पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर, मायके के जाति प्रमाण पत्र बड़ा फैसला, होंगे कई नामांकन रद्द।

पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर, मायके के जाति प्रमाण पत्र बड़ा फैसला, होंगे कई नामांकन रद्द।
Spread the love

देहरादून–  त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में हर रोज कोई न कोई नई विसंगतियां सामने आ रही हैं। इससे जहां राज्य निर्वाचन आयोग की कार्यशैली कटपरे में आ गई है, वहीं निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

ताजा मामला प्रत्याशियों के नामांकन स्वीकार और खारिज करने से जुड़ा है, जिसमें निर्वाचन अफसरों के निर्णय सवालों के घेरे में हैं। विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर लगाए गए निर्वाचन अधिकारियों ने मनमाने तरीके से प्रत्याशियों के नामांकनपत्र खारिज किए हैं।

कई जिला निर्वाचन अधिकारियों के बारे में लगातार शिकायतों को लेकर कांग्रेस ने कहा कि अनुभवहीन और कनिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है, जिनके गलत और नियम विरुद्ध निर्णयों से निष्पक्षता और पारदर्शिता पर आंच आ रही है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले को लेकर राज्यनिवाचन आयुक्त को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रकरण की जांच की मांग की है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त को भेजे गए पत्र में नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि पंचायत चुनावों में अधिकांश प्रत्याशी कमजोर पृष्ठभूमि के ऐसे उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं, जिनकी कानूनी जानकारी सीमित होती है।

ऐसे में निर्वाचन अधिकारियों का निष्पक्ष और कानूनी रूप से सक्षम होना जरूरी है। लेकिन चुनावों में कामचलाऊ व्यवस्था के तहत तमाम कनिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी गई है जिनके कई फैसले पक्षपातपूर्ण हैं। पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने ऊधमसिंह नगर के काशीपुर ब्लॉक की क्षेत्र पंचायत सीट खरमासी का जिक्र किया है।

उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति (जाटव) उम्मीदवार नम्रता का नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि, उन्होंने मायके का बना जाति प्रमाण पत्र अपने नामांकन पत्र में लगाया था।

नियमानुसार अनुसूचित जाति की महिलाओं के मामले में मायके के प्रमाण पत्र मान्य हैं। लेकिन रिटर्निंग अधिकारी बने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय जॉन ने ससुराल का प्रमाण पत्र मांगते हुए नामांकन रद कर दिया। इसके विपरीत रुद्रप्रयाग में एक प्रत्याशी जिस पर 27 लाख रुपये की सरकारी देनदारी है और उसके खिलाफ वसूली के लिए आरसी भी जारी की जा चुकी है, उसका नामांकन यह तर्क देते हुए स्वीकार कर लिया गया कि मामला उच्च मायालय में लंबित है। जबकि आपत्ति दर्ज कराने वाले ने दस्तावेजों के साथ स्पष्ट किया कि प्रत्याशी को न तो उच्च न्यायालय से कोई स्टे और न ही कोई राहत दी गई है।

निर्वाचन अधिकारी ने कोई कानूनी सलाह लिए बिना ही नामांकन मंजूर कर लिया। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि टिहरी जिले के जिला पंचायत क्षेत्र अखोड़ी में सात प्रत्याशियों के नामांकन बिना ठोस कारण के निरस्त कर दिए गाए, जिससे प्रतिद्वंही को सीधा लाभपहुंचाया गया है।  राज्य के कई जिलों से इस प्रकार कौशिकायतें मिल रही है कि अनुभवहीन अधिकारियों के फैसलों से चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि ऐसे विवादित फैसलों की जांच करायी जाए और जिन अधिकारियों के निर्णय पक्षपातपूर्ण या नियम विरुद्ध पाए जाएं, उन्हें तुरंत निर्वाचन की जिम्मेदारी से हटाकर प्रशिक्षित व वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।

पंचायत चुनाव में अड़ंगा डाल रही है कांग्रेस : माजपा

भाजपा ने कहा कि छोटी सरकार के गठन में जिस तरह कांग्रेस तमाम तरह की बाधाएं उत्पन्न कर रही है, उससे उसका असली चेहरा बेनकाब हो गया है। जनता उसे माफ नहीं करेंगी। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि अदालत ने पंचायत चुनाव को लेकर निर्णय दिया है और निर्वाचन आयोग उसका पालन करेगा। लेकिन कांग्रेस की मंशा चुनाव में सुधारात्मक नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेरित और हार की आशंका है। कांग्रेस हमेशा नतीजों के बाद हार के बहाने तलाश करती रही है। जब मतदाता सूची तैयार हो रही थी, उस पर आपतियों का समय दिया गया। कांग्रेस ने न कोई आपति दर्ज कराई न ही कोई सुझाव दिया। जब आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो रही थी तो कांग्रेस चुप्पी साधकर बैठी थी और आरक्षण का रोस्टर जारी होने के बाद भी चुप रही। चुनाव तिथि घोषित होने के बाद वह एकाएक सक्रिय हुई और तमाम हथकडे शुरू हो गए।

Rupesh Negi

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *