पिटकुल के प्रभारी एमडी की नियुक्ति कोर्ट ने की रद, राजीव गुप्ता की याचिका पर हुई सुनवाई।

पिटकुल के प्रभारी एमडी की नियुक्ति कोर्ट ने की रद, राजीव गुप्ता की याचिका पर हुई सुनवाई।
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देहरादून– उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पॉवर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) के प्रबंधक निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। यह फैसला याचिकाकर्ता राजीव गुप्ता की ओर से दायर रिट (सर्विस बेच) संख्या 295/2025 पर बुधवार को न्यायमूर्ति आशीष नैथानी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया।

प्रकाश चंद ध्यानी को सितंबर 2022 में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) का प्रबंध निदेशक (एम डी) नियुक्त किया गया था, यंहा वे मानव संसाधन का कार्यभार भी संभाल रहे थे। उनके नेतृत्व में, पिटकुल ने 2024-25 में 99.72% ट्रांसमिशन उपलब्धता और 1.02% हानि के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके लिए उन्हें ‘पावर लाइन ट्रांस-टेक इंडिया अवार्ड’ भी मिला।

पिटकुल के एमडी के रूप में पीसी ध्यानी के कार्यकाल में कुशल नेतृत्व से वित्तीय वर्ष 2024-25 में, उनके मार्गदर्शन में पिटकुल ने पारेषण (ट्रांसमिशन) क्षेत्र में बेहतरीन परिणाम प्राप्त किए। वह पिटकुल के एमडी के साथ-साथ मानव संसाधन विभाग की जिम्मेदारी भी निभाते थे।

राजीव गुप्ता, जो PTCUL में चीफ इंजीनियर लेवल-1 हैं और कंपनी के सबसे वरिष्ठ इंजीनियर हैं, ने 10 सितम्बर 2022 के आदेश द्वारा प्रकाश चंद्र ध्यानी को प्रबंधक निदेशक के पद पर अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को चुनौती दी थी। राजीव गुप्ता ने दावा किया कि नियमित चयन प्रक्रिया लंबित होने के कारण यह पदभार सबसे वरिष्ठ पात्र अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए था। उन्होंने दलील दी कि उत्तराखंड प्रबंध निदेशक एवं निदेशकों के चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारण नियम, 2021 के नियम 9-एके तहत इस पद के लिए इंजीनियरिंग स्नातक की योग्यता अनिवार्य है, जो कथित तौर पर ध्यानी के पास नहीं है। याचिका स्वीकार करते हुए पीठ ने माना कि नियुक्ति में नियम 9-ए का उल्लंघन हुआ। अदालत ने कहा कि 2021 के नियमों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं तब तक अनिवार्य हैं जब तक कानूनी रूप से वैध छूट न दी जाए और इस मामले में राज्य सरकार यह स्पष्ट रूप से साबित करने में विफल रही कि नियम 9-ए के तहत छूट का उचित उपयोग किया गया था। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस या तर्कसंगत आधार नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि किसी वैकल्पिक योग्यता को आवश्यक डिग्री के समकक्ष स्वीकार किया गया था, इसलिए नियुक्ति को कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता। आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन कोई भी नया निर्णय 2021 के नियमों के सख्त अनुपालन में होना चाहिए। इसमें कहा गया कि यदि दोबारा छूट दी जाती है तो सरकार को वस्तुनिष्ठ और दस्तावेजी आधार प्रस्तुत करना होगा तथा स्पष्ट करना होगा कि योग्यता की समतुल्यता कैसे निर्धारित की गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने प्रतिवादी की योग्यता, नेतृत्व क्षमता या पद के लिए उपयुक्तता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

पॉवर सेक्टर के लिए नजीर बनेगा कोर्ट का आदेश

हाईकोर्ट का यह फैसला उत्तराखंड के पॉवर सेक्टर में हड़कंप मचा सकता है। PTCUL उत्तराखंड में बिजली पारेषण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और प्रबंध निदेशक का पद कंपनी के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। गुप्ता की याचिका ने न केवल वरिष्ठता के सिद्धांत को बल दिया, बल्कि सरकारी नियमों के सख्त पालन की मांग भी की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य की नियुक्तियों के लिए मिसाल बनेगा। राज्य सरकार को अब जल्दबाजी में अंतरिम व्यवस्था करनी होगी, ताकि PTCUL के प्रोजेक्ट प्रभावित न हों

Rupesh Negi

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