यूकेएसएसएससी परीक्षा पेपर लीक मामले मे पुलिस ने मुख्य आरोपी खालिद को किया गिरफ्तार, पेपर लीक प्रकरण में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित।
देहरादून– 21 तारीख को हुए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से जुड़े पेपर लीक मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी खालिद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने खालिद की बहन साबिया को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है ।
तफ्तीश में आरोपी ने बताया कि वह परीक्षा शुरू होने से एक दिन पहले यानी 20 तारीख को चोरी-छिपे परीक्षा केंद्र में पहुंचा था जहाँ उसके द्वारा छुपाकर मोबाइल फोन रखा गया था। उस फोन के जरिए ही परीक्षा पत्र की तस्वीरें खींच ली गईं और वे तस्वीरें खालिद ने अपनी बहन साबिया को भेज दीं। पुलिस के अनुसार साबिया ने ये तस्वीरें टिहरी जिले में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भेजकर प्रश्नों के उत्तर मंगवाए थे।
पुलिस का यह भी कहना है कि सुमन को शक होने पर उसके द्वारा वह तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें फैलने और गिरफ़्तारी के डर से मुख्य आरोपी खालिद दिल्ली भाग गया। पुलिस ने बाद में रायपुर क्षेत्र से उसे गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ जारी है।
मामले की पारदर्शी छानबीन के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि एसआईटी जल्द एक आधिकारिक ईमेल आईडी और टोल-फ्री मोबाइल नंबर भी जारी करेगी
एक बड़ी गुत्थी यह भी बनी हुई है कि परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगे होने के बावजूद तस्वीरें किस तरह बाहर भेजी जा सकीं। पुलिस कह रही है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगा।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक मामले में उत्तराखंड सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एसआईटी के गठन की घोषणा की है। एसआईटी एक महीने के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इस बीच जांच पूरी होने तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड में पेपर लीक प्रकरण एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इस मामले को लेकर विपक्ष और तमाम युवा लगातार सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। आपको बता दें कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने एसआईटी गठन की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है। यह SIT हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज के सुपरविजन में काम करेगी। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टीम को एक माह के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। मुख्य सचिव ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक 21 सितंबर को हुई परीक्षा की प्रक्रिया रोक दी गई है और परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये कदम पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में उठाया गया है, ताकि छात्रों के हित को सर्वोपरि रखा जाए। अब आदेश जारी कर दिए गए हैं और SIT तुरंत काम शुरू करेगी।
उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा, 2025 में कथित नकल के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष अन्वेषण दल (SIT) गठित किया गया है। यह दल मामले की समुचित जांच करेगा और एक माह के भीतर शासन को अपनी आख्या प्रस्तुत करेगा।
विशेष अन्वेषण दल (SIT) में निम्नलिखित अधिकारी शामिल होंगे:
अध्यक्ष: जया बलूनी, पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण, देहरादून
सदस्य: अंकित कंडारी, क्षेत्राधिकारी, देहरादून
सदस्य: लक्ष्मण सिंह नेगी, निरीक्षक, स्थानीय अभिसूचना इकाई, देहरादून
सदस्य: गिरीश नेगी, उप निरीक्षक / थानाध्यक्ष, रायपुर, देहरादून
सदस्य: राजेश ध्यानी, उप निरीक्षक, साईबर पुलिस स्टेशन, देहरादून।
अध्यक्ष समय-समय पर यथासम्भव अन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का सहयोग भी ले सकते हैं। विशेष अन्वेषण दल का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण प्रदेश होगा और यह विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचना, शिकायत, तथ्य आदि का परीक्षण करेगा।
इस दल द्वारा मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी, और एक माह के भीतर इसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। शासन इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

