सेलाकुई सिडकुल में सिक्योरिटी गार्डों का शोषण, 12-12 घंटे ड्यूटी के बावजूद मामूली वेतन
देहरादून– राजधानी देहरादून के औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई सिडकुल से श्रमिक शोषण की गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहां तैनात सिक्योरिटी गार्डों ने अपनी कार्य परिस्थितियों को लेकर नाराज़गी जताई है। उनका आरोप है कि उनसे लगातार 12-12 घंटे की ड्यूटी कराई जा रही है, वह भी बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के। इतना ही नहीं, कई गार्डों का कहना है कि उन्हें महीने भर बिना छुट्टी के काम करना पड़ता है, जिसके बदले मात्र 14 से 16 हजार रुपये का वेतन दिया जा रहा है।
गार्डों के अनुसार, काम का दबाव इतना अधिक है कि उन्हें शारीरिक और मानसिक थकान का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो उन्हें पर्याप्त आराम मिलता है और न ही किसी प्रकार की सुविधा। अगर कोई गार्ड बीमार हो जाता है और छुट्टी लेने की कोशिश करता है, तो उसे राहत देने के बजाय सीधे वेतन में कटौती कर दी जाती है। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
सुरक्षा गार्डों का यह भी आरोप है कि कई निजी सुरक्षा एजेंसियां श्रम कानूनों की अनदेखी कर रही हैं। न्यूनतम वेतन, निर्धारित कार्य समय और साप्ताहिक अवकाश जैसे बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों को न तो ओवरटाइम का उचित भुगतान मिलता है और न ही किसी प्रकार का बीमा या सामाजिक सुरक्षा लाभ दिया जाता है।
इस स्थिति के कारण गार्डों का जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है। कम वेतन और अत्यधिक काम के चलते वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को भी पूरा करने में असमर्थ हैं। कई गार्डों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में इस तरह की परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास रोजगार के सीमित विकल्प हैं।
स्थानीय श्रमिक संगठनों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। संगठनों ने श्रम विभाग से अपील की है कि वह सिडकुल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों की जांच कराए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करे।
वहीं, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बढ़ते दबाव के बीच उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएगा।
सेलाकुई सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले सुरक्षा गार्डों की स्थिति एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या श्रम कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह मुद्दा और गंभीर रूप ले सकता है।


