उत्तरकाशी में बिगड़ रहा है सांप्रदायिक माहौल? हिंदू संगठनों ने सीएम से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन, सीमांत जनपद में अवैध तरीके से मस्जिद निर्माण करने का लगाया आरोप।
उत्तरकाशी– उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य हिमाचल में पिछले दिनों मस्जिद के नाम पर जो हंगामा हुआ, वो सबने देखा है। ऐसा ही मामला अब राज्य के सीमांत जनपद उत्तरकाशी में भी नजर आ रहा है। जहां अवैध तरीके से बन रही मस्जिद पर रोक लगाने के लिए हिन्दू संगठनों ने जिला प्रशासन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की है। वहीं अब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से मुलाकात कर उनको ज्ञापन सौंपा गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय उत्तरकाशी के 100 मीटर की दूरी पर, बगैर कोई नक्शा पास करवाए, निजी भूमि पर अवैध रूप से आवासीय भवन निर्मित किया गया है, उक्त आवासीय भवन, मुस्लिम वर्ग के लोगों की निजी भूमि पर निर्मित है, उक्त भवन में, बड़ी अधिक संख्या में बाहरी अजनबी लोगों की भीड़ जुटाई जाने लगी है, जिसके कारण उत्तरकाशी देवभूमि का माहौल अशांत और चिंताजनक बना हुआ है व उत्तरकाशी मूल का जनमानस आक्रोषित है। इस पूरे प्रकरण की जिला प्रसाशन से लिखित जानकारी प्राप्त है, कि उक्त स्थल पर मस्जिद के नाम पर, कोई भी भूमि मौजूद नहीं है। जबकि, उक्त भूमि का दाखिला खारिज भी नियम विरुद्ध हुआ है, वर्ष 2004-05 में दाखिला खारिज प्रक्रिया जब गतिमान थी, तब से 15 वर्ष पूर्व, विक्रेता सरदार सिंह का निधन हो चुका था और मृतक के नाम उक्त भूमि वर्ष 1991 के बाद कागजात माल में दर्ज नहीं थी, किन्तु फिर भी उक्त मृतक ब्यक्ति के विरुद्ध, चुपके से षड़यंत के तहत एक वाद (मुकदमा) चलाया गया था, जबकि मृतक व्यक्ति के दोनों पुत्र उस वक्त जीवित थे और भूस्वामी दर्ज थे, लेकिन उक्त दाखिला खारिज प्रक्रिया के वक्त, दोनों भूमि मालिकों को व उनके परिवार के सदस्यों को और उनके गांव के जन प्रतिनिधियों को सूचित तक नहीं किया गया था।

भू अधिनियम, फाइल के अवलोकन से पूरी साजिस को समझा जा सकता है, वादीगण एवं तत्कालीन अधिकारियों ने सोची समझी रणनीति के तहत, 15 वर्ष पूर्व मर चुके शख्स को संबंधित फाइल के भीतर मात्र कागजों में प्रतिवादी बनाया है और 6 महीने तक न्यायालय में पुकार लगने पर मृतक व्यक्ति जब आपत्ति करने नहीं उपस्थित हुआ, तो एक पक्षीय फैसला किया गया था, क्योंकि भूमि के मालिक व परिवार के सदस्यगण, उक्त दाखिल खारिज के पक्ष में कभी नहीं थे, यही वजह थी, कि उक्त प्रक्रिया को संबंधित परिवार जनों से छुपा कर, पूरी साजिश को अंजाम दिया गया था, भू स्वामियों के दादाजी व पिता ने अपने जीते जी 36 वर्षों तक दाखिला खारिज प्रक्रिया के लिए हमेशा इंकार किया था व इसको कभी होने नहीं दिया था, क्योंकि गांव के पुराने लोग बताया करते थे, कि वर्ष 1969 में उनके साथ कपट हुआ था और धोखे से सम्पूर्ण पांच नाली भूमि का बैनामा लिखवाया गया था, इसी कारण उनकी मौत के 36 साल बाद वर्ष 2004-2005 में, तत्कालीन भू स्वामियों और परिवार जनों को सूचित किये बगैर, चोरी छुपे, उक्त दाखिल खारिज किया गया था दाखिला खारिज प्रक्रिया वाद फैसले में साफ अंकित है, कि संबंधित भूमि पर, भवन निर्मित था, जिसे जान बूझकर मस्जिद लिखा गया है, जबकि उक्त निर्मित भवन को नजर अंदाज करके, मात्र भूमि का ही दाखिला खारिज किया जाना भी साजिश का हिस्सा था।
अवैध रूप से बने उक्त निजी भवन पर, अवैध रूप से चल रही गतिविधि पर व वहां भीड़ जुटने पर, पूर्ण रोक लगवाई जाए एवं बाहरी राज्यों से आए घुसपैठियों / अवैध कब्जा धारियों और फेरी के नाम पर, बाहरी अजनबी लोगों का, हमारे दूरस्त ग्रामीण इलाकों में घुसने पर रोक लगवाई जाये। बार बार जिला प्रशासन को सूचना देने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होने के बाद अब हिन्दू संगठनों ने 24 अक्टूबर को एकजुट होकर उत्तरकाशी में रैली निकालने का फैसला किया है।

