चार धाम यात्रा मार्गों के व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात, सुगम एवं सुव्यवस्थित रूप से संचालित किये जाने की मांग।
देहरादून– विगत वर्ष 2022 में संचालित की गयी चार धाम यात्रा में हुई अव्यवस्थाओं की और आपका ध्यान आकृषित करते हुए अवगत करवाना है कि चार धाम यात्रा में आए श्रदालुओं के लिए पंजिकरण एवं धामों में दर्शन हेतु समिति संख्या की बाध्यता के कारण बड़ी संख्या में तीर्थ यात्रियों को बिना दर्शन किये ही वापस भेजा गया जबकि पंजिकरण के कारण श्रदालुओं को दर्शन करने से रोकना संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतन्त्र के अधिकारों का हनन होगा, उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2023 को कपाट खुलने के पश्चात उत्तराखण्ड सरकार पंजिकरण एवं समिति संख्या में दर्शन करने की वाध्यता लागू की गयी जबकि तीर्थ यात्रियों की बुकिंग जनवरी-फरवरी 2023 में हवाई, रेलवे एवं होटलों आदि की बुकिंग शुरू हो जाती है, ऐसी स्थिति में जबकि श्रदालुओं द्वारा लाखों रूपये खर्च करने के पश्चात उन्हें दर्शन करने की अनुमति न दिया जाना औचित्यापूर्ण नहीं है। यदि उत्तराखण्ड सरकार को उक्त वाध्यताओं के साथ प्रारम्भ करनी थी तो इसकी सूचना तीन माह पूर्व व्यपक रूप से राष्ट्रीय स्तर प्रचारित एवं प्रसारित होना चाहिए था किन्तु सरकार की कमियों के कारण एक और तीर्थ यात्रियों को भारी परेशानिओं का सामना करना पड़ा वही दुसरी और होटल व्यवसायों को बुकिंग रिरस्त होने के कारण आर्थिक हानी उठानी पड़ीं।
महोदय आगामी वर्ष 2023 में संचालित होने वाली यात्रा में इसकी पुनरावृति न हो इस सम्बन्ध में निम्नलिखित बिन्दुओं पर सुधारत्मक कार्यवाही किये जाने हेतु आवश्यक निर्देश पारित करने की कृपा करें।
चार धाम यात्रा में आने वाले श्रदालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शीघ्र शुरु की जाये। ऑनलाइन पंजीकरण की बाध्यता समाप्त हो ।
2. चार धाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए सीमित संख्या की बाध्यता समाप्त हो।
3. चार धाम यात्रा पर आने वाले वाहनों को परमीट, फिटनेस, ग्रीन कार्ड आदि की समस्त औपचारिकताऐं, हरिद्वार, ऋषिकेश में पूर्ण कर ली जाय।
तत्पश्चात जगह-जगह पर वाहनों को रोककर समय का दुरूपयोग एवं यात्रियों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाय।
4. उत्तराखण्ड सरकार द्वारा हाल ही में दिनांक 18.07.2022 से 1000.00 से कम के बिलों पर जी०एस०टी० लागू किया गया है, जो की औचित्यापूर्ण नही है इस लिए 1000.00 से कम के बिलों पर जी०एस०टी० न लिया जाय यानि पहले की तरह यथावत रखा जाय।
5. उत्तराखण्ड राज्य के चारों धाम पर्वतीय क्षेत्र में स्थित होने के फलस्वरूप स्वतः प्रदूषण मुक्त है। अतः राज्य प्रदुषण नियन्त्रण बोर्ड से निर्गत किये जाने वाले प्रमाण पत्रों से अवमुक्त रखा जाय।
6. चारों धामों में आने वाले श्रदालुओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण के साथ ही
आफलाइन पंजीकरण पूर्व की भाति यथावत रखा जाए।
7. चारों धामों में आने वाले श्रदालुओं की सीमित संख्या की बाध्याता समाप्त की जायें
8. श्री केदारनाथ धाम में फाटा व सोनप्रयाग में आफलाइन पंजीकरण के काउंटर पूर्व की भाति सुचारू की जाए।
9. चारों धामों में प्रत्येक जिले चैकिंग हेतु एक स्थान सुनिश्चित किया जायें जगह-जगह चैकिंग के नाम पर श्रदालुओं को बार-बार रोक कर परेशान न किया जायें। व्यापारीयो ने यह भी मांग की आगामी वर्ष 2023 में चलने वाली यात्रा को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए उपरोक्त बिन्दुओं पर सहानुभुति पूर्वक विचार करते हुए संम्बन्धित को आवश्यक निर्देश देने का कष्ट करे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे चारधाम यात्रा तैयारियों की बैठक सचिवालय में हुई चारधाम यात्रा तैयारी की बैठक।
पिछले साल चारधामों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए इस बार दर्शन के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ाने पर विचार हुआ।
पर्यटन विभाग ने पिछली यात्रा के अनुभव के आधार पर केदारनाथ धाम के लिए प्रतिदिन 15 हजार, बदरीनाथ के लिए 18 हजार, गंगोत्री के लिए 9000, यमुनोत्री के लिए 6000 संख्या तय करने का बनाया प्रस्ताव।
इसके अलावा चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधा, केदारनाथ धाम में यात्रियों के ठहरने, बदरीनाथ व केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन के लिए शुल्क तय करने, बसों का प्रबंधन, घोड़ा खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण, पैदल मार्गों पर गरम पानी की व्यवस्था, शेड, बिजली व पेयजल की आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत समेत कई व्यवस्थाओं पर निर्णय लिया।

