शिक्षण संस्थान को दी गई जमीन पर भाजपा का हमला, आईएमए की सुरक्षा के लिए खतरा, जमीन तत्काल सरकार में निहित हो।
देहरादून– भाजपा ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मुस्लिम शिक्षण संस्थान के लिए दी गई जमीन को भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उसे तत्काल सरकार में निहित करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह पूरा मामला मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की मंशा और सुनियोजित साजिश से जुड़ा हुआ है।
पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा के वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि मीडिया में सामने आए खुलासों से एक बार फिर कांग्रेस और उसकी सरकारों की मंशा उजागर हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में तिवारी सरकार के दौरान सहसपुर के धौलास क्षेत्र में लगभग 100 बीघा जमीन मोहम्मद मदनी को शिक्षण कार्य के नाम पर लीज पर दी गई थी। बाद में इस भूमि का लैंड यूज बदलने के प्रयास किए गए, जिस पर आपत्तियां दर्ज हुईं और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
उन्होंने कहा कि मामला खारिज होने के बावजूद भूमाफियाओं द्वारा पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की जा रही थी। फिलहाल एमडीडीए ने कार्रवाई करते हुए भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है, लेकिन इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
उन्होंने तत्कालीन और बाद की कांग्रेस सरकारों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या इसी जमीन पर मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सहसपुर क्षेत्र में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोलने की बात सामने आई थी, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की देखरेख में आगे बढ़ी। भाजपा के विरोध और चुनाव में जनता द्वारा कांग्रेस को नकारे जाने के बाद यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।
उन्होंने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि भूमाफियाओं द्वारा इस जमीन को हड़पने की कोशिश की जा रही थी। शासन-प्रशासन द्वारा दिखाई गई तत्परता की सराहना करते हुए उन्होंने मांग की कि भूमि को तत्काल सरकार के कब्जे में लिया जाए।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आईएमए परिसर से सटा हुआ और अत्यंत संवेदनशील है। पहले भी सेना की ओर से इस भूमि को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। अब स्थिति स्पष्ट होने के बाद भूमि आवंटन को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह मामला बताता है कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए कांग्रेस से राज्य को निजात दिलाना जरूरी है। कांग्रेस के प्रभावी रहने पर राज्य की डेमोग्राफी और धार्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप पर खतरा पैदा हो सकता है।


