नैनीताल से हाईकोर्ट के शिफ्ट होने को लेकर कयास तेज, गौलापार शिफ्ट किया जा सकता है,सरकार जल्द कर सकती है विचार।

नैनीताल से हाईकोर्ट के शिफ्ट होने को लेकर कयास तेज, गौलापार शिफ्ट किया जा सकता है,सरकार जल्द कर सकती है विचार।
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देहरादून– नैनीताल की भौगोलिक परिस्थिति और पहाड़ी दरकने आशंका को देखते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट को शिफ्ट करने की कवायद चल रही है 29 अक्टूबर को प्रदेशभर के अधिवक्ता इस विषय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करेंगे और हाईकोर्ट को जल्द से जल्द शिफ्ट कराने की कवायद में तेजी लाने की अपील भी करेंगे।  बता दे कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के नैनीताल शहर से हल्द्वानी स्थानांतरण होने को लेकर चर्चाए तेज हो गई है है। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रदेश सरकार इस पर अपनी मुहर लगा सकती है। हाईकोर्ट के नैनीताल से हल्द्वानी में शिफ्ट होने को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है। हाईकोर्ट की ओर से भी इस बारे में अधिवक्ताओं से कुछ समय पहले सुझाव मांगे गए थे। तब अधिकांश लोगों ने नैनीताल से हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट करने को लेकर बहुमत से सुझाव दिए थे। इससे संबंधित एक प्रस्ताव सरकार के पास पहुंच गया है। सरकार की सहमति के बाद वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हाईकोर्ट शिफ्टिंग के पक्षधर अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री, कानून मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश, मुख्य न्यायाधीश उत्तराखंड हाईकोर्ट समेत प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर हाईकोर्ट को गौलापार हल्द्वानी शिफ्ट करने की मांग की है। साथ ही इस प्रपत्र में हाईकोर्ट के 114 अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर भी कराए गए हैं।

इस बार फिर हाईकोर्ट के शिफ्ट होने को लेकर चर्चा तेज है। बताया जा रहा है कि इससे संबंधित एक प्रस्ताव सरकार के पास पहुंच गया है। 28 अगस्त को नैनीताल के दौरे पर आए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह प्रस्ताव सौंपा गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व मुख्यमंत्री की औपचारिक मुलाकात के दौरान यह प्रस्ताव सौंपा गया है।
मुख्यमंत्री की ओर से इस प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही गई है।

माना जा रहा है कि सरकार इस पर जल्द ही कोई निर्णय ले सकती है। यहां यह भी बता दें कि हाईकोर्ट के हल्द्वानी के गौलापार शिफ्ट होने को लेकर लंबे समय से चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि गौलापार में इसके लिये भूमि का चयन भी कर लिया गया है। सरकार की सहमति के बाद वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

Rupesh Negi

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