आसपास हज़ारों की संख्या में लोग रहते हैं, यानी की मुख्य सड़क मार्ग के साथ-साथ आबादी वाला क्षेत्र भी है।  यह सिलेंडर कहां से आए और यह क्यों पड़े हैं यह एक जांच का विषय है जिसकी अब प्रशासन जांच की बात कह रहा है।

स्थानीय लोगों ने यहां गैस रिसाव होने पर बड़ी लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आबादी वाले  क्षेत्र में गैस के सिलेंडर लम्बे समय से रखे हुए थे। लोगों ने कहा कि रिसाव होते ही सांस लेने में दिक्कत शुरू हुई वहीं सीने में जलन होने लगी। स्थानीयों ने कहा कि इसके साथ ही आसपास के कई लोगों को चक्कर आ रहे हैं और तबियत बिगड़ गई है। आसपास के लोग घरों की खिड़कियां और दरवाजे बंद करके यहां रह रहे हैं। लोगों ने ये भी आरोप लगाया कि जिसके द्धारा यहां सिलेंडर रखे गये उनको कई बार फोन किया गया लेकिन वो फिर भी मौके पर नहीं आये। वहां पर गैस रिसाव की तेज स्मैल अभी भी बहुत महसूस की जा रही थी।

जिस सिलेंडर से लीकेज हो रहा था उसको रेस्क्यू टीमों द्वारा गड्ढा खोदकर दबाया गया। एनडीआरएफ ने बताया कि फिलहाल कोई खतरा अब नहीं है।

क्लोरीन गैस से जान भी जा सकती है

दरअसल, क्लोरीन गैस का रिसाव होना कोई आम बात नहीं है, ये गैस विषैली होती है। जिसमें सांस लेना बहुत ही पीड़ादायी होता है। इसकी तेज गंध से आंख, त्वचा को बड़ा नुकसान होता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। इतना ही नहीं इससे अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है और इसके ज्यादा शरीर में जाने से मौत तक हो सकती है।

भले ही क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद रेस्क्यू चलाकर अभी सिलेंडरों को सेटल डाउन करने का काम किया गया हो लेकिन आबादी के बीचों-बीच इस तरह की गैस के सिलेंडर रखना पूरी तरह से बड़ी लापरवाही है। हालांकि प्रशासन की ओर से भले ही इसको लेकर जांच करने की बात कही जा रही हो लेकिन इतने सालों से यहां सिलेंडर रखे गये थे ऐसे में किसी ने इसकी सुध क्यों नहीं ली। यहां पर क्लोरीन गैस रिसाव से बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। हालांकि खतरा अभी भी बना हुआ है।

गैस सिलेंडरों से क्लोरीन गैस का रिसाव इतना खतरनाक था की नजदीकी घर पर उगाई गई सब्जियों पर भी इसका असर साफ देखा गया, गैस के रिसाव से उग रही टमाटर, पालक, मिर्च,आलू के सब्जियों के फसल मुरझाने कर सूखने लगी।

 

 

Rupesh Negi

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