ओपन एआई के सहयोग से यूपीईएस बना ‘एआई-फर्स्ट’ कैंपस शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव को बदलने के लिए चैटजीपीटी एजुकेशन को अपनाया।

ओपन एआई के सहयोग से यूपीईएस बना ‘एआई-फर्स्ट’ कैंपस  शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव को बदलने के लिए चैटजीपीटी एजुकेशन को अपनाया।
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देहरादून– यूपीईएस विश्वविद्यालय ने मंगलवार को घोषणा की कि ओपन एआई के सहयोग से वह अब एक ‘एआई-फर्स्ट’ विश्वविद्यालय बन गया है। संस्थान अब ऐसा एआई ढांचा उपलब्ध कराएगा जो सुव्यवस्थित, सबके लिए समान रूप से सुलभ और परिणामों के आधार पर मापा जा सके, ताकि शिक्षण,सीखने, शोध और छात्र अनुभव में बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें। यूपीईएस अपने कैंपस में चैटजीपीटी एजु लागू करेगा, जिससे जेनरेटिव एआई को संस्थान की मुख्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा और सभी छात्रों, ​शिक्षकों व स्टाफ सदस्यों को इसका निःशुल्क उपयोग मिल सकेगा। चैटजीपीटी एजु, ओपन एआई की शिक्षा के लिए बनाई गई योजना है, जिसे जिम्मेदारी पूरे विश्वविद्यालय स्तर पर लागू करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें संस्थागत एडमिन, नियंत्रण और एंटप्राइज, ग्रेड सुरक्षा उपलब्ध है। यूपीईएस में इसका उपयोग इस बात को बदलेगा कि सीखने की पूरी व्यवस्था में एआई को किस तरह से शामिल किया जाता है। यह उच्च ​शिक्षा संस्थानों के लिए एक नई और मजबूत दिशा तय करेगा। इस दौरान छात्र अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक और विषय विशेष एआई क्षमता विकसित कर सकें। जिससे छात्र-छात्राओं को प्लेसमेंट के दौरान नई नौकरियों का अवसर मिल सकेगा। यूपीईएस वाइसचांसलर डॉ. सुनीलराय ने कहा कि हमें खुशी है कि हम भारत के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हैं,जो इस स्तर पर एक सुव्यवस्थित, पूरे कैंपस में लागू होने वाली जेन एआई व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं,जहां एआई को कुछ अलग-अलग प्रयोगों की तरह नहीं, बल्कि शिक्षा और सेवाओं की मुख्य संरचना के रूप में देखा जा रहा है।हम एक ऐसे एआई-फर्स्ट विश्वविद्यालय का निर्माण कर रहे हैं, जहां,एआई सीखने, पढ़ाने, शोध और छात्र जीवन के हर हिस्से में स्वाभाविक रूप से जुड़ा होगा । एआई साक्षरता पहले दिन से हर छात्र, हर शिक्षक और कैंपस की हर प्रक्रिया की बुनियादी नींव होगी। हेड ऑफ एजुकेशन – इंडिया एंड एशिया-पैसिफिक, ओपन एआई राघवगुप्ता ने कहा कि भारत में चैटजीपीटी का उपयोग करने वाले छात्रों का समुदाय पहले ही दुनिया में सबसे बड़ा है। देश में जैसे-जैसे एआई टूल्स का उपयोग और गहराई से होगा, रोजमर्रा के पढ़ाई के हिस्सा बन जाएगा। यूपीइएस की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह एआई को शैक्ष​णिक अनुभव का एक हिस्सा बनाएगी,जिससे एआई प्रधान दुनिया में नौकरी के लिए तैयारी बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीईएस केवल एक भविष्य की तकनीक को अपना ही नहीं रहा, ब​ल्कि भारतीय ​शिक्षा में एक नया मानक स्थापित कर रहा है। घोषणा के दौरान यूपीईएस विश्वविद्यालय के तमाम लोग मौजूद रहे।

Rupesh Negi

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