पवित्र धामों में गैर-हिंदू प्रवेश पर निर्णय आस्था व परंपरा के अनुरूप हो, कांग्रेस के लिए तीर्थाटन और पर्यटन एक समान, चार धाम केवल आर्थिकी का साधन।

पवित्र धामों में गैर-हिंदू प्रवेश पर निर्णय आस्था व परंपरा के अनुरूप हो, कांग्रेस के लिए तीर्थाटन और पर्यटन एक समान, चार धाम केवल आर्थिकी का साधन।
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देहरादून– भाजपा ने पवित्र धामों में गैर-हिंदू प्रवेश के मुद्दे पर धार्मिक आस्था, विश्वास और देवभूमि की परंपराओं के अनुरूप निर्णय लेने की वकालत की है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं के बयानों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों को तीर्थाटन और पर्यटन का फर्क नहीं मालूम, उनके लिए चारों धामों का महत्व केवल आर्थिकी तक सीमित रह गया है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार के बाद अब चार धामों में गैर-सनातनी प्रवेश को लेकर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस जिस तरह प्रतिक्रिया दे रही है, वह उसकी सनातन विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। भट्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों से जुड़े नियम जन-आस्था, विश्वास और परंपरा के अनुरूप तय होने चाहिए। यदि संबंधित धामों के तीर्थ पुरोहित, पुजारी और स्थानीय धर्मावलंबी प्रवेश को लेकर कोई व्यवस्था बनाना चाहते हैं, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है। देश-दुनिया के कई धार्मिक स्थलों पर इस तरह की व्यवस्थाएं पहले से जनसहमति के आधार पर लागू हैं।

उन्होंने कहा कि मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सामूहिक पूजा का पवित्र केंद्र होता है। ऐसे में जिनका वहां से कोई धार्मिक जुड़ाव, आस्था या विश्वास नहीं है, वे किस उद्देश्य से वहां जाते हैं, यह सवाल स्वाभाविक है। केवल घूमने के नाम पर अव्यावहारिक आचरण या पवित्र वातावरण को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चार धामों को घूमने-फिरने से जोड़ना यह दर्शाता है कि कांग्रेस का सनातन परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस चार धामों की पवित्रता और परंपरा से ज्यादा आर्थिकी की चिंता कर रही है। जबकि भाजपा यह मानती है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में चार धाम यात्रा की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन पवित्र धामों के भीतर सभी व्यवस्थाएं सनातनी परिप्रेक्ष्य में ही होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के बाद जनभावनाओं के अनुरूप पर्यटन के साथ-साथ तीर्थाटन को भी विशेष महत्व दिया गया। पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन धार्मिक स्थलों में वही पर्यटन स्वीकार्य है, जो आस्था, विश्वास और परंपरा के अनुरूप हो और वही तीर्थाटन कहलाता है।

भट्ट ने प्रदेश कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ये देवभूमि में रहकर उत्तराखंडियत का दावा तो करते हैं, लेकिन हर सनातनी निर्णय का विरोध करते हैं। धार्मिक स्थलों में नियमों पर आपत्ति, यूसीसी का विरोध, धर्मांतरण कानून से असहमति, अवैध धार्मिक अतिक्रमण पर चुप्पी और धार्मिक स्थलों के विकास पर सवाल, हर मुद्दे पर कांग्रेस का रुख नकारात्मक रहा है।

उन्होंने कहा कि चाहे डेमोग्राफी संतुलन की बात हो या लव और लैंड जिहाद पर कार्रवाई की, हर बार कांग्रेस को ही परेशानी होती है। लेकिन प्रदेश की राष्ट्रवादी और सनातन सोच वाली जनता कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ रही है और आने वाले समय में इन राजनीतिक कालनेमियों को पहले की तरह लोकतांत्रिक जवाब देगी।

Rupesh Negi

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