सेटेलाइट ने खोद निकाली निगम की जमीनें, यूसैक के सर्वे में कई हेक्टर सरकारी भूमि का डाटा आया सामने, अब मौके पर पड़ताल करेगी नगर निगम की टीम, लैंड बैंक तैयार करने में जुटा निगम।

सेटेलाइट ने खोद निकाली निगम की जमीनें, यूसैक के सर्वे में कई हेक्टर सरकारी भूमि का डाटा आया सामने, अब मौके पर पड़ताल करेगी नगर निगम की टीम, लैंड बैंक तैयार करने में जुटा निगम।
Spread the love

देहरादून– राजधानी देहरादून के नगर निगम की जमीनों को सेटेलाइट ने खोद निकाला है। इन जमीनों अब तक नगर निगम को जानकारी ही नहीं थी। देहरादून नगर निगम के 100 वार्डों में नदी क्षेत्र, ढांग से लेकर खाले और बंजर क्षेत्र तक कई हेक्टेयर जमीनों का खुलासा हुआ है। यह सर्वे उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र यानि यूसैक ने किया। अब इन जमीनों की मौके पर पड़ताल कर निगम की टीम लैंड बैंक बनाएगी।

यूसैक की टीम के सर्वे में नगर निगम के सभी 100 वार्ड में कई हेक्टेयर जमीन सामने आयी है। सेटलाइट इमेज से सर्वे किया गया है। सेटलाइट इमेज से सर्वे में आने के बाद तमाम सरकारी जमीन अलग-अलग जगहों पर निकली है और इसकी रिपोर्ट नगर निगम के भूमि अनुभाग ने तैयार कर दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर अब नगर निगम की भूमि अनुभाग की टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। इसके बाद एक फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी। इससे दून नगर निगम क्षेत्र का असली लैंड बैंक तैयार होगा, ताकि इस भूमि का सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल किया जा सके। जैसे कि नगर निगम के स्तर पर 25 वेंडिंग जोन प्रस्तावित हैं। इसी तरह से अन्य योजनाओं पर काम चल रहा है।

यूसैक ने सर्वे कुछ महीने पहले किया था। इसके तहत नगर निगम के एक-एक वार्ड में जमीनों का सर्वे हुआ। इस सर्वे में नदी श्रेणी, ढांग आदि जमीनों को चिह्नित किया गया। सर्वे नगर निगम के पुराने क्षेत्र के अलावा सीमा विस्तार में शामिल 72 गांवों को लेकर किया गया। यूसैक ने गोपनीय तरीके से ये सर्वे किया। इसकी रिपोर्ट भी तैयार करने के बाद नगर निगम को भेजी गई। अब नगर निगम की टीम के जरिए मौके पर जाकर सर्वे की पड़ताल की जाएगी।

यूसैक के इस सर्वे में नगर निगम की खाली और कब्जा मुक्त सरकारी जमीनों की सेटेलाइट से इमेज ली गई है। इसमें एक-एक इलाके की पूरी जानकारी है। इस सेटेलाइट इमेज में एक-एक जमीन को नदी श्रेणी, ढांग आदि के हिसाब से कैटेगिरी में लिया गया है, ताकि ये पता चल सके कितनी जमीन कब्जे में है और कितनी बची है, वहीं किस जमीन को किस हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है।

सेटेलाइट सर्वे के तहत डानलवाला क्षेत्र में ही 49 हेक्टेयर जमीन सामने निकलकर आयी है। इसमें नदी श्रेणी के इलावा अन्य जमीन भी हैं। डानलवाला क्षेत्र काफी बड़ा इलाका है। डानलवाला क्षेत्र में ही मोहिनी रोड, इंदर रोड, चंदर रोड, तेगबहादुर रोड, बलवीर रोड जैसे इलाके हैं और इन इलाकों में रिस्पना नदी से सटे क्षेत्र हैं।

नगर निगम के सीमा विस्तार के बाद आरेकेडिया ग्रांट इलाका शामिल हुआ था। ये इलाका पहले गांव था और अब नगर निगम में है। सर्वे में इस इलाके में नगर निगम की 6.790 हेक्टेयर जमीन निकली है। ये इलाका बड़ोवाला से लेकर श्यामपुर तक फैला हुआ है। इसलिए ये जमीन भी लैंड बैंक के तौर पर निगम के लिए कारगार होगी।

नगर निगम सीमा विस्तार के बाद निगम में मोथरोवाला इलाका भी आया। इस क्षेत्र में नगर निगम की तमाम सरकारी जमीन है। जिसमें नदी श्रेणी में ही 43. 57 हेक्टेयर जमीन है। ये इलाका विकसित हो रहा है और इस वजह से यहां पर जमीनों के रेट भी बढ़ गए हैं।

मसूरी विधानसभा के अंतर्गत कुठाल गांव में 2.90 हेक्टेयर जमीन निकली है। ये जमीन ढांग की श्रेणी में है। ये इलाका मालसी वार्ड में आता है। नगर निगम सीमा विस्तार के बाद ये इलाका निगम में शामिल हुआ था। इस इलाके में शैक्षिक संस्थान होने के बाद से जमीनों के रेट बढ़े हैं।

नगर निगम क्षेत्र का नकरौंदा इलाका अंतिम छोर माना जाता है, हालांकि ये बेल्ट कुंआवाला से जुड़ी है, वैसे कुंआवाला अंतिम सीमा है, पर नकरौंदा भी अंतिम बेल्ट मानी जाती है। इस इलाके में 4.83 हेक्टेयर जमीन सामने निकलकर आयी है। इस इलाके में जंगल और आदि क्षेत्र शामिल हैं।

रायपुर विधानसभा के अंतर्गत डांडा लखोड वार्ड में .1940 हेक्टेयर जमीन सामने आयी है। इस इलाके में पहले भी कब्जों के मामले सामने आ चुके हैं। जैसे कि इस वार्ड में नगर निगम का पुराना ट्रीटमेंट प्लांट है और यहां पर इन दिनों कूड़ा निस्तारण का काम चल रहा है। इसलिए इस इलाके में भूमाफिया की सरकारी जमीनों पर नजर है। कुछ समय पहले ही भूमाफिया ने यहां पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर दिया था और उसके बाद निगम ने कब्जा तोड़ दिया था। इसलिए इस इलाके की जमीन भी बेशकीमती मानी जाती है।

इस सर्वे में मालसी वार्ड में एक निजी अस्पताल के पास ग्राम सभा को दर्शाते साल के जंगल दर्शाए गए हैं। यहां पर करीब 6.8390 हेक्टेयर जमीन सर्वे में बतायी गई है। ये जमीन जंगल, ढांग से जुड़ी मानी जाती है। हालांकि नगर निगम की टीम मौके पर जब जाएगी तो जब जाकर इसकी पूरी हकीकत सामने आएगी।

सेटेलाइट सर्वे के जरिए नगर निगम क्षेत्र में कई हेक्टेयर जमीन को खंगाल लिया गया है। हालांकि अभी ये सच सामने आएगा कि कितनी जमीन कब्जे में है, कितनी खाली है। ये असलियत नगर निगम की भूमि अनुभाग के मौक पर जाकर पैमाइश सामने आएगी। जमीनों का डाटा निगम के पास है और अब इस डाटा को कंपाइल किया जाना है।

नगर निगम की जमीनों को बचाने के लिए ये पूरी कसरत है। वहीं जमीन बचाकर लैंड बैंक बनाने का भी काम है। पूर्व में नगर निगम की तमाम जमीनों पर कब्जे हुए हैं और कई जमीन हाथ से निकली है। इसलिए यूसैक के जरिए निगम ने अपनी जमीनों का सर्वे किया।

सौरभ थपलियाल, मेयर देहरादून नगर निगम ने यूसेक के जरिए निगम की जमीनों का सर्वे किया है। इसका डाटा भी तैयार किया जा चुका है। कई वार्ड में तमाम जमीनें सामने निकलकर आयी हैं। इन जमीनों का अब भूमि अनुभाग के जरिए मौके पर मुआयना किया जाएगा। निगम ये काम लैंड बैंक तैयार के लिए कर रहा है, ताकि सरकारी

Rupesh Negi

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *