उत्तराखंड में नकल माफियाओं पर नकेल कसने के लिए,धामी सरकार का बड़ा निर्णय, सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाने का फैसला।
देहरादून– उत्तराखंड में नकल माफियाओं पर नकेल कसने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सख्त है और इसी के चलते एक बड़ा निर्णय मुख्यमंत्री के तरफ से लिया गया देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाने का फैसला सरकार ने किया है
इस कानून पर अध्यादेश को मुख्यमंत्री ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करके अनुमति दी है और अग्रिम कार्यवाही के लिए राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही देश का पहला सबसे सख्त कानून उत्तराखंड में लागू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ तौर पर युवाओं को अपना संदेश दिया और कहा कि उत्तराखंड के युवाओं से किए वादे के अनुरूप हमारी सरकार देश का सबसे सख्त कानून नकल विरोधी कानून लाने का फैसला करने जा रही है और मुख्यमंत्री ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए अध्यादेश को मंजूरी दे दी है
आइए जानते हैं नकल विरोधी कानून में क्या प्रावधान होने वाला है
1, नकल में लिप्त पाए जाने वाले पर उम्रकैद और 10 करोड़ का जुर्माना
2,, नकलची छात्र 2 से 5 वर्ष के लिए परीक्षा से वंचित होंगे और अगर वह दोषी पाए गए तो उन्हें 10 साल के लिए कोई परीक्षा देने की अनुमति नहीं होगी
3,, अगर किसी कारण बस एक बार गलती के बावजूद दोबारा नकल करते पकड़े गए तो 10 वर्ष की जेल 10 लाख जुर्माना
4,, नकल करने वालों को 3 साल की जेल का न्यूनतम पांच लाख का जुर्माना
प्रदेश में अब नकल का अपराध संघीय और गैर जमानती होगा इसके अलावा नकल माफिया जो अनुचित साधनों का इस्तेमाल करके संपत्ति अर्जित करेंगे उस संपत्ति को सरकार कुर्क करेगी
अब गहनता से आपको समझाते हैं कि आखिर नकल विरोधी कानून से आरोपियों पर क्या-क्या कार्यवाही की जा सकती है
1,,कोई व्यक्ति कोचिंग संस्थान प्रिंटिंग प्रेस परीक्षा केंद्र के प्रबंधन तंत्र परीक्षा में आयोजन जो किसी भी वजह से पेपर लीक या अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल पाए गए तो उन्हें आजीवन कारावास और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने की सजा मिलेगी
2,, कोई परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी नकल करते हुए अगर पकड़ा गया तो उसे 3 साल की जेल और कम से कम पांच लाख के जुर्माने की सजा मिलेगी अगर वही परीक्षार्थी दोबारा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में दोषी पाया जाता है तो उसे 10 साल का कारावास और कम से कम 10 लाख का जुर्माना भरना होगा
3,, अगर कोई परीक्षार्थी नकल करते हुए पाया जाता है तो आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से 2 से 5 साल के लिए उस पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा अगर दोष सिद्ध हो जाता है तो 10 साल के लिए किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में वह शामिल नहीं हो पाएगा
4,, अगर कोई परीक्षार्थी दोबारा नकल करते हुए पाया जाता है तो उसे 5 से 10 साल की सजा के साथ-साथ आजीवन सभी प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर कर दिया जाएगा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साफ निर्देश है कि उत्तराखंड को जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना हो इसलिए हम नकल विरोधी कानून लेकर आए हैं आने वाले वक्त में सभी परीक्षाएं पारदर्शी ढंग से हो सके इमानदार तरीके से हो सके इसको लेकर हमारी सरकार काम कर रही है और युवाओं के भविष्य के लिए संवेदनशील है किसी भी युवा को झांसे में आने की जरूरत नहीं है इस प्रदेश के युवाओं के साथ हमारी सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा सब पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगा।
नकल विरोधी कानून को लेकर वित्त मंत्री प्रेम चंद्र अग्रवाल ने कहा यह कानून नकल माफियाओं पर नकेल कसने का काम करेगा युवाओं के भविष्य को उज्जवल बनाने का काम करेगा और हमारी सरकार इसको लेकर संवेदनशील है जिस तरीके से कई मामले प्रश्न पत्र लीक के आए हैं हमने सभी आरोपियों पर दंडात्मक कार्यवाही की है और आगे भी देश का सबसे सशक्त कानूनी बन सके इसको लेकर हम काम कर रहे हैं।

