नैनीताल में बाढ़ जैसे हालात क्यों बने,निकासी गेट बंद क्यों मिले, व्यापारी नाराज़,

नैनीताल में बाढ़ जैसे हालात क्यों बने,निकासी गेट बंद क्यों मिले, व्यापारी नाराज़,
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उत्तराखंड के नैनीताल में बाढ़ जैसे हालात का जिम्मेदार कौन , नैनीझील के चारो ओर पानी सड़कों में पानी भर गया।

जिसके कारण चारों तरफ बाढ़ के हालात बन गए और तल्लीताल में मॉल रोड और मल्लीताल में नयना देवी मंदिर जलमग्न हो
गया। बाढ़ से हुए नुकसान से नाराज व्यवसायी अब बन्द गेट का सच बताने ओर  जांच की मांग कर रहे हैं।
अधिकारी पानी की अत्यधिकता और निकासी गेट छोटा बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं

17 अक्टूबर को हुई बारिश के कारण 18 की सुबह आठ बजे तक 90 मिलीमीटर  बरसात नापी गई थी। इसके
बाद लगातार हो रही बारिश से  24 घंटों में रिकॉर्डतोड़ बारिश हुई,
इन 24 घंटो में 445 एम. एम.  हो गई। 19 अक्टूबर की दोपहर को बारिश हल्की हुई , कंट्रोल रूम में भी पानी भर गया है और ऑफिस से सभी कर्मचारी नदारद रहे, यहां देखने में पाया गया कि मशीन ऑटोमोड से हटाकर मेन्युअल कर दी गई, जिसके कारण गेट बंद रह गए। पानी दोनों स्काडा गेटों के ऊपर से होकर बहने लगा
और फिर जहां देखो पानी ही पानी है।

नैनीताल में बाढ़ का  बड़ा कारण भी रहा की, इस झील में काफी
बड़ी मात्रा में सिल्ट (मलुवा) भर गया है, जिससे यहाँ पानी थमने की क्षमता बहुत कम रह गई है। बीते लगभग 7- 8 वर्षों से झील से मलुवा निकालने का काम नहीं हुआ है। एक कारण नैनीताल के चारों तरफ बनी 79 किलोमीटर की रोड का सी. सी. होना भी है। पहले इन कच्ची सड़कों में पानी रीस कर जाता था और फ़्लैश फ्लड से पानी झील में नहीं जाता था। अब सीधे झील में बड़ी मात्रा में पहुंच जाता है जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा होते हैं।

नैनीताल में बाढ़ जैसे हालात देखकर पर्यटकों ने अपनी बुकिंग कैंसिल कर दी , बुकिंग केंसिल होने से नाराज होकर मामले की जांच की मांग की है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह ने कहा कि ब्रिटिश काल मे 7 गेट हुआ करते थे और अब इन्हें कम करके 2 में सीमित कर दिया गया है, वो भी बंद थे। इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए ।

सम्बधित अधिकारी से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि बरसात अत्यधिक हो गई जिसके कारण झील में अधिक पानी आ गया और यहां से निकासी हल्के हल्के हो पाई। अब स्थिति नियंत्रण में है।

Rupesh Negi

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