बेतुकी बयानबाज़ी, भगवान शिव के भरोसे वन विभाग, बढ़ते मानव वन्य जीव संघर्ष थम जाएं, HOFF रंजन मिश्रा करेंगे भगवान शिव से प्रार्थना।

बेतुकी बयानबाज़ी, भगवान शिव के भरोसे वन विभाग, बढ़ते मानव वन्य जीव संघर्ष थम जाएं, HOFF रंजन मिश्रा करेंगे भगवान शिव से प्रार्थना।
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देहरादून– उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले ने गढ़वाल और कुमाऊं सभी क्षेत्रों में दहशत पैदा की हुई है, लंबे समय से इन हमलों की वजह से कई लोगों की मौत हुई है, जंगली जानवरों के हमलों में कई लोग घायल भी हुये हैं, आलम यह है कि अब स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी डर के साये में स्कूल जाने को मजबुर हैं आये दिन स्कूलों से बच्चों पर जंगली जानवरों के हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

गढ़वाल में सबसे अधिक भालू के हमले देखे जा रहे हैं, 22 दिसम्बर को चमोली जिले के एक छात्र को भालू उठाकर ले गया, यह कोई पहला मामला नहीं है, आंगन में खेल रहे बच्चे, खेत में काम कर रही बुजुर्ग महिला, घर को लौट रहे पुरुषों पर अक्सर जंगली जानवर रोजाना हमले कर रहे हैं, रुद्रप्रयाग जिले में 3 महीने के भीतर 20 लोगों पर भालू हमला कर चुका है, आलम यह है कि अब भालुओं के हमले को देखते हुए वन विभाग स्कूली बच्चों को एस्कॉर्ट कर रहा है।

इसी तरह से बात अगर चमोली जिले की करें तो यहां भालू एक व्यक्ति को अपना निवाला बन चुका है, कई लोगों को घायल भी कर चुका है, बदरीनाथ वन प्रभाग में भी दो लोगों को भालू अपना शिकार बना चुका है, 14 लोग इसके हमले में घायल हुये हैं। भालुओं के हमले की घटना उत्तरकाशी में भी बेहद चिंताजनक है, यहां अब तक 15 लोगों पर भालू हमला कर चुका है, जिनमे दो लोगों की मौत भालू के हमले से हुई है।

वंही पौड़ी जिले में भालू के हमले की 12 घटनाएं सामने आई हैं, यहां हैरानी की बात यह है कि इंसानों के साथ-साथ पालतू जानवरों को भी भालू अपना निवाला बन रहा है, एक व्यक्ति की मौत के साथ-साथ 50 जानवरों को भालू अब तक मौत के घाट उतार चुका है।

मानव वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों पर वन विभाग के अधिकारी केवल लीपापोती करने का काम कर रहे हैं वहीं इस बीच वनविभाग के अधिकारी रंजन कुमार मिश्रा का बेतुका बयान सामने आया है।  हेड ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रंजन कुमार मिश्रा ने इस मामले पर कहा कि वह भगवान शिव से यह प्रार्थना करेंगे कि मानव वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामले किसी तरह थम जाएँ ग़ौरतलब है कि यदि इस मामले का निपटारा भगवान द्वारा ही किया जाना है तो उत्तराखंड में वन विभाग की ज़रूरत ही क्या है?

Rupesh Negi

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