भारतीय सेना को मिले 491 सैन्य अधिकारी, मित्र देशों के 34 कैडेटों ने लिया भाग।
देहरादून– भारतीय सैन्य अकादमी में शनिवार को चेटवुड इमारत की ड्रिल स्कवायर में आयोजित पासिंग आउट परेड के निरीक्षण अधिकारी भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी रहे। भारतीय थल सेना के अध्यक्ष जनर उपेंद्र द्विवेदी ने आईएमए में कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि सैन्य सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि ऐसा दायित्व है जो सर्वोच्च त्याग की मांग करता है। इस दौरान थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बतौर रिव्यूइंग अफसर परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर भारतीय थल सेना को 491 युवा सैन्य अधिकारी मिल गए।
पासिंग आउट परेड में 157वें रेगुलर कोर्स, 46वें टेक्निकल एंट्री स्कीम, 140वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वें स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्जाम 2023 कोर्स के कुल 525 अधिकारी कैडेट को सेना में शामिल किया गया। साथ ही, 14 मित्र राष्ट्रों के 34 विदेशी कैडेट ने भी परेड में हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ एवं स्वर्ण पदक एसीए निश्कल द्विवेदी को, द्वितीय स्थान पाने वाले बीयूओ बादल यादव को रजत पदक तथा तृतीय स्थान के लिए कांस्य पदक एसयूओ कमलजीत सिंह को दिया गया।
टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स’ में ‘मेरिट’ में प्रथम स्थान के लिए अधिकारी कैडेट जाधव सुजीत संपत और ‘टेक्निकल एंट्री स्कीम-46′ में प्रथम स्थान के लिए डब्लूसीसी अभिनव मेहरोत्रा को रजत पदक प्रदान किया गया। ‘स्पेशल कमीशन ऑफिसर कोर्स’ का रजत पदक अधिकारी कैडेट सुनील कुमार छेत्री को दिया गया। विदेशी कैडेट में ‘मेरिट’ में प्रथम स्थान बांग्लादेश के जेयूओ मोहम्मद सफीन अशरफ को मिला। ‘ऑटम टर्म’ में समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए इंफाल कंपनी को थल सेना प्रमुख बैनर प्रदान किया गया।
इस दौरान भारतीय थल सेनाध्यक्ष ने पास आउट हुए ऑफिसर कैडेट की भी सलामी लीं। भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से ऑफिसर कैडेट निष्कल द्विवेदी को सम्मानित किया गया। सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी ने बांग्लादेश के जूनियर अंडर ऑफिसर मोहम्मद शफीक अशरफ को सम्मानित किया। टेक्निकल क्रेडिट कोर्स के जाधव सुजीत संपत को रजत पदक से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही आईएमए एकेडमी 66 हजार 8 सौ युवा सैन्य अधिकारी देने का गौरव जुड़ गया। वहीं, जब से देहरादून आईएमए की स्थापना हुई, तब से भारत के मित्र देशों से करीब तीन हजार से अधिक अधिकारियों ने सैन्य प्रशिक्षण लिया है। भारत के थल सेनाध्यक्ष उपेन्द्र द्विवेदी ने कैडेटों के साथ आईएमए परिसर में लगाई पुश-अप और कैडेटों के साथ फोटो भी खिंचवाई। भारतीय थल सेना के अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का प्रशिक्षण भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से प्राप्त किया था,जहां दिसम्बर 1984 में पास आउट हुए और उन्हें उस समय स्वर्ण पदक से भी नवाजा गया। उन्होंने इससे पहले एनडीए से ट्रेनिंग ली थी और फिर आईएमए में कमीशन प्राप्त किया।
देहरादून में आईएम की स्थापना एक अक्तूबर 1932 में हुई थी। उस समय 40 कैडेट्स ने प्रतिभाग किया था। साथ ही आईएमए का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश ही नहीं विश्व की सर्वश्रेष्ठ सैन्य अकादमी में से एक है। देश की आजादी से पहले 1932 में ब्रिटिश जनरल सर फिलिप चेटवुड की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी की सिफारिश पर की गई थी। शुरूआत में 40 कैडेट्स से प्रारंभ हुई भारतीय सैन्य अकादमी में आज के समय में 1659 से अधिक कैडेट्सों को प्रशिक्षण देने की क्षमता रखती है। देहरादून भारतीय सैन्य अकादमी में भारत के पहले फील्ड मार्शल जनरल मानेकशॉ और पाक सेनाध्यक्ष जनरल मूसा भी प्रशिक्षण ले चुके हैं। 1962 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णनन ने एकेडमी को ध्वज दिया था।
आईएमए में केवल भारत के ही नहीं सिंगापुर, मलेशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका के हजारों युवाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी देश की सेवा कर रहे हैं। यहां तक कि नेपाली सेना के चार सेनाध्यक्ष इस अकादमी में प्रशिक्षण ले चुके हैं। वहीं, विदेशी सैन्यधिकारी अपने-अपने देशों में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री पद तक पहुंच चुके हैं।
देहरादून में सैन्य अकादमी के गठन होने से पहले इंग्लैंड के सैंडहर्स्ट में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता था। उसके बाद 1932 में फील्ड मार्शल सर फिलिप चैटवुड ने अकादमी का औपचारिक उद्घाटन किया और ब्रिगेडियर एलजी कोलिस एकेडमी के पहले कमांडेंट बने थे।
भारतीय सैन्य सेवा अकादमी की म्यूजियम में कई यादगार चीजें रखी गई हैं। भारतीय सैन्य अधिकारियों द्वारा साल 1962 में भारत-चीन युद्ध और 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ी कई यादगार चीजों को संजोकर रखा गया है। अकादमी की म्यूजियम में पाक सेनाध्यक्ष की नियाजी की पिस्टल भी रखी हुई है, जिसे वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कब्जे में लिया गया था।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के तहसील धूमाकोट गांव उड़ाखेत के निवासी रोहित ध्यानी की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय वडोदरा से हुई। कक्षा छह में सैनिक स्कूल घोड़ाखाल नैनीताल में सेलेक्शन हुआ। पढ़ाई के दौरान ही रोहित ध्यानी का सेलेक्शन नेशनल डिफेंस एकेडमी में हो गया। तीन साल तक इन्होंने खड़कवासला में प्रशिक्षण किया और एक साल देहरादून भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनका सपना बचपन से ही देश सेवा का रहा है, कड़ी मेहनत और लग्न के बाद यह पद हासिल किया। रोहित का बड़ा भाई भी भारतीय सेना में कैप्टन है। कैप्टन रजत ध्यानी 24वां मराठा यूनिट में लद्दाख में सेवारत हैं। पिता कान्ता प्रसाद ध्यानी भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में पंजाब नेशनल बैंक काशीपुर में कार्यरत हैं और माता कुसुम ध्यानी जसपुर में प्रिंसिपल हैं। इनकी पारिवारिक पृष्ठिभूमि ही सैन्य सेवा से रही है।
अल्मोड़ा के नैनी निवासी स्पर्श सिंह देवड़ी का बचपन से ही सपना था सैनिक बनने का, कड़ी, मेहनत और लग्न से उन्होंने 12वें प्रयास में एनडीए की परीक्षा पास करने में सफलता हासिल की। इनकी शिक्षा-दीक्षा उत्तर प्रदेश के बरेली जिला में हुई। इनके पिता राजेंद्र प्रसाद देवड़ी मीडिया क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इन्होंने तीन साल एनसीसी का प्रशिक्षण लिया और इसमें इन्होंने नेशनल मेडल प्राप्त किया। ग्रेजुएशन के बाद पढ़ाई-लिखाई में अच्छे होने के कारण इन्हें अल्मोड़ा पोस्ट आफिस में पोस्ट मास्टर के पद पर कार्य मिल गया। इसी दौरान इन्होंने एनडीए की तैयारी की और 12 वें प्रयास में सफलता हासिल की। इस दौरान उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा आर्मी के अलावा दूसरा लक्ष्य इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने बताया कि बचपन से ही फौजियों को देखकर अजीब सा रोमांच दिल में महसूस होता था। सेना से कोई पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं थी,लेकिन अपनी मेहनत से लक्ष्य हासिल कर लिया।
परेड खत्म होते समय आसमान से हेलीकॉप्टरों ने नए सैन्य अधिकारियों पर पुष्पवर्षा की। इस मौके जनरल द्विवेदी ने अपने ‘पासिंग आउट परेड’ के दौरान कमीशन प्राप्त करने वाले नए अधिकारियों के माता-पिता और अभिभावक भी मौजूद रहे।


