160 दिन बाद खत्म हुआ नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना, पानी की टंकी से उतरे आंदोलनकारी।

160 दिन बाद खत्म हुआ नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना, पानी की टंकी से उतरे आंदोलनकारी।
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देहरादून– 160 दिन बाद खत्म हुआ नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना, पानी की टंकी से उतरे आंदोलनकारी, सरकार के लिखित आश्वासन के बाद स्थगित हुआ आंदोलन, एक महीने तक सरकार की पहल पर रहेगी नजर।

राजधानी देहरादून में पिछले 160 दिनों से नरसिंह एकता मंच के बैनर तले चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन आखिरकार फिलहाल स्थगित हो गया। वहीं बीते करीब 60 घंटे से परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ी ज्योति रौतेला और अन्य नर्सिंग अभ्यर्थी भी लंबी जद्दोजहद के बाद नीचे उतर आए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने मध्यस्थता की पहल की। इसके तहत सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी को परेड ग्राउंड भेजा गया, जहां आंदोलनरत अभ्यर्थियों से बातचीत की गई। इस दौरान डीजी हेल्थ की ओर से शासन को भेजे गए प्रस्ताव की लिखित जानकारी आंदोलनकारियों को दी गई और धरना समाप्त करने का आग्रह किया गया।

डीजी हेल्थ द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में तीन अहम निर्णय शामिल किए गए। पहला, नर्सिंग अधिकारियों की वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को अंतिम बार वर्षवार आधार पर पूरा किया जाएगा, ताकि लंबे समय से भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके। दूसरा, भविष्य में होने वाली भर्तियों में न्यूनतम दो वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके। तीसरा, चयन प्रक्रिया में यह प्रावधान जोड़ा जाएगा कि सेवा के दौरान मरीजों के जीवन से किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलनकारी संतुष्ट नजर आए। इस मौके पर गणेश गोदियाल समेत कई कांग्रेसी नेताओं और नर्सिंग अभ्यर्थियों ने टंकी पर चढ़े आंदोलनकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। हालांकि आंदोलनकारियों ने साफ किया कि धरना केवल एक महीने के लिए स्थगित किया गया है। यदि सरकार ने तय बिंदुओं पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को फिर उग्र रूप से शुरू किया जाएगा।

 

नर्सिंग अधिकारियों की मुख्य मांगे जो सरकार द्वारा मानी गई।

1- नर्सिंग अधिकारियों की वर्तमान भरती प्रक्रिया को अंतिम बार वर्ष भर के आधार पर पूर्ण किया जाए ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे शेष अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

 

2- भविष्य की भर्तियों में न्यूनतम 2 वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य किया जाए जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता में सुधार आए।

3- चयन प्रक्रिया में यह प्रावधान जोड़ा जाए की सेवा के दौरान मरीजों के जीवन के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

Rupesh Negi

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