नौकरी मिली पहाड़ की, खेल हुआ मैदान का, ‘जुगाड़’ पर उतरे नव-नियुक्त शिक्षक, शिक्षा विभाग हुआ सख्त।
देहरादून– उत्तराखंड में जिन स्कूलों तक शिक्षक पहुंचना नहीं चाहते, वहीं पढ़ाने के नाम पर सरकार ने भर्तियां कीं। लेकिन नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही कहानी बदल गई। प्रोबेशन अवधि शुरू होने से पहले ही कुछ नव-नियुक्त शिक्षक मनचाही तैनाती के लिए जुगाड़ में लग गए। कहीं आवेदन, कहीं फोन, कहीं सिफारिश तो कहीं सीधे अटैचमेंट का दबाव। हालात ऐसे बने कि विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय को कड़ा आदेश जारी करना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रोबेशन पर तैनात कई शिक्षक अपनी मूल तैनाती से हटने के लिए अलग-अलग स्तरों पर दबाव बना रहे थे। जिनकी नियुक्ति दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के लिए हुई, वही शिक्षक मैदान की ओर रास्ता तलाशते नजर आए। यह सिलसिला बढ़ा तो पढ़ाई से ज़्यादा फाइलें चलने लगीं और स्कूलों में फिर से शिक्षक संकट गहराने लगा।
इस पूरे मामले पर महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा डॉ. दीप्ति सिंह ने दो टूक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रमोशन पूरा किए बिना न ट्रांसफर होगा, न अटैचमेंट। नियमों के खिलाफ दबाव बनाने या सिफारिश कराने वालों को चिन्हित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनका साफ कहना है कि शिक्षा विभाग की रैंकिंग गिरने की एक बड़ी वजह गलत तैनाती और शिक्षको की कमी रही है। नई भर्तियां इसी कमी को दूर करने के लिए की गई थीं, न कि जुगाड़ का नया रास्ता खोलने के लिए।
प्रमोशन में रहते ट्रांसफर/अटैचमेंट की कोशिशें सीधे नियमों का उल्लंघन
प्रतिनियुक्ति पर तैनात शिक्षक भी बैकडोर एंट्री तलाश रहे थे
इससे शैक्षणिक कामकाज और विभागीय व्यवस्था दोनों प्रभावित
प्रमोशन का असली मकसद,मैदान में सेवा, खत्म करने की कोशिश
ऐसे मामलों की रिपोर्ट अब सीधे उच्च अधिकारियों तक जाएगी
28 जनवरी को देहरादून में 1035 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए। मंच से पहाड़ के बच्चों के भविष्य की बात हुई। लेकिन कुछ ही दिनों में सामने आया कि कुछ शिक्षक नौकरी को सेवा नहीं, सुविधा समझ बैठे।
जब नियुक्ति पहाड़ के लिए हो, तो जॉइनिंग के साथ ही मैदान क्यों? क्या शिक्षा व्यवस्था फिर से ‘सिफारिश सिस्टम’ के हवाले की जा रही थी? शिक्षा महानिदेशालय ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है, अब देखना यह है कि नियम भारी पड़ते हैं या जुगाड़।


