वरिष्ठ कांग्रेस नेता हीरा सिंह बिस्ट पंचतत्व में विलीन, जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता के लिए सदैव तत्पर।
देहरादून– हीरा सिंह बिष्ट….. एक युग का अंत
(पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी)
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड की राजनीति के उन विरले जननेताओं में से थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों, श्रमिकों, युवाओं और उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए समर्पित कर दिया। पाँच दशकों से अधिक लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने छात्र नेता, अधिवक्ता, विधायक, कैबिनेट मंत्री, श्रमिक नेता और समाजसेवी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वे अपनी सादगी, स्पष्टवादिता, ईमानदारी, कर्मठता और जनसुलभ व्यवहार के कारण सभी राजनीतिक दलों में समान रूप से सम्मानित थे।
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट ने डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज, देहरादून एम.ए. एवं एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। वे डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए तथा छात्र हितों, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया। छात्र राजनीति में उनका संघर्षशील नेतृत्व ही उनके सार्वजनिक जीवन की मजबूत नींव बना।
शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने देहरादून जिला न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में विधिक़ कार्य प्रारंभ किया। एक सफल अधिवक्ता के रूप में उन्होंने अनेक जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने का कार्य किया तथा संविधान और विधि के शासन के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भूमिका
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानियों में रहे। उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुँचाने, जनआंदोलनों का नेतृत्व करने तथा राज्य निर्माण के संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई। उनका मानना था कि पर्वतीय क्षेत्रों का विकास तभी संभव है जब उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा मिले। राज्य निर्माण के इस ऐतिहासिक आंदोलन में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
राजनीतिक यात्रा
छात्र राजनीति से निकलकर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थामा और शीघ्र ही एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में स्थापित हुए।
वर्ष 1985 में वे देहरादून विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद उन्होंने 2002 में राजपुर विधानसभा तथा 2014 में डोईवाला विधानसभा उपचुनाव जीतकर कुल तीन बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।
वे उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री रहे और परिवहन, श्रम एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक दायित्व संभाला। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भी उन्होंने कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख राजनीतिक एवं संस्थागत योगदान
अपने सार्वजनिक जीवन में स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट ने उत्तराखंड के विकास और संस्थागत निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया—
• उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई तथा पृथक उत्तराखंड राज्य की स्थापना के लिए निरंतर संघर्ष किया।
• उत्तराखंड कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
• इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में श्रमिकों एवं मजदूरों के अधिकारों की प्रभावी पैरवी की।
• उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना एवं राज्य में तकनीकी शिक्षा के विस्तार के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
• उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों की स्थापना एवं तकनीकी शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दी, जिससे हजारों युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
• राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों की स्थापना एवं दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
• क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के संस्थापक अध्यक्ष रहे तथा उत्तराखंड में क्रिकेट के संस्थागत विकास और रायपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना एवं विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
• देहरादून आई.एस.बी.टी. (Inter State Bus Terminal) के निर्माण एवं विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
• देहरादून–दिल्ली वॉल्वो बस सेवा के संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की, जिससे उत्तराखंड की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप मिला।
• परिवहन, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, खेल और श्रमिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान किया।
सामाजिक योगदान
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उन्होंने—
• श्रमिकों एवं औद्योगिक कामगारों के कल्याण के लिए जीवनभर संघर्ष किया।
• शिक्षा, युवा नेतृत्व और छात्र राजनीति को प्रोत्साहित किया।
• आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की हर संभव सहायता की।
• खेल, शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं के विकास को बढ़ावा दिया।
• आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सदैव उपलब्ध रहे।
• सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों के प्रति जीवनभर अटूट विश्वास बनाए रखा।
नेतृत्व शैली
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट की पहचान थी—
• सादगी और ईमानदारी।
• स्पष्ट, निर्भीक एवं बेबाक व्यक्तित्व।
• सिद्धांतों से कभी समझौता न करना।
• आम जनता के लिए सहज उपलब्ध रहना।
• कांग्रेस की विचारधारा के प्रति अटूट निष्ठा।
• श्रमिकों, किसानों, युवाओं एवं वंचित वर्गों की आवाज़ को मजबूती से उठाना।
• नई पीढ़ी के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करना।
चुनावी उपलब्धियाँ
• 1985 – देहरादून विधानसभा से विधायक निर्वाचित।
• 2002 – राजपुर विधानसभा से विधायक निर्वाचित।
• 2014 – डोईवाला विधानसभा उपचुनाव में विधायक निर्वाचित।
• 2022 – रायपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी।
विरासत
स्वर्गीय हीरा सिंह बिष्ट केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि जनसेवा के पर्याय, कर्मठ अधिवक्ता, डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष, उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी, श्रमिकों के सच्चे हितैषी और दूरदर्शी जननेता थे।
उन्होंने उत्तराखंड के विकास को केवल राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि शिक्षा, तकनीकी संस्थानों, पॉलिटेक्निक कॉलेजों, परिवहन, खेल, श्रमिक कल्याण और आधारभूत संरचना के निर्माण के माध्यम से नई दिशा देने का कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक जनोपयोगी संस्थानों एवं विकास परियोजनाओं को गति मिली, जिन्होंने राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका संपूर्ण जीवन संघर्ष, ईमानदारी, सादगी, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक जीवन में उनका योगदान सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें एक ऐसे जननेता के रूप में स्मरण करेंगी, जिन्होंने पद से अधिक जनता की सेवा और राज्य के विकास को अपना जीवनधर्म बनाया।
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