बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, उत्तराखंड सरकार ने प्रतिबंधित कफ सिरप और संदिग्ध औषधियों के खिलाफ प्रदेशभर में सघन अभियान।
देहरादून– केंद्र से मिले दिशानिर्देश और राज्य सरकार द्वारा एसओपी जारी होने के बाद उत्तराखंड के खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने प्रतिबंधित कफ सिरप के खिलाफ सघन निरीक्षण अभियान चलाया है। इस क्रम में मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों से 60 से अधिक सैम्पल लिये गये हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रतिबंधित कफ सिरप और संदिग्ध औषधियों के खिलाफ प्रदेशभर में सघन अभियान छेड़ दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) की संयुक्त टीमें राज्य के सभी जिलों में मेडिकल स्टोर, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।
यह कार्रवाई हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा (कफ सिरप) के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद शुरू की गई है। उत्तराखंड सरकार ने इस मुद्दे को जनस्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए त्वरित कदम उठाए हैं।
ड्रग कंट्रोलर व अपर आयुक्त FDA ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भारत सरकार की एडवाइजरी को प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। आयुक्त के निर्देशों के बाद एफ.डी.ए. की टीमों ने पूरे प्रदेश में एक साथ कार्रवाई करते हुए अब तक 63 औषधियों के सैंपल एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।
प्रदेश में कफ सिरप के सेवन से बच्चों
उन्होंने प्रदेशभर में संदिग्ध औषधियों की जांच, सैंपलिंग और बाजार नियंत्रण की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से जानकारी साझा की गई। जग्गी ने बताया कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में बीमार होने और मृत्यु की घटनाओं के बाद उत्तराखंड सरकार ने यह कदम एहतियातन और जनहित में उठाया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रदेश के हर जिले में चलाया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थिति में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों में औषधि नियंत्रण अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे सीएफटीओ, मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों से कफ सिरप के नमूने एकत्र करें और परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशालाओं को भेजें। उन्होंने कहा कि निर्माण कंपनियों से भी कच्चे माल जैसे पॉलीइथिलीन ग्लाइकॉल, सॉर्बिटॉल और अन्य रासायनिक तत्वों के सैंपल लेकर गुणवत्ता जांच की जा रही है।
बिना डॉक्टरी परामर्श बच्चों को न दें दवा
अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ने आम जनता से अपील की कि वे बिना चिकित्सक की सलाह के बच्चों को कोई भी कफ सिरप या औषधि न दें। उन्होंने कहा बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का जोखिम न लिया जाए। यदि बच्चे में सर्दी, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो केवल योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवा दें। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि अपने घरों में पहले से खुली हुई कफ सिरप या किसी भी प्रकार की दवा बच्चों को बिल्कुल न दें। उन्होंने कहा कि कई बार पुरानी या खुली दवाइयां अपनी प्रभावशीलता खो देती हैं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। ताजवर सिंह जग्गी ने बताया कि राज्य में दवाइयों के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान भी तेजी से चलाया जा रहा है। दीपावली पर्व को देखते हुए विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत राज्य की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है।


