भारत तिब्बत व्यापार से जुडा माघ मेला, कंडार देवता तथा हरि महाराज की डोली के सानिध्य में उत्तरकाशी के ऐतिहासिक माघ मेले का मुख्यमंत्री धामी ने किया विधिवत् शुभारंभ।

भारत तिब्बत व्यापार से जुडा माघ मेला, कंडार देवता तथा हरि महाराज की डोली के सानिध्य में उत्तरकाशी के ऐतिहासिक माघ मेले का मुख्यमंत्री धामी ने किया विधिवत् शुभारंभ।
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देहरादून/उत्तरकाशी– मकर संक्रांति के पर्व पर उत्तरकाशी में सुप्रसिद्ध माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौलू) शुरू हो गया है। पौराणिक माघ मेले का उद्घाटन बाड़ाहाट पट्टी के आराध्य कंडार देवता तथा बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज की डोली के सानिध्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में किया गया। जनपद के रामलीला मैदान में सप्ताह भर चलने वाला बाड़ाहाट का थौलू के नाम से प्रचलित यह पौराणिक मेला जनपद की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संवाहक है।

आज माघ मेला में भाग लेने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण लोक देवताओं की डोलियों और धार्मिक प्रतीकों के साथ उत्तरकाशी पहॅुंचे। भागीरथी नदी में पर्व स्नान करने के बाद कंडार देवता व हरि महाराज सहित अनेक देवडोलियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने बाड़ाहाट (उत्तरकाशी नगर का पुरातन क्षेत्र) स्थित चमाला की चौंरी पर पहॅुचकर डोलीनृत्य व रासो-तांदी नृत्य कर बाड़ाहाट के थौलू (मेला) की अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की छटा बिखेरी।

अपराह्न में रामलीला मैदान में कंडार देवता व हरि महाराज की आगवानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर माघ मेला का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मेला पांडाल में घण्डियाल देवता, खंडद्वारी देवी, राज-राजेश्वरी देवी, त्रिपुर सुंदरी,नाग देवता व दक्षिण काली सहित अनेक देवडोलियों व धार्मिक प्रतीकों की भी उपस्थिति रही। उद्घाटन समारोह में त्रृषिराम शिक्षण संस्थान की छात्राओं ने स्वागत गान एवं नृत्य प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को मकर संक्रांति और माघ मेले की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज उन्हें बाबा विश्वनाथ की नगरी और मां भागीरथी की पावन धरा पर आयोजित पौराणिक और ऐतिहासिक धार्मिक मेले के शुभारम्भ में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। यह एक लोक आस्था का महाकुंभ है और आज के दिन से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। आज उत्तरकाशी जनपद अपनी एक आध्यात्मिक पहचान बना रहा है। वहीं विकास के पथ पर भी अग्रसर है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार की नीतियां सिर्फ फ़ाइलों तक सीमित नहीं है सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित है और विकास भी सुनिश्चित हो रहा है एवं पर्यटन के क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर बनाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तरकाशी जनपद में 1000 करोड़ से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण, मरम्मत और सुधारीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। उत्तरकाशी में ही रू. 23 करोड़ की लागत से 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट बनाया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला का उच्चीकरण कर रू. 46 करोड़ की लागत से उपजिला अस्पताल बनाया जा रहा है। सिल्क्यारा टनल का ब्रेकथ्रू भी हो चुका है जल्द ही इस टनल का कार्य पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों सहित पर्यटकों को भी सहूलियत मिलेगी। इस टनल के निर्माण से यमुनोत्री और गंगोत्री के मध्य लगभग 25 किमी की दूरी भी कम होगी। यमनोत्री में हैलीपेड निर्माण, सिंचाई योजनाएं, भटवाड़ी में बाढ़ सुरक्षा कार्य सहित विकास के अन्य कार्य किए जा रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा आज सरकार 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन कार्यक्रम पर कार्य कर रही है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से भी पर्यटन को नया आयाम दिया जा रहा है। जादुंग में उत्सव मैदान का निर्माण किया जा रहा है। आज उत्तरकाशी जनपद में 12 हजार लखपति दीदी बन चुकी है। जो आत्मनिर्भर उत्तराखंड की तस्वीर को प्रदर्शित करती है। सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में भी आज उत्तराखंड प्रथम स्थान हासिल किया है तथा राज्य में भी उत्तरकाशी तीन प्रमुख जिलों में शामिल है। आज राज्य में रिवर्स पलायन भी बढ़ रहा है लोग आज अपने पैतृक निवास की और लौट रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी अतिथि देवो भव: की परम्परा है और देवभूमि की मर्यादा तोड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने दंगा विरोधी कानून, धर्मांतरण कानून,लव जिहाद, लैंड जिहाद आदि कानून लागू किए हैं तथा 1000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई है। राज्य में सख्त भू कानून लागू किया है तथा ऑपरेशन कालनेमी चलाकर सनातन धर्म को बदनाम करने वाले पाखंडियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। उत्तराखंड देश में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला प्रथम राज्य बना है, यूसीसी के लागू होने से आज सभी के लिए सबकी सुरक्षा और एक समान कानून लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शिता के साथ नौकरी मिली है। युवाओं के भविष्य के लिए सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। अभी 2 हजार पुलिस भर्ती पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद परिणाम घोषित किया गया है,जल्द ही इन 2000 युवाओं को नियुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है भ्रष्टाचार में लिप्त उच्च अधिकारियों सहित सभी पर कड़ी कार्यवाही की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार देवभूमि की संस्कृति के साथ किसी को भी छेड़–छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। देवभूमि में किसी भी प्रकार का जिहाद नहीं चलेगा। अंकिता भंडारी केस पर उन्होंने कहा कि हमने पहले भी जांच करवाकर अपराधियों को जेल पहुंचाने का काम किया है तथा स्वयं अंकिता भंडारी के माता पिता से मिलकर उनकी भावनाओं के अनुरूप सीबीआई जांच के आदेश दिए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो अंकिता भंडारी को पहले भी न्याय दिलाने के खड़े थे और आगे भी खड़े रहेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शक्ति मंदिर एवं बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, संतों के आशीर्वचनों के शिलापट्टों किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री ने अपने जनपद भ्रमण के दौरान पौराणिक भगवान विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में दर्शन के उपरांत महान संतों के आशीर्वचनों और उनके आध्यात्मिक संदेशों पर आधारित संकलन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है और यहाँ के संतों का तप व ज्ञान हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि संतों के दिव्य वचन समाज को सही मार्ग दिखाने के साथ-साथ हमारी युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में सहायक हैं।

 

उत्तरकाशी के धार्मिक एवं पौराणिक माघ मेले का आगाज 14 जनवरी से शुरूआत हो गई है। इस आठ दिवसीय माघ मेले का धार्मिक ,सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में यह मेला महाभारत काल से जुड़ा है। वहीं, ऐतिहासिक महत्व यह है कि यह मेला भारत और तिब्बत के व्यापार का साक्षी रहा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में पौराणिक और ऐतिहासिक माघ मेले की शुरुआत मकर संक्रांति के दिन से होती हैं। “बाडाहाट कू थौलू “का पुरातन काल में ये मेला तिब्बत और भारत के व्यापार का केंद्र रहा है। इस मेले में जिले भर के ग्रामीण मेले का आनंद लेते हैं। काशी विश्वनाथ नगरी उत्तरकाशी के प्रसिद्ध माघ मेले (बाड़ाहाट कू थौलू) का आगाज 14 जनवरी से हो गया हैं।

आठ दिवसीय इस माघ मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में यह मेला महाभारत काल से जुड़ा है। वहीं, ऐतिहासिक महत्व यह है कि यह मेला भारत और तिब्बत के व्यापार का साक्षी रहा है। जिला पंचायत हर साल इस मेले का आयोजन करता आ रहा है, लेकिन 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद ये भारत और तिब्बत के व्यापार भी बंद हो गया था।

माघ मेले का पौराणिक नाम बाड़ाहाट कू थौलू के नाम से प्रशिद्ध है। बाड़ाहाट का अर्थ बड़ा हाट यानी बड़ा बाजार है। बाड़ाहाट में आजादी से पहले तिब्बत के व्यापारी यहां सेंधा नमक, ऊन, सोना जड़ी-बूटी, गाय, घोड़े बेचने के लिए आते थे। उस समय यह मेला एक माह तक चलता था। तिब्बत के व्यापारी यहां से धान, गेहूं लेकर वापस लौटते थे।

इस मेले में टिहरी और उत्तरकाशी के ग्रामीण अपने देवताओं के साथ आते थे। गंगा स्नान के साथ-साथ खरीदारी भी करते थे। उत्तरकाशी का माघ मेला राजशाही के नियंत्रण में था। राजशाही के समय इस माघ मेले में तिब्बत से आने वाले व्यापारियों का हिसाब-किताब रखने के लिए अंतिम मालगुजार मुखबा निवासी पंडित विद्यादत्त सेमवाल थे। ये तिब्बत के व्यापारी टिहरी राज दरबार तक सामान पहुंचाते थे।

धार्मिक परंपराओं से जुड़ा “बाड़ाहाट कू थौलू”

बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी उत्तरकाशी के प्रसिद्ध माघ मेले (बाड़ाहाट कू थौलू) का 14, जनवरी बुधवार को यहां के आराध्य कंडार देवता और हरि महाराज का ढोल के सानिध्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार करीब दो बजे रामलीला मैदान उत्तरकाशी में पौराणिक माघ मेला का शुभारंभ करेंगे।

14 जनवरी से मकर संक्रांति के पर्व पर माघ मेला (बाडाहाट कू थौलू) की समुचित तैयारी पूरी है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम कर दिये गये हैं। माघ मेला के दौरान पुलिस पूरी तरह से मुस्तेत रहेगी। उन्होंने कहा है कि असामाजिक तत्वों पर भी पुलिस की कड़ी नजर रहेगी। वहीं सिंचाई विभाग को स्नान घाटों की समुचित व्यवस्था करने की निर्देश दिए हैं।

मकर संक्रांति है बहुत ही पुण्यदायी, इस दिन स्नान-दान का है विशेष महत्व

मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और धरती पर प्रकाश का प्रभाव बढ़ जाता है। यह तमसो मा ज्योतिर्गमय की यात्रा है। जब उन्नति उत्तम विचारों सात्विकता कर्तव्यपालन त्याग सत्य दया क्षमा आदि की ओर हम प्रवृत्त होते हैं तब मानना चाहिए कि हम उत्तरायण की यात्रा पर चल पड़े हैं। ज्योतिष चक्र में कुल बारह राशियां हैं। प्रत्येक राशि में एक महीने तक सूर्य का भ्रमण होता है। जिसे सौर राशि भी कहा जाता है। इस तरह सूर्य कुल 12 महीनों में संपूर्ण राशि चक्र की परिक्रमा पूर्ण करता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि का भ्रमण पूर्ण कर मकर राशि में प्रवेश को उद्यत होता है,काल को मकर संक्रांति कहा जाता है।

Rupesh Negi

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