विदेशी पक्षियों से गुलज़ार हुआ देश का पहला वेटलैंड,हर साल सर्दियों में कठिन सफर तय कर आसान बैराज आते हैं विदेशी मेहमान।
देहरादून– विदेशी पक्षियों से गुलज़ार हुआ देश का पहला वेटलैंड
पांच हजार किमी की दूरी तय कर देहरादून पहुंचे साईबेरियन पक्षी
हर साल सर्दियों में कठिन सफर तय कर आसान बैराज आते हैं विदेशी मेहमान
–पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने दिया था पहले वैटलैंड रिजर्व बनने का गौरव
रामसर कनवेंशन ने देहरादून जिले के विकासनगर स्थित आसन कंजर्वेशन रिजर्व को अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट घोषित किया है। साथ ही देश में रामसर साइट की संख्या अब 38 हो गई है। जो पूरे साउथ एशिया में सबसे अधिक है। अंतरराष्ट्रीय महत्व की साइट घोषित होने के साथ ही आसन कंजर्वेशन रिजर्व प्रदेश का पहला रामसर साइट बन गया है।
आसन कंजर्वेशन रिजर्व को रामसर साइट में शामिल करने की कोशिश लम्बे समय से वन विभाग के अधिकारी की थी।
प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर उत्तराखंड में हर साल लाखों लोग यहां की खूबसूरती देखने के लिए आते हैं। आपको पता होगा कि देहरादून के विकासनगर में यह एक ऐसा स्थान है जहां हर साल पांच हजार किमी की दूरी तय कर साईबेरियन पक्षी प्रवास करने के लिए देहरादून आते हैं। राजधानी देहरादून से करीब 50 किलोमीटर दूर आसान बैराज वह स्थान है जहां फिलिस्तीन, कजाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान व अन्य देशों से साइबेरीन पक्षी हजारों किलोमीटर दूर से भारत आते हैं। इस बार भी देश का पहला वैटलैंड संरक्षण रिजर्व विदेशी मेहमानों से गुलज़ार हो चुका है। 2005 में देश के राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम साहब के हाथों इस स्थान को पहला वैटलैंड संरक्षण रिजर्व बनने का गौरव मिला था।
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