चंपावत उपचुनाव में कांग्रेस का वॉकओवर.? भाजपा बोली चुनौती स्वीकारने की बजाये रणछोड़ दास बने कांग्रेस के बड़े नेता
देहरादून— उत्तराखंड में चंपावत उपचुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने कांग्रेस ने चंपावत उपचुनाव में महिला प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी को उतारा है। कांग्रेस ने चंपावत में पहली बार किसी महिला प्रत्याशी को टिकट दिया है। हालांकि, राजनीति गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस ने चंपावत उपचुनाव में पहले ही भाजपा को वॉकओवर दे दिया है। निर्मला गहतोड़ी का नाम प्रत्याशी के तौर पर घोषित होते ही बीजेपी ने इसे कांग्रेस की चुनाव से पहले ही हार बताया है।
दो महीने पहले कांग्रेसी टिकट के लिए दर-दर माथा टेकने वाला उम्मीदवार हेमेश खर्कवाल भी रणभूमि से लापता हैं। उन्हें 26 हजार वोट मिले। जनता का अथाह विश्वास। महज 5469 वोटों से ही तो हारे हेमेश खर्कवाल। मैदान में उतार दिया निर्मला गहतोड़ी को। यानी युद्ध लड़ने से पहले ही हार मान ली। वाकओवर। हेमेश ही लड़ते तो भी 26 हजार लोगों ने उन्हें हाल में वोट दिये थे। बेशक फिर हार जाते, लेकिन जनता के दिलों पर राज करते। आखिर हेमेश को टिकट क्यों नहंी दिया गया? क्या उन्होंने मना कर दिया? यदि हां, तो ऐसे नेता का पार्टी से निलंबन होना चाहिए।
2019 पिथौरागढ़ उपचुनाव में चंद्रा पंत के आगे कांग्रेस के मयूख महर ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। अंजू लुंठी को उतारा गया और वह पराजित हो गयी। 2021 के सल्ट उपचुनाव में कुमाऊं की बेटी गंगा पंचौली को मैदान में उतारा वह भी हार गयी। और अंब निर्मला गहतोड़ी प्रकट हो गयी है राजनीति की बलिवेदी पर चढ़ने के लिए मोहरा।
निर्मला गहतोड़ी को कांग्रेस की तरफ से टिकट देने से जुड़ा पत्र जारी होते ही कांग्रेस के इस फैसले पर कई सवाल भी खड़े होने लगे हैं। इस सीट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने निर्मला को काफी कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा है, उधर ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद चंपावत से चुनाव लड़ रहे हैं, तब हेमेश खर्कवाल जो इस सीट पर कांग्रेस के विधायक भी रह चुके हैं, उन्हें टिकट देने के बजाय किसी नए चेहरे को उतारने से भाजपा भी कांग्रेस को आड़े हाथ ले रही है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शादाब शम्स की मानें तो कांग्रेस ने पहले ही घुटने टेक दिए हैं। कांग्रेस के बड़े नेता उपचुनाव लड़ने की चुनौती स्वीकारने की बजाये रणछोड़ दास बन गये हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक के आगे कोई भी बड़ा नेता चुनाव मैदान मेंउतरने से कतरा रहा है और इसीलिए पार्टी ने निर्मला को बलि का बकरा बनाया है।
कांग्रेस के दावों की बात करें तो पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी का कहना है कि निर्मला के नाम पर बीजेपी बेवजह सवाल खड़े कर रही है. निर्मला इस सीट पर बड़ा नाम है। वह प्रदेश में राज्य मंत्री के साथ जिला अध्यक्ष का भी जिम्मा संभाल चुकी है। बीजेपी गलतफहमी की शिकार है और निर्मला को हल्के में लेना भाजपा और मुख्यमंत्री को भी महंगा पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब से चंपावत उपचुनाव लड़ने का फैसला लिया है, तभी से कांग्रेस को इस सीट पर मुख्यमंत्री के सामने किसी बड़े चेहरे को उतारने की चुनौती तो थी लेकिन कोई भी बड़ा नेता इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ना चाहता। यहां तक की इस सीट पर कांग्रेस के विधायक रह चुके हेमेश भी चुनाव लड़ने से बच रहे हैं। इस बात का अंदेशा उसी दिन हो गया था जब पार्टी ने इस सीट पर प्रत्याशी उतारने के लिए चिंतन करने की बात कही और हेमेश खर्कवाल को सीधे तौर पर प्रत्याशी बनाने के बजाय दूसरे कई चेहरों पर भी मंथन करने की जिक्र किया था।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हेमेश खर्कवाल मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लड़ना ही नहीं चाहते। माना ये भी जा रहा है कि बीजेपी पिछले दो बार से चंपावत विधानसभा सीट पर अपनी जीत दर्ज करा रही है और चंपावत उपचुनाव तो खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लड़ रहे हैं। ऐसे में यहां पर अपनी जीत दर्ज कराने के लिए बीजेपी ऐड़ी चोटी का जोर लगा देगी। इन हालात में कांग्रेस को चंपावत उपचुनाव में अपनी जीतने की उम्मीद कम ही नजर आ रही हैं।

