सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद मामले में आया नया मोड़, पर्यावरण विद अनिल जोशी के द्वारा मुकदमे के आधार पर होगी सीबीआई जांच।
देहरादून– राज्य के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में सियासत सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद भी खत्म नहीं हुई है, बल्कि प्रदेश में राजनीति इस बात को लेकर गर्म हुई है कि सीबीआई जांच भी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ निष्पक्ष जांच हो सके और सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिल सके। चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड पर हो रही सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। बढ़ते जनदबाव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है, जिस पर अब निर्णय केंद्र सरकार को लेना है। सीबीआई जांच को लेकर विपक्ष का आक्रामक रवैया नरम नहीं हुआ है, बल्कि विपक्ष ने अपने तेवर को और तल्ख करते हुए सीबीआई जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज के निगरानी में करने की मांग की है, क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि पहले भी सफेद पोश नेताओं को बचाने और सबूत को मिटाने का प्रयास हुआ है, इसलिए जांच की निष्पक्षता बनी रहे उसके लिए सिटिंग जज की निगरानी में जांच होना आवश्यक है। इसके साथ ही सीबीआई से जांच इसलिए भी करना आवश्यक है कि वीआईपी नाम की गुत्थी को सुलझाया जा सके और उसकी सत्यता को सामने लाया जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता से वायदा किया था कि उनका जो निर्णय होगा उसे निर्णय पर ही सरकार जांच करवाने का काम करेगी और उनके द्वारा सीबीआई जांच की मांग की गई तो राज्य सरकार ने जन भावनाओं को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर सभी का भरोसा बना रहे इसलिए सीबीआई जांच की संस्तुति की है।
दूसरी तरफ भाजपा कांग्रेस अब भी एक दूसरे पर आरोप लगाने का काम कर रहे हैं। भाजपा कहती है कि कांग्रेस इस मामले पर राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस का मानना है कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण पर निष्पक्षता के साथ काम नहीं करना चाहती थी, इसीलिए सीबीआई जांच से बचने का काम कर रही थी, लेकिन जनदबाव में अब सीबीआई जांच करने का निर्णय लिया गया है। राजनीति के जानकारों की माने तो सीबीआई जांच का निर्णय सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन और जनता का सरकार पर बढ़ते दबाव का असर है, जिस पर सरकार ने मजबूरी में सीबीआई जांच का निर्णय लिया है। अंकिता भंडारी प्रकरण में सीबीआई जांच होना आवश्यक था, क्योंकि सामाजिक दबाव तो सरकार पर पड़ ही रहा था, लेकिन वीआईपी कौन था इस गुत्थी को सीबीआई जांच में ही सुलझाया जा सकता था।
अंकिता भंडारी केस की सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद भी मामले में नए मोड़ आ रहे हैं। कांग्रेस ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बिना सिटिंग जज की निगरानी के सीबीआई जांच से सरकार मामले को उलझाना चाहती है। वहीं इस मामले में तथाकथिक वीआईपी के खिलाफ देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया है। बता दें कि शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी केस की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। हालांकि अभी इस जांच के दायरे और अन्य बिंदुओं के बारे मे विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इस मामले पर शनिवार को कांग्रेस दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि सरकार ने पहले दिन से इस जांच को दबाने और भटकाने का प्रयास किया। गोदियाल ने कहा कि सरकार को ये स्पष्ट बताना चाहिए कि सीबीआई जांच की संस्तुति में कौन से बिंदु शामिल किए गए हैं। क्या इसमें वीआईपी की जांच का जिक्र है? सरकार तत्काल जनहित में जांच के बिंदुओं को सार्वजनिक करे। गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार वीआईपी के मसले को उलझाना चाहती है जबकि इस मामले में वीआईपी सौ फीसदी था जिसकी वजह से अंकिता भंडारी की हत्या हुई थी। इसलिए सीबीआई की समयबद्ध जांच हो और वीआईपी पर सख्त एक्शन होना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सीबीआई संस्तुति के बाद वसंत विहार थाने में पर्यावरण विद अनिल जोशी के द्वारा मुकदमे के आधार पर सीबीआई जांच होने जा रही है। पर्यावरणविद, पद्मभूषण, पदमश्री अनिल जोशी द्वारा एफआईआर सॅख्या 06/2026 धारा 238, 249, 45 बी0एन0एस0 का मुकदमा दर्ज किया गया है।
गढ़वाल IG राजीव स्वरूप ने बताया अंकिता भंडारी मर्डर केस की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने CBI जांच के निर्देश दिए हैं। मामला पहले ही पुलिस मुख्यालय भेजा जा चुका है,और अब इसे CBI को सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने खुद अंकिता के माता-पिता से बात कर उनकी बातों और मांगों को ध्यान से सुनकर सीबीआई फैसला लिया है। अनिल जोशी ने अपने मुकदमे में vip कहे जा रहे किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों से संबंधित इस अपराध स्वतंत्र जांच की मांग की है । अब इस मुकदमे के आधार पर सीबीआई को पूरी जांच सौंपी जाएगी।
गढ़वाल IG ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। एक वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी की अगुवाई में SIT बनाई गई, जिसने गहराई से जांच की और पुख्ता सबूत जुटाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। किसी भी आरोपी को एक दिन की भी जमानत नहीं मिली। IG ने कहा कि अब पूरे मामले में और पारदर्शिता लाने के लिए इसे CBI को सौंपा जा रहा है, ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे और अंकिता को पूरा न्याय मिल सके।


