धौलास जमीन प्रकरण पर सभी 161 खाताधारकों को नोटिस, अब एक साथ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे सभी खाताधारक। 

धौलास जमीन प्रकरण पर सभी 161 खाताधारकों को नोटिस, अब एक साथ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे सभी खाताधारक। 
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देहरादून– राजधानी देहरादून के हरियावाला धौलास ज़मीन प्रकरण पर अब विकासनगर कोर्ट ने सभी खाताधारकों को संयुक्त नोटिस जारी किया हैं, तो वहीं सभी 1631 खाताधारकों ने भी अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर कानूनी लड़ाई लड़ने का एलान किया है।

बीते दिनों सहसपुर विधानसभा के हरियावाला धौलास भूमि विवाद पर अब विकासनगर कोर्ट ने शासनादेश संख्या 150 / राजस्व/2004 दिनांक 15.03.2004 और अपर सचिव उत्तराखण्ड शासन के कार्यालय पत्र सं० “1409/XVIII(II) 2016-01(17)/2015 राजस्व अनुभाग-2 देहरादून दिनांक 19 जुलाई 2016 ज०वि०भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950” के उलंघन का हवाला देते हुए हरियावाला धौलास की इस विवादित भूमि के सभी 161 भूमि स्वामियों को एक साथ नोटिस जारी करते हुए कहा कि 27 फरवरी को कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

हरियावाला धौलास में इस विवादित भूमि पर वर्तमान भूमि स्वामियों द्वारा इस कार्यवाही को उनके साथ अन्याय करार दिया है और कहा है वो सभी एकसाथ एकजुट होकर कानूनी तरीके से अपने लिए न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। एक विशेष समुदाय से जोड़कर उठे इस भूमि विवाद में अब उत्तराखंड के स्थानीय और हिंदू लोग कार्रवाई के जद में आ गए हैं। इनमें से अधिकतर भूमि धारक उत्तराखंड के पूर्व सैनिक और वरिष्ठ नागरिक हैं और अधिकतर पर्वतीय मूल के लोग हैं।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के जद में आ रहे पुर्व सैनिक रवि बताते हैं कि उन्होंने भारतीय सेना में दो अलग अलग पारी में पूरे 38 सालों की अपनी सेवा दी है और इस दौरान उनके द्वारा की गई आमदनी और जमा पूंजी से उन्होंने तक़रीबन 200 गज़ जमींन अपने बच्चों के लिए और भविष्य के लिए ख़रीदी थी। इस ज़मीन को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ही ख़रीदने के लिए अधिकृत किया था और उन्हीं के द्वारा इसकी रजिस्ट्री कराई गई और उसके बाद म्यूटेश्म की भी प्रक्रिया सरकारी डिपार्टमेंट के अंतर्गत ही की गई है। आज उनके पास ज़मीन के सभी काग़ज़ मौजूद है लेकिन इस तरह से अचानक नोटीस जारी कर सवाल खड़े करना उनके साथ अन्याय है और उसके ख़िलाफ़ वह हर तरीक़े की लड़ाई लड़ेंगे।

इसी तरह से एक और स्थानीय व्यक्ति गौरव ढोंडियाल ने बताया है कि उन लोगों के द्वारा पूरी जाँच पड़ताल कर के ही यह ज़मीन ख़रीदी गई थी। रजिस्ट्रार ऑफिस से लेकर पटवारी और तहसीलदार, SDM सभी जगह ख़रीदते समय चैक करवाया गया था और सभी ने डिपार्टमेंट की हरी झंडी मिलने के बाद ही उनके द्वारा यह ज़मीन ख़रीदी गई है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट से इस ज़मीन को कृषि भूमि के रूप में बेचने की परमिशन लाई गई और उसी अनुमति के तहत उनके द्वारा ये ज़मीन ख़रीदी गई है। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर अब मुस्लिम लोगों का हवाला दे कर बबाल किया जा रहा है जोकि सत्य से परे हैं। उन्होंने कहा की उनमे से मुस्लिम परिवार कोई नहीं है और अगर होता भी तो देश का कानून सबके लिए एक है। उन्होंने कहा कि इस मामले को जबरन हिंदू-मुस्लिम से जोड़ा जा रहा है जबकि ऐसा कूच नहीं है और न ही यहाँ पर कोई मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनायी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार मुस्लिमों को निशाना बनाते हुए अब हिंदुओं का ही नुक़सान करने पर आ गई है। उन्होंने बताया कि आज विकासनगर कोर्ट द्वारा यह नोटिस निकाले गए हैं कि 27 फ़रवरी को अपने डॉक्यूमेंट्स चैक करवाएं और सबूत लाए जबकि जिला प्रशासन के तहत ही उन्हें सारे प्रमाण और सर्टिफिकेट दिए गए हैं जिसमें रजिस्ट्री और म्यूटेशन भी शामिल हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में हिंदू-मुस्लिम करके इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है, जबकि यह ज़मीन लोगों द्वारा ख़रीदी गई है वहीं इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि यह सभी खाताधारक एकजुट होकर 1 प्लेटफार्म पर क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे ।

भारतीय सेना से रिटायर्ड हुए भूतपूर्व सैनिक मनबर सिंह रावत बताते हैं कि हरियावाला धौलास ज़मीन मामले में सब कुछ राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के पास कोई मुद्दा नहीं है और अब केवल सांप्रदायिक मुद्दों पर सरकार इतना प्रभावी है कि उन्हें आम लोग जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यह ज़मीन ख़रीदी है वह दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि हरियावाला धौलास में विवादित भूमि मामले में 40 पुर्व फौजी है जिन्होंने यहाँ पर जमीनें ख़रीदी है और सरकार के अधिकारी कर्मचारियों के माध्यम से ही उन्होंने जमीने ख़रीदी हैं। उन्होंने बताया कि सभी भू-स्वामियों ने क़ानूनी प्रक्रिया के तहत ही ज़मीन ख़रीदी है और सरकार के कर्मचारियों अधिकारियों के माध्यम से ही ज़मीन ख़रीदी गई है लेकिन अब हम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब आगे की लड़ाई सारे लोग मिलकर लड़ेंगे और जितने भी यहाँ पर भू-स्वामी या फिर खाता धारक हैं जिन्हें सरकार विवादित क़रार दे रही है सभी लोग क़ानूनी तौर पर एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे।

Rupesh Negi

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