भाऊवाला में भागवत महा पुराण कथा के शुभारम्भ से पहले क्षैत्र में भव्य कलश यात्रा निकाली।
आर०के०गार्डन भाऊवाला में भागवत महा पुराण कथा के शुभारम्भ से पहले क्षैत्र में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कथा व्यास आचार्य श्याम सुंदर गौतम जी ने कहा कि भागवत गीता सुनने से पितृ दोष दूर हो जाता है। इसलिए भागवत गीता सभी को सुननी चाहिए।

सहसपुर विधानसभा के भाऊवाला क्षेत्र में आर०के० गार्डन में भव्य भागवत पुराण का आयोजन किया जा रहा है,शुक्रवार को भागवत पुराण के शुभारंभ से पहले महिलाओं ने भव्य कलश शोभायात्रा निकाली ।
कथा 24 दिसंबर से 30 दिसंबर तक 1 बजे से 5 बजे तक रोजाना चलेगी।

कथा व्यास ने कहा कि कलयुग में अगर सुखी रहना है तो मुख्य तीन बातें हमेशा ध्यान में रखे। मृत्यु हमेशा याद रखे,सबसे हमेशा प्रेम से रहे व भागवत कथा अवश्य सुने और दुसरो को भी सुनायें,क्योकि भागवत कथा श्रवण से सारे कष्ठ दूर हो जाते है।
लक्ष्मी कपरूवान अग्रवाल ने कहा है कि हमारे ऋषि मुनियों एवं विद्वानों की शिक्षा ही हमारी संस्कृति को अतीत से लेकर वर्तमान तक लाती हैं. वेद, पुराण, गीता, महाभारत, रामायण आदि भारतीय संस्कृति के आधार हैं. सभी हिन्दू शास्त्रों में गीता को प्रथम स्थान दिया जाता हैं। मुनि वेदव्यास जी ने ही गीता की रचना की थी. यह ग्रन्थ मूल रूप से महाभारत के भीष्म पर्व का ही एक भाग हैं।
गीता में कुल अठारह पर्व अथवा अध्याय एवं करीब 700 संस्कृत श्लोक हैं. हिन्दुओं में गीता के प्रति अगाध श्रद्धा एवं निष्ठा हैं. जैसे जैसे समाज में शिक्षा का चलन बढ़ा है वैसे वैसे गीता को घर घर में पढ़ा जाने लगा हैं. भारत की संस्कृति के स्वरूप उसकी सहिष्णुता के भाव को गीता जी में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता हैं।
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण द्वारा युद्ध काल में अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को दिए गये उपदेशों का वर्णन हैं. महाभारत के युद्ध में जब कौरवों और पांडवों की सेना एक दूसरे के सम्मुख खड़ी हुई तो अर्जुन प्रतिपक्ष में अपने सभी स्वजनों को देखकर युद्ध त्याग कर अपनी पराजय स्वीकार करने लगे थे. तभी श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते है और कहते है इन्सान को निष्काम भाव से कर्म करते रहना चाहिए उसे फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।

भक्तो में श्याम राणा,सुनील ठाकुर,रवि नेगी,रंजीता रतूड़ी,वर्षा नेगी,कमला ठाकुर,गीता पांडेय,सुमन सकलानी,गोमती जोशी,सविता रानी,बाला देवी,पुष्पा देवी,आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

