मौसम परिवर्तन के कारण वन्य जीव की प्रकृति में भी आ रहा बदलाव, बढ़ रहा हैं मानव जीवन संघर्ष।

मौसम परिवर्तन के कारण वन्य जीव की प्रकृति में भी आ रहा बदलाव, बढ़ रहा हैं मानव जीवन संघर्ष।
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देहरादून– उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं ने अब आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ दिन के दिन बढ़ता जा रहा है। कई जनपदों में जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं। पहाड़ के दर्जनों स्कूलों के टाइम में बदलाव किया गया है। वहीं, प्रदेश सरकार न वन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है। प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी पुनीत तोमर ने बताया कि भालू और गुलदार संभावित संवेदनशील स्थलों पर विभागीय टीम 15 सितम्बर से पेट्रोलिंग कर रही हैं। इसके लिए ग्राम प्रधानों सहित वन पंचायतों के साथ मिलकर जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कहा कि गर्मी के सीजन में लगातार बारिश और वर्तमान में सर्दी के सीजन में बर्फबारी न होने से भालू के रहन-सहन की प्रकृति में भी बदलाव आया है। दिसम्बर और जनवरी माह में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं ज्यादा होती हैं, जिसके लिए जागरूकता जरूरी है।

बुधवार को नई टिहरी में पत्रकार वार्ता करते हुए डीएफओ ने बताया कि इस बार मौसम चक्र में परिवर्तन के कारण भालू की हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) में भी परिवर्तन आया है। कहा कि यह शोध का विषय है। बावजूद इसके वन विभाग लगातार वन्य जीवों से संघर्ष न हो इसके लिए जन जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है। भालू और गुलदार के सबसे ज्यादा संवेदनशील स्थल बासर, हिंदाव, धारमंडल, भदूरा, भरपूर, थाती-कठूड़ आदि में विभागीय टीमें नियमित गश्त कर रही हैं। इन क्षेत्रों में संवेदनशील घरों को भी चिह्नित कर लोगों के सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। टीम के पास जरूरी संसाधन हैं। बीते दो साल में डिवीजन क्षेत्र में 200 से अधिक सोलर लाइट बांटी गई हैं। 100 नई सोलर लाइटें भी जल्द गांवों को दी जाएंगी। राजस्व, पुलिस, कृषि सहित अन्य सभी विभागों से समन्वय बनाकर कार्य कर रहे हैं। उरेड़ा से भी गांवों में सोलर लाइट लगाने के लिए संबंधित प्रधानों के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने को कहा गया है। वन विभाग की तरफ से संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाए गए हैं और जानवरों को ट्रैंकुलाइज करने की कार्रवाई भी जारी है। सरकार की ओर से यह भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी स्थान पर स्थिति बेकाबू होती है और जन-जीवन पर सीधा खतरा बनता है, तो सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित इलाकों के प्राथमिक स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। वहीं, कुछ स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित लाने–ले जाने की जिम्मेदारी वन विभाग की टीम निभा रही हैं।

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि जिन जिलों में दिक्कत सामने आई, वहां तुरंत कार्रवाई की गई है और अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। प्रदेश में जंगली जानवरों की बढ़ती गतिविधियों से करीब आधार दर्जन जनपदों में दिक्कत आई है, जहां भी घटनाएं हुई हैं, वहां तुरंत वन विभाग की टीम तैनात की गई है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरे लगाए गए हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

गौरतलब है कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष ने प्रशासन की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे में सरकार के सामने जहां वन्यजीवों का संरक्षण एक जिम्मेदारी है। वहीं, लोगों और खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज और भाजपा युवा नेता सुयश रावत ने ऋषिकेश एम्स पहुंचकर गुलदार के हमले में गंभीर रूप से घायल विकासखंड पोखड़ा के ग्राम देवराड़ी निवासी (36) वर्षीय कंचन देवी पत्नी अर्जुन सिंह का हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने डाक्टरों से बातचीत कर उनकी देखभाल और उचित इलाज करने के निर्देश दिए। उन्होंने घटना पर चिंता जताते हुए डीएम से वार्ता कर गुलदार के हमले में घायल कंचन देवी को तत्काल एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश में उनका उपचार करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से एम्स लाया गया था। महाराज ने अपने विधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल में जंगली जानवरों के हमलों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल से वार्ता कर लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ बढ़ती घटनाओं का अध्ययन कर उनसे सभी तरह के ऐतिहाती कदम उठने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जानवरों के स्वभाव में बदलाव आने के कारण वह खूंखार हो रहे हैं। इसके अलावा इस बार अत्यधिक बरसात होने के कारण उनके रहने के स्थान पर नमी होने की वजह से वह सर्दियों दीर्घ निद्रा नहीं ले पा रहे हैं। जंगलों में भोजन की कमी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है,जिस कारण वह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का रुख कर लोगों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण से अपील की है कि वह कहीं भी अकेले ना जाएं और अपनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें।

Rupesh Negi

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