हरिद्वार में खुली पहचान की पोल, गुप्ता चार्ट भंडार की निकली असली पहचान, श्रद्धालुओं की आस्था के साथ धोखा।

हरिद्वार में खुली पहचान की पोल, गुप्ता चार्ट भंडार की निकली असली पहचान, श्रद्धालुओं की आस्था के साथ धोखा।
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हरिद्वार–

हरिद्वार के नारसन बॉर्डर पर खुली पहचान की पोल, गुप्ता चार्ट भंडार की असली पहचान निकली गुलफाम!

हरिद्वार के प्रवेश द्वार नारसन बॉर्डर पर एक दुकान की असली पहचान छुपाने का मामला सामने आया है। ‘गुप्ता चार्ट भंडार’ नाम से संचालित इस दुकान पर जब श्रद्धालुओं ने खरीदारी के बाद स्कैनिंग की, तो उसमें मालिक का नाम गुलफाम निकला।

इससे न सिर्फ ग्राहकों में भ्रम की स्थिति बनी, बल्कि धार्मिक भावना को लेकर भी नाराजगी देखी गई।

गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा से पहले ही पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि कोई भी दुकान या प्रतिष्ठान अपनी पहचान न छुपाए।

ऐसे में दुकान का नाम बदलकर कार्य करना कहीं न कहीं श्रद्धालुओं की आस्था के साथ धोखा माना जा रहा है।

अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर धार्मिक यात्रा मार्ग पर ऐसी गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?

 

 

 

 

कावड़ यात्रा को लेकर धामी सरकार का बड़ा ऐलान कावड़ यात्रा में लगने वाली खाने पीने की दुकानों पर फूड लाइसेंस हुआ अनिवार्य …थूक जिहाद पर भी सरकार की नजर।

हरिद्वार में 11 जुलाई से शुरू हो रही कावड़ यात्रा को लेकर धामी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कावड़ यात्रा के दौरान लगने वाले खाने-पीने की दुकानों के लिए फूड लाइसेंस को अनिवार्य कर दिया है सरकार ने इस संबंध में फैसला लेते हुए साफ किया है कि अगर खाने-पीने की दुकानों पर फूड लाइसेंस नहीं मिला तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, सरकार ने यह फैसला अलग-अलग राज्यों से उत्तराखंड पहुंचने वाले कांवड़ियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों से प्रदेश में कई कांवड़िए आते हैं जिनकी सेहत का ख्याल रखना सरकार की प्राथमिकता है।

11 जुलाई से शुरू होने वाले कावड़ यात्रा में इस बार लगभग 4 करोड़ शिव भक्तों के आने की उम्मीद है इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद हरिद्वार में एक बड़ी बैठक की जिसमें अधिकारियों के साथ-साथ हरिद्वार के व्यापारी भी मौजूद रहें। उत्तराखंड सरकार अपने कुछ पुराने फैसलों को लेकर पहले भी चर्चा में रही है फिर उसमें अवैध मदरसे और मस्जिदों के खिलाफ अभियान हो या फिर यूसीसी कानून, साल 2024 में कावड़ यात्रा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने कावड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदारों को भले ही नाम लिखने की छूट देती हो लेकिन उत्तराखंड सरकार ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि दुकानदारों को अपनी दुकान पर फूड लाइसेंस लिखना होगा और यह बात भी साफ है कि फूड लाइसेंस के साथ फूड लाइसेंस धारक का नाम भी लिखना पड़ेगा।

 

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि कावड़ यात्रा में आने वाले करोड़ों श्रद्धालु बड़ी आस्था के साथ यहां पर आते हैं हम नहीं चाहते कि यहां पर उनके साथ उनकी पवित्रता के साथ कोई भी खिलवाड़ हो इसलिए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है कि दुकानदारों को अपनी दुकान के आगे फूड लाइसेंस लिखना अनिवार्य होगा अगर ऐसा वह नहीं करते तो उनके खिलाफ जुर्माने का प्रावधान लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बयान दिया तो उनके सहयोगी मंत्रियों के भी बयान आने शुरू हो गए उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री गणेश जोशी ने सरकार के इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कुछ भी फैसला लिया है वह बिल्कुल सही है अगर मैं गणेश जोशी हूं तो मैं गणेश खान नहीं लिख सकता राज्य में बीते कुछ सालों में ऐसी घटनाएं हुई है जिसके बाद इस तरह के फैसले लेना बेहद जरूरी हो गया है।

कावड़ यात्रा मार्ग पर दुकानदार भी सरकार के फैसले से संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं स्थानीय दुकानदार का कहना है कि आधार कार्ड के साथ अगर दुकान का नाम लिखने का फैसला सरकार ने लिया है तो इसमें कोई गलत बात नहीं है कावड़ यात्रा है और ऐसे में सभी चीज पारदर्शी होनी चाहिए हालांकि उत्तराखंड के ऋषिकेश और हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम सभी धर्म के लोग इस यात्रा में शामिल होकर अपनी भागीदारी देते आए हैं।

अब देखना होगा राज्य सरकार का यह फैसला कैसे लागू होगा क्योंकि साल 2024 में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक फैसले को लेकर नोटिस जारी किया था इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने इस बार भले ही नाम लिखने का फरमान पहले देकर बाद में वापस ले लिया हो लेकिन अब फूड लाइसेंस को दुकान के बाहर लिखना और आधार कार्ड साथ रखना यह कितना कारगर होगा यह तो समय बताएगा।

Rupesh Negi

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