Mock Drill पर लगा Question Mark ?आपात स्थिति की मॉक ड्रिल में सरकारी विभाग हुए पास,विपक्ष और आम जनता ने उठाया मॉक ड्रिल पर सवाल।

Mock Drill पर लगा Question Mark ?आपात स्थिति की मॉक ड्रिल में सरकारी विभाग हुए पास,विपक्ष और आम जनता ने उठाया मॉक ड्रिल पर सवाल।
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देहरादून– चारधाम यात्रा से पहले किसी भी आपात स्थिति से निपटने को लेकर गढ़वाल मंडल के तमाम जनपदों में शासन से लेकर जिला प्रशासन तक अलर्ट मोड़ पर नजर आया है। मौका था मॉक ड्रिल का जिसकी दो दिन पहले ही जानकारी तमाम विभागों को उपलब्ध करा दी गई थी। वहीं इस मॉक ड्रिल में सभी विभागों के अधिकारी कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ तय समय में काम करते हुए नजर आए। लेकिन बड़ा सवाल तब खंडा हो जाता है की पहाड़ में आपदा बता कर नही आती, ऐसे में उस समय को लेकर क्या तैयारी है। जिसको लेकर सीडीओ देहरादून का कहना है की विभाग पूरी तरह से अलर्ट है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने में रिस्पॉन्स टाइम को मिनिमम रखा जाएगा।

शासन से लेकर जिला प्रशासन तक आपदा की सूचना मिलते ही अलर्ट नजर आया। जिसकी जमकर तारीफ भी की जा रही है। लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी पर सवाल खड़ा कर दिया है।

कांग्रेस के प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट का कहना है कि पुराने आंकड़ों को उठाकर देख लिया जाए की आपदा आने की स्तिथि में हमारे विभागो के क्या हालात होते है। फिर चाहे चारधाम यात्रा की बात हो या फिर लैंडस्लाइड की, दिक्कतें सभी जगह बराबर होती है और बचाने वाला कोई नहीं।

सरकार के निर्देशों पर तमाम विभागों ने आपदा से निपटने को लेकर मॉक ड्रिल कर अपनी मुस्तैदी को बयां किया है। लेकिन विभागो के काम की असल परख तभी होती, जब बिना जानकारी के सरकार विभागो को आपात स्थिति की जानकारी देती और राहत बचाव कार्य के समय की जांच करती।

चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के निर्देश पर वीरवार को मॉक ड्रिल (आपदा में बचाव की तैयारियों को परखने के लिए किए जाने वाला पूर्वाभ्यास) किया गया। देहरादून में तीन स्थलों पर मॉक ड्रिल किया।

सुबह 9.30 बजे राज्य में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 5.8 रियेक्टर स्केल मापी गई।

आपदा परिचालन केंद्र से सुबह 9.32 बजे सभी तहसीलों, पुलिस थानों को वायरलेस के माध्यम से सूचना दी गई। सूचना में कहा गया कि अगर किसी क्षेत्र में नुकसान को सूचना हो तो आपदा परिचालन केंद्र को सूचित किया जाए। सुबह 9.45 बजे राजकीय बालिका इंटर कॉलेज राजपुर रोड (जीजीआईसी) की प्रधानाचार्य ने फोन पर बताया कि स्कूल के भवन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। इसमें तीस से चालीस बच्चे व अन्य स्टाफ फंसा हुआ है। यह सूचना मिलते ही एसडीएम हरगिरि सिंह मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही एनडीआरएफ का तीस सदस्यीय दल और एसडीआरएफ का बीस सदस्यीय दल मौके पर पहुंचा। इनके साथ ही सिविल डिफेस के स्वयंसेवियों ने बचाव कार्य संभाला। पांच लोग घायल पाए गए। इन्हें 108 एंबुलेंस में दून अस्पताल ले जाया गया। तीन सामान्य घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया। दो गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया गया । बचाव दल द्वारा सुबह 10.54 बजे राहत व बचाव कार्य पूर्ण किया गया।

वहीं आपदा परिचालन केंद्र पर सुबह 10.17 बजे सूचना प्राप्त हुई कि दून चिकित्सालय की इमरजेंसी इमारत में आग लग गई। सूचना मिलते ही फायर टीम को मौके पर रवाना किया गया। एसडीआरएफ की दस सदस्यीय टीम व फायर की 11 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची। सुबह 10.40 बजे आग पर काबू पा लिया गया। फायर व एसडीआरएफ की टीम ने चार घायल लोगों को रेस्क्यू किया। दो घायलों को आईसीयू जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया। सुबह 10.29 बजे सूचना मिली कि

पुरकल गांव में भूकंप के कारण कुछ लोग इमारत के नीचे दबे हुए हैं। सड़क भी बाधित हो गई है जिस कारण जाम की स्थिति हो गई है। सूचना मिलते ही प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग की छह सदस्यीय टीम एक जेसीबी व एक डोजर सहित घटना स्थल पर पहुंची। पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मलबा हटाते हुए रेस्क्यू आपरेशन चलाया। घटना में एक घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्वार्ज कर दिया गया।

आपदा की सूचना पर मुख्य विकास अधिकारी झरना कमठान ने आपदा कंट्रोल रूम में मानिटरिंग किया। उन्होंने घटनास्थल जीजीआईसी राजपुर रोड और दून अस्पताल का भर्मण किया। उन्होंने जानकारी हासिल कर अफसरों से समन्वय बनाया। इसके साथ ही घायलों का हालचाल पूछा। समन्वित ढंग से सारी व्यवस्थाओं  का जायजा लिया।

अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व रामजीशरण शर्मा ने पुलिस लाइन रेसकोर्स में पुलिस अधिकारियों के साथ मोर्चा संभाला। रेस्क्यू टीमों को घटना स्थल के लिए रवाना किया। वहीं आईआरएस सिस्टम से जुड़े अधिकारियों ने कंट्रोलरूम से तथा मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू आपरेशन चलाया।

मॉक ड्रिल के दौरान दून अस्पताल इमरजेंसी में व्यवस्था की हकीकत सामने आई। यहां पर वास्तविक मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा।

मॉक ड्रिल के तय समय से पहले ही दून अस्पताल की इमरजेंसी का मुख्य गेट बंद कर दिया गया था। यहां पर बड़ी संख्या में मरीजों को प्रवेश ही नहीं करने दिया गया। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों की तबीयत बहुत खराब थी।

उन्हें ओपीडी जाने की सलाह दी गई। सभी मरीज तकलीफ में थे लेकिन सिक्योरिटी गार्डों ने उन्हें अंदर जाने ही नहीं दिया। जो मरीज पहले से भीं थे उनकी भी समुचित देखभाल नहीं की गई। उन्हें इंटर्न के हवाले कर दिया गया। लिफ्ट को भी बंद कर दिया गया। इस कारण मरीजों व अन्य लोगों को सीढ़ियों से जाना पड़ा। दून अस्पताल इमरजेंसी में वास्तविक मरीजों से किनारा कर लिया गया। हालांकि, एनडीएमए ने इसे गलत माना है। उनका कहना था कि दून अस्पताल के पास समुचित स्टाफ ही नहीं है। इमरजेंसी की दशा अच्छी नहीं है। अगर चिकित्सालय प्रशासन वास्तविक मरीजों से किनारा करेगा तो यह हैरानी वाली बात है। दून अस्पताल प्रबंधन को इस बात का इल्म ही नहीं है कि अगर उनके पास अधिक मरीज आ जाएंगे तो उनका इलाज कहां और किस तरह होगा? डाटा बेस व नेटवर्क की कमी पाई गई है।

Rupesh Negi

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