उत्तराखंड में मानसून ने मचाई तबाही, भारी जान माल का नुकसान,अगस्त में हुई देश में सबसे ज्यादा 320 मिलीमीटर बारिश।

उत्तराखंड में मानसून ने मचाई तबाही, भारी जान माल का नुकसान,अगस्त में हुई देश में सबसे ज्यादा 320 मिलीमीटर बारिश।
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देहरादून– मानसून सीजन में इस साल उत्तराखंड में बादल फटने और लैंडस्लाइड की कई घटनाएं सामने आईं हैं जिसमें जान माल का भारी नुकसान हुआ है बड़ी बात यह है कि इस साल मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 16 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई हैं जिसने आम जनजीवन को काफी हद तक प्रभावित भी किया है जबकि आने वाने दिनों में अभी और बारिश की संभावना जताई जा रही हैं।

उत्तराखंड में इस साल मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी जिसके बाद से प्रदेश में लगातार काफ़ी बारिश देखने को मिली, हालांकि ज्यादातर जगहों पर बारिश आफत बनकर इस तरह से बरसी है कि उसके आगे जो आया सब कुछ तबाह हो गया है। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही 29 जून को सबसे पहले यमुनोत्री मार्ग पर सिलाई बैंड के पास एक बादल फटने की घटना सामने आई जिसमें जान और माल दोनों का नुकसान हुआ हालांकि इस घटना के बाद पूरे जुलाई महीने में बारिश में काफी हद तक कमी आई और सामान्य से करीब 9 फ़ीसदी बारिश कम दर्ज की गई लेकिन अगस्त महीने में उत्तराखंड में हुई बारिश ने देश के सभी राज्यों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और अगस्त महीने में अब तक उत्तराखंड में सबसे ज्यादा 320 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है।

उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के कुछ ही दिनों बाद सबसे पहले यमुनोत्री मार्ग पर सबसे पहले बादल फटने की घटना सामने आई जिसमें दो मजदूरों की मौत हुई और 7 मजदूर अभी भी लापता है, इसके बाद उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से भारी तबाही हुई जिसमें 5 लोगों की मौत हुई और 60 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं वही धराली के बाद चमोली के थराली और पौड़ी में भी बादल फटने की घटना सामने आई जिसमें चार लोग लापता बताए जा रहे हैं जबकि एक महिला की मौत की भी पुष्टि हुई है, बादल फटने की घटनाओं के साथ-साथ प्रदेश में बारिश के कारण कई जगह बाढ़ जैसे हालात भी बने हैं जबकि पहाड़ों में लैंडस्लाइड की घटनाएं भी देखने को मिली है बड़ी बात यह है कि इन आपदाओं में जान और माल, जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया जिसमे काफ़ी नुकसान हुआ है जिसका आकलन किया जा रहा है।

Rupesh Negi

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