8 फरवरी को आयोजित महापंचायत को लेकर नरेंद्र सिंह नेगी ने किया आह्वान,अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आयोजित हो रही महापंचायत।
देहरादून– उत्तराखंड के लोकगायक, जनकवि और सांस्कृतिक प्रतीक नरेंद्र सिंह नेगी ने 8 फरवरी 2026 को देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रस्तावित महापंचायत को लेकर प्रदेश की जनता से व्यापक अपील की है। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की यह लड़ाई पूरे उत्तराखंड की आत्मा, अस्मिता और पहाड़ की बेटियों के सम्मान की लड़ाई है।
नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि यदि आज अन्याय के खिलाफ सामूहिक स्वर नहीं उठा, तो कल पहाड़ की हर बेटी असुरक्षित महसूस करेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बड़ी संख्या में महापंचायत में पहुंचकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करें। उन्होंने कहा कि यह महापंचायत न्याय, संवेदना और मानवीय मूल्यों के पक्ष में एक जनआंदोलन है। पहाड़ की संस्कृति ने हमेशा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा दी है और आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।
संघर्ष मंच ने कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक दोषियों को सज़ा और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल जाता।
महापंचायत को लेकर प्रदेशभर में जनसंपर्क और जनजागरण तेज़ किया जा रहा है।
अंकिता भंडारी महापंचायत एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति को झकझोर रही है। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर हो रही इस महापंचायत को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से लेकर गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी तक का समर्थन मिल रहा है। लेकिन जैसे-जैसे भीड़ और नाम बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे सवाल और भी तीखे होते जा रहे हैं।
क्या मंच पर सबसे आगे अंकिता का परिवार और आम जनता होगी, या फिर न्याय की इस पुकार को नेताओं और प्रभावशाली चेहरों की भीड़ ढक देगी? जिस महापंचायत को जनआंदोलन कहा जा रहा है, उसमें सियासी मौजूदगी अब संदेह के घेरे में है।
भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान का कहना है कि सरकार पहले ही CBI जांच की संस्तुति दे चुकी है और दोषियों को उम्रकैद से भी कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा के मुताबिक, अंकिता उत्तराखंड की बेटी है और उसे न्याय मिला है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रही है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई है। उनका सवाल है, अगर सब कुछ साफ है तो VIP कौन है? उनके नाम सार्वजनिक क्यों नहीं? CBI को दिए गए प्वाइंट ऑफ रेफरेंस क्यों छुपाए जा रहे हैं? कांग्रेस का दावा है कि जनआंदोलन को समर्थन देना उनका नैतिक कर्तव्य है और भाजपा राजनीति का आरोप लगाकर सच्चाई से भाग रही है।
उत्तराखंड क्रांति दल की केंद्रीय महामंत्री मीनाक्षी घिडियाल ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अंकिता को अब तक न्याय न मिलना राज्य के लिए शर्मनाक सच्चाई है। केवल CBI जांच की संस्तुति देकर सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उनका सवाल और भी चुभने वाला है, फोन पर खुलासे करने वाला सुरेश राठौड़ आज़ाद क्यों है? जिन वीआईपी नामों की चर्चा हुई, उन पर कार्रवाई की रिपोर्ट कहां है?
महापंचायत से पहले सियासत चाहे जितनी तेज हो जाए, लेकिन कुछ सवाल अब भी अधूरे हैं।
VIP कौन है और उसे बचाया क्यों जा रहा है?
जिन नामों पर उंगलियां उठीं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखती?
क्या न्याय की लड़ाई को राजनीति की भीड़ में गुम कर दिया जाएगा?
8 फरवरी की महापंचायत सिर्फ़ भीड़ नहीं, जवाब मांगने की कसौटी होगी। क्योंकि सवाल यह नहीं कि मंच पर कौन बैठेगा, सवाल यह है कि अंकिता को इंसाफ़ कब मिलेगा?


