यूक्रेन से वापस घर पहुंची छात्रा सौम्या गौड़ परिजनों ने किया भव्य स्वागत, छात्रा ने सुनाई आपबीती।

यूक्रेन से वापस घर पहुंची छात्रा सौम्या गौड़ परिजनों ने किया भव्य स्वागत, छात्रा ने सुनाई आपबीती।
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देहरादून- रामनगर: -यूक्रेन से रामनगर पहुंची सौम्या का क्षेत्रवासियों ने किया जोरदार स्वागत। वहीं सौम्या ने बताई आपबीती।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गई एमबीबीएस प्रथम सत्र की छात्रा सौम्या का आज रामनगर पहुंचने पर क्षेत्रवासियों के साथ ही क्षेत्रीय प्रशासन ने भी स्वागत किया। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे भारत के एमबीबीएस छात्र- छात्राओं का घर पहुंचने का शिलशिला लगातार जारी है। रामनगर से भी एक छात्र और एक छात्रा यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे थे, जिसमें से आज छात्रा सौम्या अपने घर रामनगर पहुंच चुकी है, सौम्या यूक्रेन के नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के खारकीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। सौम्य के पिता दीपक गौड़ सरकारी वकील है, जबकि माता इंदु गौड़ सरकारी अध्यापक है। सौम्या ने बताया कि वह अभी एमबीबीएस की प्रथम वर्ष की छात्रा है, उसने ने कहा कि यूक्रेन बहुत अच्छी जगह है, उसने कहा कि सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था पता नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, सौम्या ने बताया कि हमें एक नोटिस आया की जंग छिड़ चुकी है, जंग पहले कीव से स्टार्ट हुई है, और हम खार्कीव में थे, सौम्या ने कहा कि हमे बताया गया कि अटैक हो चुका है रूस का और अगला हमला रूस का खार्कीव पर है, और हमें कहा गया कि आप अपना सामान छोड़कर अपने डॉक्यूमेंट कलेक्ट करिए और उन्हें उठाइए और नीचे बंकर्स में ग्राउंड फ्लोर में छुप जाइए, सौम्या ने बताया कि 5 दिन तक हम वही बंकर्स मैं छुपे रहे, हमारे पास खाने पीने का सामान भी खत्म हो चुका था और हम लगातार पांच दिनों तक भूखे रहे। वहां रात गुजारना भी हमारे लिए मुश्किल हो रहा था। फिर हमने सोचा कि
हम यूक्रेन के ईस्ट से वेस्ट की तरफ निकलते हैं तो फिर हम रेलवे स्टेशन पर एक दूसरे स्थान पर आए स्टेशन पर हालात और खराब थे पहले यूक्रेनियन को बैठाया जा रहा था उसके बाद अन्य देशों की लड़कियों को और लड़कों को तो वहीं पर छोड़ा जा रहा था। उसने कहा कि हम 10 लोग निकले थे लेकिन पहुंचे केवल 5 ही। वहां पर ट्रेनों में भी पहले सारी प्राथमिकताएं यूक्रेनियन को ही मिल रही थी, हम लोग ट्रेन में भी कोने में बैठ कर ही वेस्टर्न साइड पहुंचे पोलैंड के बॉर्डर पर भी हम लोग 9 घंटे खड़े रहे वहां भी पहले यूक्रेनियन को ही प्राथमिकता मिल रही थी, उसके बाद किसी तरह हम पोलैंड पहुंचे। पोलैंड पहुंचकर हमें इंडियन एमएससी की मदद मिली उसने कहा कि एक हफ्ते बाद हम लोगों को भारतीय दूतावास की मदद से भोजन भी मिला रहने की अच्छी जगह मिली। उन्होंने इसके लिए इंडियन एमएससी को धन्यवाद दिया। उसने कहा कि उसके बाद हमे दिल्ली के लिए फ्लाइट के जरिए लाया गया। दिल्ली से उत्तराखंड सरकार की मदद से टैक्सी के माध्यम से आज में अपने घर पहुंची हूं। सौम्या के माता इंदु ने भारत सरकार का धन्यवाद किया है, सौम्या के पिता ने भारत सरकार के साथ ही उत्तराखंड सरकार का भी धन्यवाद किया, साथ ही सकुशल सभी बच्चों के लौटने की कामना की। सौम्या के पिता ने कहा कि अब बच्चों की आगे की पढ़ाई को लेकर भी सरकार कोई कदम उठाए जिन बच्चों की पढ़ाई बीच में थी या बिल्कुल एन्ड पॉइंट पर थी।

Rupesh Negi

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